असम राइफल्स के सूबेदार मेजर की हत्या में छह दोषियों को उम्रकैद की सजा

असम राइफल्स के जवान शशि भूषण तिवारी की हत्या के मामले में छह अभियुक्तों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी है.

सिविल कोर्ट भभुआ के एडीजे द्वितीय अजीत कुमार मिश्रा ने मामले में सुनाया फैसला प्रत्येक दोषियों पर कोर्ट ने लगाया जुर्माना, नहीं देने पर छह माह अतिरिक्त कारावास पिलर टेढ़ा होने पर एक थप्पड़ मारने पर की गयी थी सूबेदार की नृशंस हत्या अदालत ने मृतक की विधवा पत्नी को क्षतिपूर्ति दिलाने का भी दिया आदेश भभुआ सदर. सिविल कोर्ट भभुआ के एडीजे द्वितीय अजीत कुमार मिश्रा की अदालत ने गुरुवार को एक अहम फैसले में चांद थाना क्षेत्र निवासी और असम राइफल्स के जवान शशि भूषण तिवारी की हत्या के मामले में छह अभियुक्तों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. आजीवन कारावास की सजा पाये दोषियों में चैनपुर थानाक्षेत्र के मेढ़ गांव निवासी सरवन गोंड़ पिता दीनानाथ गोंड़, राकेश गोंड़ पिता दीनानाथ गोंड़, सुभाष सिंह पिता बचाऊ सिंह और अर्जुन कुमार पिता नचकू गोंड़ सहित चांद थानाक्षेत्र के बभनियाव गांव निवासी अनिल गोंड़ पिता कुमार गोंड़ और चैनपुर थाना क्षेत्र के तेनौरा गांव निवासी राजेश कुमार उर्फ राजेश राम पिता सुदामा राम है. जानकारी के अनुसार, धारा 302/ 34 भादवी में हत्या में सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सहित प्रत्येक अभियुक्तों पर कोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना नहीं देने पर छह माह अतिरिक्त कारावास की सजा भी सुनायी है. इसके अलावा कोर्ट ने धारा 120 भादवि में भी सभी अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा और प्रत्येक अभियुक्त को एक-एक लाख रुपये का जुर्माना और जुर्माना नहीं देने पर छह माह का कारावास की सजा न्यायालय ने सुनायी है. गौरतलब है कि केस की सूचिका सीमा तिवारी अधिवक्ता पति शशि भूषण तिवारी चांद ने 17 जून 2022 को सुबह 6:30 बजे सुबह में चांद थानाध्यक्ष के समक्ष बयान दिया था कि उसके पति असम राइफल्स सुरक्षा बल में सलोन जिला मणिपुर राज्य में सूबेदार मेजर के पद पर कार्यरत थे और वह छुट्टी लेकर 08 मई 2022 को अपने गांव चांद आये हुए थे. इस बीच वह 16 जून 2022 को अपने बच्चों को देखने के लिए रामनगर वाराणसी स्थित अपने मकान पर चली गयी थी. इसी दौरान 16 जून 2022 को 12 बजे रात में उसके पति शशि भूषण तिवारी को मुद्दालय सरवन गोंड़, राकेश कुमार, अनिल गोंड़, राजेश राम उर्फ लड्डू, अर्जुन गोंड़, सुभाष सिंह आदि ने मिलकर बिजेंदर तिवारी के घर के बरामदे में लगे चौकी पर सोये उसके पति शशि भूषण तिवारी को फरसा और कुदाल से वार कर उनकी हत्या कर दी. घटना का कारण मृतक शशि भूषण तिवारी के नये मकान का ठेका मुद्दालयों को दिया था, सभी 20 दिनों से मकान का काम कर रहे थे. इसी बीच पिलर ढालने के दौरान वह पिलर टेढ़ा हो गया था. इसी बात को लेकर शशि भूषण तिवारी ने श्रवण कुमार को एक थप्पड़ मार दिया था. इसी घटना को लेकर सभी अभियुक्तों ने शशि भूषण तिवारी की फरसा, कुदाल और लोहे के राॅड से वार कर हत्या कर दी थी. इस चर्चित केस में अपर लोक अभियोजक मीना सिंह व सूचिका के अधिवक्ता नागेंद्र मिश्रा व मंटू पांडेय थे, जबकि बचाव पक्ष से अधिवक्ता अजीत कुमार सिंह थे. न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार को इस फैसले की प्रति भेजी जा रही है, जिसमें सूचक सीमा तिवारी अधिवक्ता जो मृत जवान की पत्नी है और विधवा हो गयी है. उनको सरकार की ओर से मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि जो जिला विधिक सेवा प्राधिकार कैमूर को उचित लगे, वह दिलाने का प्रयास करें.

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By Vikash kumar

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