कैमूर : बारिश से लौटी शुकुल मड़ैया पहाड़ की खूबसूरती, सेल्फी लेने आ रहे सैकड़ों लोग

कैमूर का शुकुल मड़ैया पर्वत बारिश के बाद फिर से जीवंत हो उठा है. गर्मी की आग से झुलसे पेड़-पौधों में नई हरियाली लौट आई है, और घाटियों से बहते झरने मन मोह रहे हैं. प्रकृति के इस मनमोहक दृश्य को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुँच रहे हैं.

Shukul Madaiya Hill Kaimur : आए दिन थम-थम के हो रही बारिश के कारण भगवानपुर-मसहीं के मध्य भाग में स्थित शुकुल मड़ैया पर्वत का यौवन वापस लौट आया है. भगवानपुर-मुंडेश्वरी पथ से गुजरने राहगीरों के वाहनों के पहिए इसकी खुबसूरती को देख थम जाया करते हैं. दरअसल बारिश के मौसम ने पहाड़ की सुखी और मुरझाई हुई प्रकृति में नई जान फूंक दी है. बारिश के पानी से पहाड़ के तमाम हिस्सों में पेड़-पौधों की पत्तियों पर जमी धूल अब पूरी तरह धुल गई है, जिससे उसके चारों ओर हरी-भरी व बादलों के चादर छा गई है. वहीं शुकुल मड़ैया पर्वत के फाटियों (घाटियों) से निकलने वाली झरनों के कलकल की आवाज भी खुद के तरफ लोगों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं.

गर्मी के मौसम में अगलगी से झुलसे थे पेड़-पौधे

आपको बता दें कि बीती गर्मी में शुकुल मड़ैया पर्वत के अलग-अलग हिस्सों में आग लगने की एक के बाद एक करके कई घटनाएं घटित हुईं. जिसके आगोश में आकर पहाड़ के पेड़-पौधे काफी हद तक झुलस गए थे. जिससे उसकी रौनक काफी हद तक धूमिल हो चुकी थी. मगर आए दिन हो रही बारिश से एक बार फिर उक्त पहाड़ की हरियाली और ताजगी लौट आई है. जिससे एक बार फिर यह चमकदार और जीवंत दिखाई देने लगा है.

एक जगह है नदी, पहाड़ और पुल का मनोरम संगम

शुकुल मड़ैया पर्वत की घाटियां और उसकी ढलाने हरी-हरी घास और जंगली फूलों से भर गई हैं. जो कि देखते ही बनता है. इस पहाड़ के तराई से होकर गुजरने वाली सुवर्णा नदी (सुवरन नदी) जहां एक तरफ पहाड़ के खुबसूरती में चांद लगाता है, वहीं नदी के उपर बने भगवानपुर और माता मुंडेश्वरी धाम को जोड़ने वाला सोन उच्चस्तरीय नहर का सिंचाई पुल भी पहाड़ की आकर्षकता बढ़ाने में खुद की ओर से कोई कसर नहीं छोड़ता है. अब आलम यह है कि आए दिन इस रास्ते गुजरने वाले पथिक उस ओर निरेखे बगैर आगे नहीं बढ पाते हैं, मानों एसा प्रतीत होता हो कि जैसे कि शुकुल मड़ैया पर्वत में कोई चुंबकीय बल काम कर रहा हो और वह राहगीरों को खुद की ओर खींच रहा हो.

पहाड़ की खूबसूरती को मोबाइल में कैद करने पहुंच रहे लोग

खास बात एक यह है कि बारिश के दौरान पहाड़ के घाटियों में बादल तैरते हुए मालूम पड़ते हैं, जो कि एक अद्भुत घटना की तरह महसूस होता है. प्रकृति के इस मनमोहन और सुकून भरे दृश्य को देखने के लिए स्थानीय प्रखंड क्षेत्र के साथ-साथ जिले के विभिन्न हिस्सों से युवाओं की कई टोली शहरी भाग दौड़ की जिंदगी से उबकर यहां पहुंचते हैं, और इसकी खूबसूरती को मोबाइल के कमरे में कैद करने के साथ-साथ सेल्फी पोज भी लिया करते हैं. शुकुल मड़ैया पर्वत के पास से गुजरने वाली ठंडी हवाओं की झोंके व धुंध भरी वादियों में टहलने के लिए भी लोग सुबह-शाम यहां पहुंचने लगे हैं.

सावन माह में प्राचीन शिवालय में लगती है भीड़

गौरतलब है कि सैकड़ों फीट ऊंची शुकुल मड़ैया पर्वत के शिखर पर शुकलेश्वर महादेव नामक एक प्राचीन शिवालय है. जहां प्रत्येक सावन के पावन माह में कैमूर जिले के साथ-साथ दूरदराज इलाकों से प्रत्येक दिन हजारों की संख्या में दर्शनार्थी पहुंचते हैं और शुकलेश्वर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. शुकुल मड़ैया पर्वत को उच्च स्तर पर प्रचलित करने में उक्त शिवालय का अहम योगदान रहा है.


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Author: Pankaj singh

Published by: Anjani Pandey

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