Kaimur News: जिले में विभिन्न विभागों और बैंकों के बकायेदारों से सरकारी राजस्व की वसूली के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. शुक्रवार को समाहरणालय स्थित मुंडेश्वरी सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने अगस्त माह तक के नीलाम पत्र (सर्टिफिकेट केस) वादों की समीक्षा की. डीएम ने निर्देश दिया कि बड़े बकायेदारों पर शिकंजा कसते हुए उनके बैंक खातों और चल-अचल संपत्तियों की कुर्की-जब्ती की जाए तथा लंबित गिरफ्तारी वारंटों का शत-प्रतिशत तामिला कराया जाए.
501 करोड़ के 17 हजार से अधिक वाद लंबित, वसूली धीमी होने पर जताई नाराजगी
समीक्षा के दौरान सामने आया कि जिले के विभिन्न नीलाम पत्र न्यायालयों में कुल 17,867 वाद दर्ज हैं, जिनमें लगभग 501.80 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि फंसी हुई है. अब तक केवल 380 वादों का निष्पादन कर 9.19 करोड़ रुपये की वसूली की जा सकी है, जिसमें अगस्त माह में 40 मामलों से वसूले गए 1.06 करोड़ रुपये शामिल हैं. वादों के निष्पादन की इस धीमी गति पर जिलाधिकारी ने गहरा असंतोष व्यक्त किया और सभी नीलाम पत्र अधिकारियों को त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने की हिदायत दी.
टॉप-10 बड़े बकायेदारों पर एक्शन, 582 बॉडी वारंट लंबित
जिले के थानों में वर्तमान में 582 बॉडी वारंट और 180 डिस्ट्रेस वारंट लंबित हैं. डीएम ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों (एसडीपीओ) और सभी थानाध्यक्षों को आपसी तालमेल बनाकर वारंटों का तत्काल तामिला कराने का निर्देश दिया. साथ ही जिले के 10 सबसे बड़े बकायेदारों को जारी नोटिसों की सुनवाई जल्द पूरी करने और जिन मामलों में आपत्ति खारिज हो चुकी है या वारंट जारी है, उनमें बैंक खाते फ्रीज करने, संपत्तियों को जब्त करने और गिरफ्तारी की कार्रवाई तेज करने को कहा.
बैंकों के 222 करोड़ फंसे, डाटा मिलान का टास्क
समीक्षा में पाया गया कि सबसे अधिक 222.37 करोड़ रुपये के मामले विभिन्न बैंकों से संबंधित हैं. डीएम ने बैंक प्रबंधकों और नीलाम पत्र पदाधिकारियों को संयुक्त रणनीति बनाकर रिकवरी में तेजी लाने का निर्देश दिया. इसके अलावा नीलाम पत्र शाखा और विभागों के प्रपत्रों का शत-प्रतिशत मिलान करने को कहा गया ताकि आंकड़ों में कोई विसंगति न रहे. बैठक में एडीएम, मोहनियां व भभुआ के एसडीएम, डीसीएलआर, जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी सहित सभी सीओ, बीडीओ और बैंकों के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे.
