कैमूर : रामगढ़ में सड़क पर बंदरों का जमावड़ा बना मुसीबत, राहगीरों में डर और भूख से भटक रहे वन्यजीवों की कहानी

रामगढ़ के सूर्यपुरा पुल के पास बंदरों का झुंड राहगीरों के लिए मुसीबत बन गया है. अचानक सड़क पर आकर ये बंदर खाने-पीने की चीजें छीन लेते हैं, जिससे दुर्घटना का डर बना रहता है. यह समस्या इन वन्यजीवों के भोजन और सुरक्षित आश्रय की कमी की ओर भी इशारा करती है.

रामगढ़. मोहनिया-बक्सर मुख्य पथ पर सूर्यपुरा पुल के समीप इन दिनों दर्जनों बंदरों का जमावड़ा राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. सड़क के दोनों किनारों और आसपास के मैदानी इलाकों में घूम रहे बंदरों के कारण बाइक और साइकिल सवारों के साथ पैदल राहगीरों और बच्चों में भी डर बना रहता है.

राहगीरों से खाद्य सामग्री झपटने का प्रयास

स्थानीय लोगों के अनुसार बंदर अचानक सड़क पर आ जाते हैं. कई बार राहगीरों के हाथों में मौजूद खाद्य सामग्री और सामान को झपटने का प्रयास करते हैं. इससे सड़क पर अचानक अफरातफरी की स्थिति बन जाती है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है.

भूख बंदरों को सड़क तक खींच ला रही

राहगीरों के लिए परेशानी बने इन बंदरों की स्थिति को केवल आतंक के रूप में देखना वन्यजीवों की पीड़ा को नजरअंदाज करना होगा. कभी जंगलों में कंद-मूल, फल और अन्य प्राकृतिक आहार के सहारे जीवन बिताने वाले ये वन्यजीव अब भोजन की तलाश में आबादी और मुख्य सड़कों तक पहुंचने को मजबूर हैं.

बच्चों के साथ सड़क किनारे भोजन तलाशते बंदर

सूर्यपुरा पुल के समीप बंदरों का झुंड छोटे बच्चों के साथ सड़क किनारे उगी हरी घास खाते नजर आता है. भूख से परेशान बंदर जब राहगीरों के हाथों में खाद्य सामग्री देखते हैं, तो उसे छीनने का प्रयास करते हैं. ऐसे में मामला केवल राहगीरों की सुरक्षा का नहीं, बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण और उनके सुरक्षित प्राकृतिक आवास का भी है.

वन क्षेत्र से मैदानी इलाके में पहुंच रहे वन्यजीव

स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास के वन क्षेत्र में भोजन और सुरक्षित ठिकानों की कमी के कारण बंदरों के झुंड धीरे-धीरे मैदानी इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं. सड़क किनारे इन्हें घंटों भोजन की तलाश में भटकते देखा जा सकता है. कई बार बंदर सड़क के बीच में बैठ जाते हैं, जिससे तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक आने का खतरा रहता है.

मुख्य सड़क के किनारे घास की पत्तियां व सब्जी खाते बंदर, मुख्य सड़क पर भोजन की तलाश में अपने कुनबे के साथ विचरण करते बंदर, | Prabhat Khabar Network

वर्षों से बनी हुई है बंदरों की समस्या

ग्रामीणों के अनुसार बंदरों की समस्या कोई नई बात नहीं है. क्षेत्र के कई गांवों में वर्षों से बंदरों के उत्पात और उनके लिए भोजन व सुरक्षित स्थान की कमी की शिकायत सामने आती रही है. इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं होने से समस्या दोबारा सामने आ जाती है.

2020 में रोहिया गांव से 12 बंदरों का हुआ था रेस्क्यू

बंदरों की समस्या का अंदाजा वर्ष 2020 की एक घटना से लगाया जा सकता है. अक्टूबर 2020 में रोहिया गांव में बंदरों के बढ़ते उत्पात की शिकायत के बाद जिला मुख्यालय से वन विभाग की छह सदस्यीय टीम गांव पहुंची थी. टीम ने अभियान चलाकर करीब 12 बंदरों को पकड़ा था और उन्हें वन विभाग ले जाया गया था. इसके बाद कुछ समय तक ग्रामीणों को राहत मिली, लेकिन बाद में समस्या फिर सामने आ गई.

बिशनपुरा में बंदरों के कारण चुनाव बहिष्कार की नौबत

रामगढ़ क्षेत्र में बंदरों की समस्या कितनी गंभीर रही है, इसका उदाहरण बिशनपुरा गांव भी है. वर्ष 2020 में बंदरों के उत्पात से परेशान ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन के रवैये से नाराज होकर विधानसभा चुनाव में मतदान बहिष्कार का ऐलान कर दिया था.

अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीण हुए थे तैयार

चुनाव से कुछ दिन पहले जिले और अनुमंडल स्तर के अधिकारियों की टीम बिशनपुरा गांव पहुंची थी. अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था. इसके बाद ग्रामीण मतदान के लिए तैयार हुए थे.

बंदरों और राहगीरों दोनों की सुरक्षा जरूरी

स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों को पकड़कर किसी दूसरी जगह छोड़ देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. जब तक उनके प्राकृतिक आवास, भोजन और सुरक्षित विचरण क्षेत्र को लेकर ठोस व्यवस्था नहीं होगी, तब तक वे आबादी और सड़कों की ओर आते रहेंगे. दूसरी ओर मुख्य सड़क पर बंदरों की मौजूदगी राहगीरों के लिए भी दुर्घटना का खतरा बढ़ा रही है.

वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग

लोगों ने वन विभाग और प्रशासन से सूर्यपुरा पुल के समीप बंदरों की स्थिति का तत्काल जायजा लेने की मांग की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों को सुरक्षित प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराने के साथ सड़क पर उनकी मौजूदगी से होने वाले हादसों को रोकने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए.

भूख और सुरक्षित आश्रय की तलाश को समझना जरूरी

बंदरों को केवल आतंक मानकर खदेड़ना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. उनके सड़क तक पहुंचने के पीछे भोजन और सुरक्षित आश्रय की तलाश भी एक बड़ी वजह है. इसलिए वन्यजीवों की सुरक्षा और राहगीरों की परेशानी दोनों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है.

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By संजय जायसवाल

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