फोटो 12 एक्सप्रेसवे का चल रहा निर्माण कार्य 13 विनोद तिवारी कुसहा उत्तर प्रदेश 14 हिमाचल तिवारी कुसहा उत्तर प्रदेश = उत्तर प्रदेश के लोग भी एक्सप्रेसवे में अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे के लिए हो रहे हैं परेशान = उत्तर प्रदेश में बिहार से दोगुना अधिक काफी पहले हो चुका है मुआवजे का भुगतान = उत्तर प्रदेश में बगैर अधिकारियों के यहां दौड़ लगाये मुआवजे का हो गया भुगतान बनारस-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित जमीन का मामला मुआवजा के लिए यूपी से बिहार तक रोज 100 किमी दौड़, फिर भी नहीं हो रहा भुगतान भुगतान के लिए राजस्व कर्मियों व अधिकारियों की अफसरशाही से परेशान हैं अन्नदाता भभुआ कार्यालय. वैसे किसान जो उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और उनकी जमीन उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों जगह है, उन्हें उत्तर प्रदेश की तुलना में बिहार में मुआवजा भी आधा मिल रहा है और मुआवजे के भुगतान के लिए उत्तर प्रदेश से बिहार तक दौड़ लगाते-लगाते थक गये, लेकिन आज तक उन्हें बनारस-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे में अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे का भुगतान नहीं किया जा सका है. चंदौली जिले के कुसहा के रहने वाले हिमाचल तिवारी और जामवंत तिवारी बताते हैं कि बनारस-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे में उनकी जमीन उत्तर प्रदेश व बिहार दोनों राज्यों में गयी है. उनकी दोनों राज्यों में जमीन है, उत्तर प्रदेश में 50 डिसमिल जमीन एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित किया गया था, जिसके मुआवजा का भुगतान 28 लाख 59000 रुपये 2025 में ही कर दिया गया और बिहार में चांद प्रखंड के गोईं मौज में 23 डिसमिल जमीन अधिग्रहित किया जा रहा है, जिसका मुआवजा करीब नौ लाख रुपये मिलना है, जोकि उत्तर प्रदेश से काफी कम है. लेकिन इसके बावजूद यह मुआवजा देने में भी प्रशासन हमें काफी परेशान कर रहा है, प्रतिदिन नये नये कागजात के लिए हमें दौड़या जाता है. स्थिति का आलम यह है कि भू अर्जन कार्यालय में जाते हैं, तो कहा जाता है कि राजस्व कर्मचारी से परिमार्जन कराकर लाइये, राजस्व कर्मचारी के पास जाते हैं तो पता चलता है कि वह हड़ताल पर हैं, परिमार्जन के लिए आवेदन भी करते हैं तो उसे पर कोई निर्णय नहीं लिया जाता. स्थिति यह हो गयी है कि हम प्रतिदिन मुआवजा के लिए उत्तर प्रदेश से बिहार की दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन कोई हमारी सुनने वाला नहीं है. जब प्रशासन को एक्सप्रेसवे के लिए हमारी जमीन पर कब्जा करना था, तो हमारी खड़ी फसल को रौंद कर जमीन पर कब्जा कर लिया गया और आज जब मुआवजा देने की बारी आयी है, तो हमारी पीड़ा तक सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है. प्रतिदिन हमें उत्तर प्रदेश से बिहार दौड़या जा रहा है, लेकिन कोई काम नहीं हो पा रहा. = एक ही एक्सप्रेसवे में दो तरह का मुआवजा और परेशानी अलग से जामवंत तिवारी बताते हैं कि पहले तो हम बिहार सरकार द्वारा बाजार मूल्य के अनुसार जमीन का एमडवी आर नहीं होने के कारण उत्तर प्रदेश की तुलना में आधा मुआवजा लेने को विवश है. उत्तर प्रदेश में और बिहार में जो जमीन एक्सप्रेसवे में जा रही है, दोनों जमीन एक तरह की है. लेकिन उत्तर प्रदेश में उसी जमीन का बिहार की तुलना में दोगुना मुआवजा मिल रहा है, जबकि यहां पर वहां की तुलना में आधा मुआवजा ही मिल रहा है, उसके लिए भी जिस तरह से दौड़ाया जा रहा है. किसानों के ऊपर प्रशासन द्वारा किया जा रहा यह कार्य काफी अनैतिक है, लेकिन इसे लेकर सुनने वाला कोई नहीं है. प्रशासनिक पदाधिकारियों में अगर थोड़ी संवेदना होती तो वह यह समझ पाने की पहले ही बिहार में हम किसानों को उत्तर प्रदेश के तुलना में काफी कम मुआवजा दिया जा रहा है, ऐसे में उन्हें बगैर परेशान किये जो मुआवजा है उसे उनके खाते में भुगतान कर देना चाहिए, लेकिन भुगतान करने के बजाय हमें दौड़ाया जा रहा हैं. ऐसा लग रहा है कि यहां प्रशासन नाम की कोई चीज ही नहीं है. किसी भी अधिकारी या कर्मचारी में किसी का कोई डर नहीं है. वह मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं और इसे लेकर अगर हम किसी से शिकायत भी करते हैं, तो हमारी बात तक सुनने वाला कोई नहीं है. इसका नतीजा है कि बेलगाम अफसरशाही और कर्मचारियों के मनमानी के कारण हम किसान कई महीनों से सिर्फ ऑफिसों का चक्कर लगा रहे हैं. = आर्बिट्रेटर के यहां किया गया, अपील आज तक नहीं हुआ दोगुना उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के कुसहा के ही रहने वाले विनोद तिवारी ने बताया कि उनका गोईं मौजा में एक एकड़ जमीन एक्सप्रेसवे में अधिग्रहित की गयी है, उसका मुआवजा 9 लाख 76 हजार रुपये निर्धारित की गयी है. आर्बिट्रेटर के यहां मुआवजा को दोगुना करने के लिए अपील भी की गयी है, लेकिन आज तक मुआवजा को दोगुना करने का आदेश यहां आया ही नहीं, जब तक जमीन पर प्रशासन द्वारा कब्जा नहीं किया गया था, तब तक लोगों का आवेदन लेकर आर्बिट्रेटर के यहां अपील कर कैंप लगाकर मुआवजा को दोगुना किया जा रहा था, लेकिन जब जमीन पर कब्जा कर काम शुरू करा दिया गया, तब आर्बिट्रेटर के यहां सुनवाई में भी प्रशासन कोई रुचि नहीं दिख रहा है और न हीं आर्बिट्रेटर के यहां से दोगुना होने का कोई आदेश यहां आया है, जिसका नतीजा है कि हमें उत्तर प्रदेश की तुलना में यहां पर 25 परसेंट ही मुआवजा दिया जा रहा है. इसे लेकर हम प्रतिदिन भू अर्जन कार्यालय से लेकर चांद के अंचल कार्यालय में दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन हमारी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है. प्रशासन को सिर्फ इससे मतलब था कि किसानों की जमीन को जबरन कब्जा कर लिया जाये. वहीं, दूसरी तरफ जब हमारी बात कोई नहीं सुन रहा, तो ऐसा लग रहा है कि प्रशासन किसानों के बजाय रोड बनाने वाली कंपनी के लिए काम कर रही है. = क्या कहते हैं जिला भू अर्जन पदाधिकारी जिला भूअर्जन पदाधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि जिनका अंचल स्तर पर परिमार्जन या अन्य राजस्व संबंधी कार्य के लिए भुगतान नहीं हो पा रहा है, वैसे मामले में राजस्व कर्मचारी से लेकर पदाधिकारी तक के ऊपर कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है. वहीं, दूसरी तरफ जिनका मुआवजा आर्बिट्रेटर के यहां दुगना नहीं हुआ है उसे लेकर डीएम के स्तर से आर्बिट्रेटर को पत्र लिखा गया है कि जिला स्तर पर कैंप लगाकर मामले की सुनवाई की जाये, ताकि जल्द से जल्द मामले का निष्पादन हो और उसके अनुसार मुआवजा का भुगतान किया जा सके. साथ ही हम लोग अपील कर रहे हैं कि जिनका अभी जो भी मुआवजा है वह ले लें और जब आर्बिट्रेटर के यहां से मुआवजा दोगुना हो जायेगा तो बाद में उसका भी भुगतान कर दिया जायेगा.
एक तरफ मुआवजा भी आधा, दूसरी तरफ पैसे के लिए यूपी से बिहार की लगा रहे दौड़
उत्तर प्रदेश के लोग भी एक्सप्रेसवे में अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे के लिए हो रहे हैं परेशान
