फोटो 5 शहर के अति व्यस्त कचहरी पथ पर लगा जाम = 10 सालों से चल रहा बैठकों का दौर, पर शहर में जाम की समस्या बरकरार भभुआ सदर. आज विधानसभा चुनाव 2025 का परिणाम आनेवाला है. इसके साथ ही विधानसभा चुनाव का कार्य समाप्त हो जायेगा और चुनाव कार्य में व्यस्त अधिकारी भी फ्री हो जायेंगे. अधिकारियों के चुनाव कार्य से मुक्त हो जाने के बाद अब शहर की सबसे बड़ी समस्या बन रहे जाम और अतिक्रमण के मामलों पर ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि विधानसभा चुनाव के दौरान से लेकर अब तक शहर में जाम एक गंभीर समस्या बन कर उभर रही है. स्थिति यह हो जा रही है कि लचर व्यवस्था की वजह से हर दस मिनट के अंतराल पर चौक चौराहे पर जाम लग रहे है. गौरतलब है कि भभुआ शहर में फुटपाथ की मची लूट और चरमरायी यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जिला और पुलिस व नगर प्रशासन के वरीय अधिकारियों के बीच पिछले दस से भी अधिक वर्षों से पहल और बैठकें की जा रही है. बैठकों में शहर की लचर यातायात व्यवस्था व लोगों को जाम से निजात दिलाने के लिए वरीय पदाधिकारियों की बैठक में योजनाएं भी खूब बनायी गयी और योजनाओं को अमलीजामा के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक व पुलिस पदाधिकारियों द्वारा इस दिशा में प्रयास भी किया गया, लेकिन शहर की आधारभूत संरचनाओं और कुछ लोगों के आगे सभी प्रयास अब तक असफल साबित हो रहे है. =शहर में सवारी वाहनों के लिए स्टैंड तक नहीं नगर प्रशासन की विफलता का ही परिणाम हैं कि आज भी शहर में चलने वालों ऑटो व इ रिक्शा सहित सवारी वाहनों के लिए एक अदद स्टैंड के लिए जगह तक नहीं ढूंढ़ा जा सका. सुवरन नदी, हवाई अड्डा के समीप आदि जगहों पर सवारी वाहनों को खड़े करने के लिए जमीन भी ढूंढ़ा गया, लेकिन इतने सालों के बाद भी उक्त स्थान पर ना तो कोई स्टैंड का ढांचा ही खड़ा हुआ और ना ही वहां से अबतक सवारी वाहन चलना ही शुरू किया जा सका. इन जगहों से चलने वाले सवारी वाहन चालकों का भी कहना है कि शहर में स्टैंड बनाकर नहीं दिया गया है, जिसके चलते वे लोग पटेल व जेपी चौक और बिजली कॉलोनी के सामने अपना वाहन मजबूरी में खड़े करते है. लेकिन, स्टैंड बनाकर देने में नाकाम नगरपालिका अक्सर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर उनके वाहनों पर जुर्माना ठोकती है और उन्हें वाहन अंयत्र ले जाने को कहा जाता है. अगर, उन्हें स्टैंड बनाकर मिले तो वह सभी पटेल चौक व बिजली कॉलोनी सामने अपने वाहन क्यों खड़े करेंगे. = पुलिस बनी रहती है मूकदर्शक शहर को जाम मुक्त कराने के लिए नगर पर्षद और पुलिस व परिवहन विभाग पिछले दस साल से लगातार योजनाएं बनाते और बैठकें करते आ रहा है. इस बीच भभुआ व मोहनिया के चौक चौराहों पर ट्रैफिक इंस्पेक्टर के साथ ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने के लिए सिपाहियों, होमगार्ड व हेड कांस्टेबलों की संख्या भी बढ़ायी गयी है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा. कारण योजनाओं का सही से क्रियान्वयन नहीं होना हैं, क्योंकि प्लान बनने के शुरुआती दो-चार दिन तो उसका असर शहर में खूब दिखता है, लेकिन इसके बाद वही ढाक के तीन पात जैसी स्थिति हो जाती है. ट्रैफिक कर्मी अपने लापरवाह अंदाज में आ जाते हैं, उन्हें देखने से स्पष्ट प्रतीत होता हैं कि जाम लगता है तो लगने दो, उनका इससे क्या वास्ता. मोहनिया का स्टूवरगंज हो या फिर भभुआ का पटेल व जेपी चौक, एकता चौक, इन स्थानों पर पुलिस के जवानों के रहने के बावजूद उनके सामने ही ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सवारी वाहन खड़े रहते हैं या खड़े कर दिये जाते हैं, लेकिन वहां तैनात जवान उनपर कार्रवाई न कर सिर्फ मूकदर्शक बने रहते हैं.
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