Kaimur Mohania OPD Service Shutdown : कैमूर जिले के अनुमंडलीय अस्पताल मोहनिया में डॉक्टर के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध में मंगलवार को चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा बंद कर दी. इसके कारण इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ. एसडीएम रत्ना प्रियदर्शनी, सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक और जिला कार्यक्रम प्रबंधक ऋषिकेश जायसवाल अस्पताल पहुंचे और चिकित्सकों से बातचीत की.
Kaimur News : 24 घंटे में कार्रवाई का आश्वासन
अधिकारियों ने चिकित्सकों को भरोसा दिलाया कि मारपीट के आरोपितों की गिरफ्तारी 24 घंटे के भीतर सुनिश्चित की जाएगी. एसडीएम रत्ना प्रियदर्शनी ने डॉक्टरों से अपील की कि वे प्रशासन को कार्रवाई के लिए समय दें.
Mohania Hospital : OPD सेवा फिर शुरू
प्रशासन के आश्वासन के बाद चिकित्सकों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया. इसके बाद सुबह करीब 10:30 बजे से ओपीडी सेवा दोबारा शुरू कर दी गई, जिससे मरीजों को राहत मिली.
डॉक्टरों की चेतावनी
अस्पताल उपाधीक्षक ने स्पष्ट कहा कि यदि तय समय सीमा के भीतर आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो पूरे कैमूर जिले के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा बंद कर दी जाएगी.
उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा.
क्या था पूरा मामला
सोमवार देर रात जीटी रोड पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में चैनपुर थाना क्षेत्र के नौघरा गांव निवासी करीब 40 वर्षीय गुफरान खान की मौके पर ही मौत हो गई. वह अपनी रिश्तेदार को रांची एयरपोर्ट छोड़ने जा रहे थे और बस का इंतजार कर रहे थे, तभी तेज रफ्तार काले रंग की स्कॉर्पियो ने उन्हें टक्कर मार दी. गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें अनुमंडल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. मौत की खबर मिलते ही परिजन भड़क उठे और अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक के साथ धक्का-मुक्की व मारपीट की. हालात बिगड़ने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भभुआ भेज दिया. घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई और चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं होने पर सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.
हालात सामान्य, लेकिन नजर प्रशासन पर
डॉक्टरों के आंदोलन और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल अस्पताल की व्यवस्था सामान्य हो गई है. हालांकि अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन तय समय के भीतर आरोपितों पर क्या कार्रवाई करता है.
इस घटना ने एक बार फिर अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
