Kaimur News : कर्मनाशा मुख्य नहर को नहीं मिल रहा बिहार के हिस्से का पूरा पानी

चिंता. यूपी के मूसाखांड़ बांध में 344 फीट पानी उपलब्ध, फिर भी अनदेखी, 300 क्यूसेक पानी यूपी-बिहार सरकार के समझौते के अनुसार कर्मनाशा मुख्य नहर को धान के सीजन में है देना

कर्मनाशा. यूपी के मूसाखांड़ में 344 फुट पानी भरे रहने के बावजूद भी कर्मनाशा मुख्य नहर में बिहार के हिस्से का पानी नाम मात्र का मिल रहा है. नदी में पानी नहीं रहने से दुर्गावती प्रखंड अंतर्गत लरमा पंप कैनाल व विश्वकर्मा पंप कैनाल बंद हो गये थे. कैमूर जिले के सिंचाई विभाग अधिकारियों ने चंदौली जिले के अधिकारियों से बार-बार डिमांड करने के बाद भी अपने हिस्से का पानी बिहार के कर्मनाशा मुख्य नहर को नहीं मिल पा रहा है. जबकि, यूपी-बिहार सरकार के समझौते के अनुसार, कर्मनाशा मुख्य नहर को धान के सीजन में 300 क्यूसेक पानी देना है़ इसके बावजूद भी बिहार के हिस्से का पानी नाम मात्र का मिल रहा है. वर्तमान में सोमवार को 100 क्यूसेक पानी ही कर्मनाशा मुख्य नहर को मिल रहा है. इतने कम पानी में जीटी रोड कर्मनाशा अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना मुश्किल हो जाता है. कर्मनाशा नदी के पानी पर ही आश्रित है ढड़हर, लरमा व विश्वकर्मा पंप कैनाल

दरअसल दुर्गावती प्रखंड स्थित ढड़हर, लरमा व विश्वकर्मा पंप कैनाल कर्मनाशा नदी के पानी पर ही आश्रित है. अगर कर्मनाशा नदी में पानी नहीं रहेगा, तो ये पंप कैनाल नहीं चल पायेंगे. लरमा पंप कैनाल से लरमा, जमुरनी, छाता, करारी, कुल्हड़िया, मौहरियां, कोट्सा, मदनपुरा आदि दर्जनों गांवों के किसानों के खेतों की सिंचाई होती है. इसी तरह विश्वकर्मा पंप कैनाल से नुआंव, मसौढा, निपरान, कबिलासपुर सहित कई गांव के किसानों के खेत सिंचित होती हैं. जबकि रामगढ़ प्रखंड क्षेत्र के भी कई गांव के किसान विश्वकर्मा पंप कैनाल पर ही आश्रित है़ इसी तरह ढड़हर पंप कैनाल से ढड़हर, कानपुर, पिपरी, खजुरा ,सरैया, बड़ूरी, कुड़री आदि गांव के किसानों के खेतों की सिंचाई होती है. जहां पंप कैनाल नहीं चलने से इन गांवों के किसानों की धान की रोपनी अब तक नहीं हो पा रही थी. दुर्गावती प्रखंड में जीटी रोड के उत्तर एवं दक्षिण तरफ करीब 5 प्रतिशत ही धान की रोपनी अभी तक हो पायी है, जो चिंता का विषय है.

किसानों को फसल सिंचाई की चिंता

जानकारी के मुताबिक मूसाखाड़ बाध में इस समय फिलहाल करीब 344 फुट, 104 मीटर पानी भरा है़ वहीं, 480 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है़ जहां 10 फाटक में तीन फाटक खुले हैं. बता दें कि नौगढ़ बांध से मूसाखांड़ और मूसाखाड़ बांध से कर्मनाशा नदी के लतीफ शाह बांध में पानी आता है व लतीफ शाह बांध से ओवर होकर कर्मनाशा नदी में जल प्रवाहित होता है. जहां कर्मनाशा नदी से दुर्गावती के तीनों पंप कैनाल संचालित होते हैं. वहीं, स्थिति यह है कि दोनों बांधों में पानी भरा होने के बावजूद भी कर्मनाशा नदी सूखी हुई है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है.

यूपी सरकार को कर्मनाशा राइट मुख्य नहर को देना है 300 क्यूसेक पानी

यूपी एवं बिहार सरकार के समझौते के अनुसार बेंन हेड से कर्मनाशा मुख्य नहर को सीजन में 300 क्यूसेक पानी देना है़ लेकिन, फिलहाल सोमवार को बेन हेड से 100 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा रहा है. इतने कम पानी में कर्मनाशा टेल तक पानी पहुंचाना मुश्किल है, जो चांद के ऊपर ही रह जा रहा है. लतीफ शाह बांध में पूरा भरा है पानी- यहां से राइट एवं लेफ्ट दो नहरे निकली हुई है. राइट नहर से बिहार के कर्मनाशा मुख्य नहर को बेन हेड से पानी दिया जाता है. वहां से 12 किलोमीटर के बाद बिहार का इलाका शुरू होता है. वहीं, लेफ्ट से यूपी के चार पांच कैनाल चलते हैंं, जिनको पानी मिल रहा है और ये कैनाल चल भी रहे हैं. लेकिन, बिहार के मुख्य नहर कर्मनाशा को अपने हिस्से का भी पानी नहीं मिल रहा है. कर्मनाशा नदी और कर्मनाशा मुख्य नहर में पानी नहीं रहने से बिहार के किसानों का हाल बेहाल हो गया है. रोपनी बाधित होने से किसानों की समस्याएं बढ़ गयी है. बिहार के सिंचाई विभाग के अधिकारी की यूपी के अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है. जबकि बांधों में पानी की कमी नहीं है.

क्या कहते हैं लोग

इस संबंध में पूछे जाने पर सतीष यादव पिंटु ने बताया कि मैंने 14 जुलाई को मूसाखाड़ व लतीफ शाह बांध का जायजा लिया था. दोनों बांधों में पानी की कोई कमी नहीं है. कर्मनाशा मुख्य नहर (राइट) को इस समय 100 क्यूसेक पानी दिया जा रहा है. जहां अपने हिस्से का 300 क्यूसेक पूरा पानी बिहार को नहीं दिया जा रहा है. जबकि बेन हेड से पहले यूपी के चार-पांच राजवाहा है. सभी रजवाहे में पानी चल रहे हैं. इतने कम पानी में हर का पानी कभी भी कर्मनाशा टेल तक नहीं पहुंच सकता है.

क्या कहते हैं अधिकारी

मूसाखाड़ बांध के जेई हरीश मौर्या ने बताया कि बांध में पानी की कमी नहीं है. इस समय 344 फुट बांध में पानी उपलब्ध है. बेन हेड मालदह के अधिकारी जितने पानी का डिमांड करते हैं, उतना पानी मूसाखाड़ से डिस्चार्ज किया जाता है. इस समय 480 क्यूसेक पानी मूसाखाड़ से लतीफ शाह डैम में डिस्चार्ज किया जा रहा है.

मंगलवार को कर्मनाशा नदी में आया पानी

मंगलवार को कर्मनाशा नदी में पानी आते ही लरमा व विश्वकर्मा पंप कैनाल चलने लगे हैं. इधर, ढड़हर पंप कैनाल ने रफ्तार पकड़ ली है. जहां पहले ढड़हर पंप कैनाल पानी के अभाव में कभी बंद हो रहा था, तो कभी चालू हो रहा था. पानी नदी में बढ़ते ही तीनों पंप कैनाल चलने लगे हैं. इससे किसान भी खुशी से झूम उठे. सोमवार तक कर्मनाशा नदी सूखी हुई थी़ वहीं, मंगलवार की सुबह से ही कर्मनाशा नदी में पानी आ गया और पंप कैनाल चलना शुरू कर दिया है. लरमा पंप कैनाल में लगे तीन पंपों में दो पंप चालू हो गये हैं. जहां एक पंप में खराबी आने के कारण उसके दो ही पंप चालू हो पाये है. पंप बनकर आ जाने पर तीनों पंप चालू हो जायेंगे. वहीं, विश्वकर्मा पंप कैनाल के भी दो पंप चल रहे हैं. जहां क्षेत्र के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ गयी थी. लेकिन अब मुगलवार से पंप कैनाल चालू हो जाने से किसान अपने अपने धान की रोपनी करने के लिए खेत की जुताई करने में जुट गये हैं.

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Author: PANCHDEV KUMAR

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