खराब सर्विस से हैं परेशान, तो घर बैठे बदलें गैस एजेंसी

एलपीजी सेवा पोर्टल या मोबाइल एप के माध्यम से आसानी से बदल सकेंगे अपना वितरक

एलपीजी सेवा पोर्टल या मोबाइल एप के माध्यम से आसानी से बदल सकेंगे अपना वितरक भभुआ सदर. देशभर में एलपीजी संकट के बीच गैस एजेंसियों की मनमानी ने लोगों की परेशानी बढ़ी दी है. गैस की कालाबाजारी के साथ ही ज्यादा पैसे लेना, समय पर डिलीवरी न देना और बुकिंग व डिलीवरी में गड़बड़ी जैसी समस्याओं से ग्राहकों को दो-चार होना पड़ रहा है. इसलिए अगर एलपीजी उपभोक्ता अपनी गैस एजेंसी की खराब सर्विस से परेशान हैं, तो अब वैसे एलपीजी उपभोक्ता घर बैठे अपना डिस्ट्रीब्यूटर आसानी से बदल सकते हैं. इसके लिए कुछ आसान से स्टेप फॉलो करने होंगे. दरअसल, एलपीजी सप्लाई संबंधी नीतियों में हाल फिलहाल हुए बदलाव के बाद वितरकों ने कृत्रिम संकट खड़ा कर कालाबाजारी का धंधा तेज कर दिया है. डिस्ट्रीब्यूटर उपभोक्ताओं को कई तरह से परेशान कर रहे हैं. अब ऐसे में पीड़ित उपभोक्ता अलग-अलग तरीकों से शिकायत दर्ज कराकर न्याय की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन अगर इससे भी राहत नहीं मिल रही है, तो उपभोक्ता घर बैठे अपना एलपीजी वितरक आसानी से बदल सकते हैं और इंडेन, भारत और एचपी गैस के उपभोक्ता यह काम मोबाइल एप के माध्यम से कर सकते हैं. = वितरक बदलने के लिए एलपीजी सेवा पोर्टल पर लॉगिन जरूरी इस प्रक्रिया के तहत पहले चरण में उपभोक्ता को एलपीजी सेवा पोर्टल या संबंधित कंपनी की वेबसाइट-एप पर लॉगिन करना होता है. लॉगिन के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर और उपभोक्ता संख्या का उपयोग किया जाता है. इसके उपरांत डिस्ट्रीब्यूटर पोर्टेब्लिटी विकल्प का चयन करना होता है. वहीं, दूसरे चरण में उपभोक्ता के क्षेत्र में उपलब्ध अन्य गैस एजेंसियों की सूची दिखायी देती है. इसमें से उपभोक्ता अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार कोई भी नयी एजेंसी का चयन कर सकता है. यह चयन पूरी तरह उपभोक्ता के अधिकार पर आधारित होता है और इसके लिए किसी अतिरिक्त शुल्क की भी आवश्यकता नहीं होती है. = एजेंसी बदलने के बावजूद नहीं बदलता है कंज्यूमर नंबर तीसरे चरण में चयन की पुष्टि के लिए उपभोक्ता के मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाता है. ओटीपी दर्ज करते ही पोर्टेब्लिटी की प्रक्रिया पूरी हो जाती है और अनुरोध संबंधित कंपनी के सिस्टम में दर्ज हो जाता है. अंतिम चरण में कुछ दिनों के भीतर उपभोक्ता का कनेक्शन नयी एजेंसी से जुड़ जाता है. इस दौरान उपभोक्ता का कंज्यूमर नंबर और सब्सिडी व्यवस्था यथावत बनी रहती है, किसी प्रकार का नया कनेक्शन लेने की आवश्यकता नहीं होती है. इस व्यवस्था से जहां उपभोक्ताओं को राहत मिली है, वहीं गैस एजेंसियों के बीच भी अब प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. इससे खराब सेवा देने वाले वितरकों पर दबाव बढ़ा है और उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प मिल रहे हैं.

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By VIKASH KUMAR

VIKASH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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