पांच साल तक पुरानी योजनाओं के जियो फेंसिंग ने मनरेगा कर्मियों का बढ़ाया सिरदर्द

खेत-खलिहान व नहर-पइन नाप रहे पीआरएस, 31 मार्च तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य

खेत-खलिहान व नहर-पइन नाप रहे पीआरएस, 31 मार्च तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य

भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम, पांच वर्ष से पहले दोबारा नहीं अपलोड हो सकेंगी योजनाएं # सटीक लोकेशन मिलने पर ही खुल रहा एप वाला कैमरा चिह्नित स्थल से एक फुट भी इधर-उधर होने पर जियो फेंसिंग एप नहीं करता काम # प्रतिदिन वरीय अधिकारी जियो फेंसिंग कार्य की कर रहे हैं प्रगति समीक्षा # प्रभात खास # मोहनिया सदर. पांच वर्ष तक की पुरानी योजनाओं के जियो फेंसिंग कार्य ने मनरेगा कर्मियों का सिरदर्द काफी बढ़ा दिया है. पुरानी योजनाओं के एग्जेक्ट लोकेशन तक पहुंचने के लिए मनरेगा कर्मियों (पीआरएस) को कई किलोमीटर तक फसल लगी खेतों, पानी भरे बाहा, नहर, पइन से होकर गुजरना पड़ रहा है. सुबह से जियो फेंसिंग कार्य करने के लिए निकले कर्मी देर शाम तक अपने घर पहुंच रहे है, यदि पूर्व में क्रियान्वित योजना की लंबाई एक किलोमीटर है तो लोकेशन जीपीएस चालू कर पैदल योजना के हेड से टेल तक कर्मियों को जाना पड़ रहा है. योजना के अंतिम छोर पर जीपीएस लोकेशन को लाक (बंद) करने के बाद चार रंगों के बैलून मोबाइल पर दिखायी देते हैं. नीला बैलून का लोकेशन अपलोड करना है, जिसमें नीला बैलून का एग्जेक्ट लोकेशन खोजने के बाद ही उस योजना का जियो फेंसिंग होता है और योजना ट्रेस होती है, तभी वर्तमान डेट व टाइम के साथ अपलोड हो रहा है. पुरानी योजनाओं का एग्जेक्ट लोकेशन खोज पाना मनरेगा कर्मियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, इस तरह जियो फेंसिंग कार्य ने मनरेगा कर्मियों को पशोपेश में डाल दिया है. # जियो फेंसिंग होने वाली योजनाओं पर समय से पहले नहीं होगा कार्य विकसित भारत जी राम जी के सफल क्रियान्वयन को लेकर भले ही विशेष गाइडलाइन की जानकारी मनरेगा अधिकारी व कर्मियों को नहीं है, लेकिन जिस तरह पांच साल पुरानी सभी योजनाओं का जियो फेंसिंग किया जा रहा है, विभागीय जानकार बताते है कि यह पहल मनरेगा को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए की जा रही है. उदाहरण के तौर पर जैसे किसी बाहा का सफाई कार्य वर्ष 2024 में कराया गया है, तो अब उक्त दूरी तक उस बाहा का सफाई कार्य तीन वर्ष बाद ही कराना होता था. लेकिन उसी बाहा के नाम में थोड़ा बदलाव कर एक वर्ष बाद 2025 में ही सफाई करा दिया जाता था, कुछ योजनाएं तो बरसात शुरु होने से ठीक पहले शुरु की जाती और बारिश के होते ही योजना को फाइलों में पूर्ण कर राशि का भुगतान अवैध मजदूरों के खाते में कर बंदरबांट कर लिया जाता था. पूर्व में ऐसा अक्सर होता था कि एक ही योजना का नाम बदल बदल कर राशि की लूट की जाती थी, लेकिन अब जिस योजना का जियो फेंसिंग किया जा रहा है, पांच वर्ष से पहले उस योजना का चयन कर उसे फिर से अपलोड ही नहीं किया जा सकेगा. # स्पष्ट लोकेशन के लिए तत्कालीन कर्मियों से लेनी पड़ रही मदद पुरानी योजनाओं का जियो फेंसिंग करने के लिए पूर्व में क्रियान्वित योजनाओं के स्पष्ट लोकेशन की जानकारी के लिए वर्तमान मनरेगा कर्मियों को पुराने पीआरएस की मदद लेनी पड़ रही है, क्योंकि उन योजनाओं का किस स्थान से जियो टैग किया गया था यह जब तक स्पष्ट नहीं हो सकेगा, वर्तमान में जियो फेंसिंग कर पाना असंभव है. इसको ध्यान रखते हुए वर्तमान में पदस्थापित पीआरएस को तत्कालीन पीआरएस की सहायता लेनी पड़ रही है. बिना स्पष्ट लोकेशन के जियो फेंसिंग नहीं किया जा सकता है. चिह्नित स्थल से एक फुट भी इधर-उधर होने पर जियो फेंसिंग एप काम नहीं करता है, जिससे कर्मियों को काफी परेशानी हो रही है. इतना ही नहीं जियो फेन्सिंग कार्य के प्रगति की समीक्षावरीय पदाधिकारी प्रतिदिन कर रहे हैं. 31 मार्च 2026 तक हर हाल में सभी मनरेगा कर्मियों को जियो फेंसिंग का कार्य पूर्ण कर लेना है, जिसे लेकर मनरेगा कर्मी इन दिनों खूब पसीना बहा रहे हैं.

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Author: VIKASH KUMAR

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