Kaimur News: सावन माह के शुरुआती हफ्ते में गुरुवार को जिले में हुई झमाझम बारिश ने किसानों के चेहरे पर चमक लौटा दी है. सुबह से लेकर करीब चार घंटे तक ठहर-ठहरकर हुई अच्छी बरसात के बाद जिले में सुस्त पड़ी धान की रोपनी ने एक बार फिर तेजी पकड़ ली है. मानसून की बेरुखी से हलकान किसान अब अपने पूरे परिवार के साथ खेतों में उतर गए हैं और धान की रोपनी के काम में जुट गए हैं.
आषाढ़ में सूखा पड़ा था खेत, बिजली पंप भी दे रहे थे जवाब
इस साल मानसून की शुरुआत से ही धान की खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे थे. बारिश न होने के कारण बिचड़ा तैयार करने से लेकर रोपनी तक के लिए किसानों को पानी की खासी जद्दोजहद करनी पड़ रही थी. आषाढ़ बीत जाने के बावजूद जिले में धान की रोपनी का आंकड़ा 30 प्रतिशत भी पार नहीं कर पाया था. सिंचित इलाकों में बिजली चालित पंपों के सहारे जैसे-तैसे काम चल रहा था, लेकिन लगातार भूजल स्तर गिरने से पंप भी जवाब दे रहे थे. वहीं असिंचित इलाकों में बड़े पैमाने पर खेत परती पड़े हुए थे और किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही थीं.
4 घंटे की बारिश बनी संजीवनी, किसानों को मिली बड़ी राहत
गुरुवार को सुबह से पूर्वाह्न 11 बजे तक कभी तेज तो कभी हल्की बारिश का दौर जारी रहा. रोपनी के पीक सीजन में हुई इस बारिश ने किसानों के लिए संजीवनी का काम किया है. हालांकि जून और जुलाई के सूखे को देखते हुए इस बारिश को पूरी तरह पर्याप्त तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन जलसंकट से जूझ रहे और बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को इससे तात्कालिक रूप से बड़ी राहत जरूर मिल गई है.
