प्रतिनिधि, रामगढ़. ग्राम भारती महाविद्यालय की रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष व महाविद्यालय की प्रथम महिला बर्सर प्रोफेसर डॉ. मधुलता शुक्ला की शोध उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है. यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित पब्लिकेशन हाउस के जर्नल ‘नेक्स्ट रिसर्च’ में 24 अगस्त को प्रकाशित उनके शोध पत्र की सराहना करते हुए जर्मनी के प्रतिष्ठित इनोवाटेक्स कॉन्फ्रेंस ने उन्हें बर्लिन में आयोजित होने वाले वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस की आयोजन समिति का सदस्य बनने का प्रस्ताव दिया है.
बर्लिन सम्मेलन में आयोजन समिति की सदस्य बनने का प्रस्ताव
1 से 3 मार्च 2027 तक बर्लिन में आयोजित होने वाले सम्मेलन का विषय ‘नेक्स्ट-जेन बायोसेंसिंग टेक्नोलॉजी के साथ वैश्विक नवाचार को आगे बढ़ाना’ है. डॉ. शुक्ला को आयोजन समिति में शामिल करने के साथ वैज्ञानिक सत्र की अध्यक्षता करने का भी प्रस्ताव दिया गया है.
शोध कार्य की सराहना कर भेजा गया ई-मेल
कॉन्फ्रेंस की प्रोग्राम डायरेक्टर क्लारा स्टेन ने ई-मेल भेजकर डॉ. शुक्ला के शोध कार्य की सराहना की है तथा सम्मेलन में उनकी सहभागिता की इच्छा जतायी है. यह प्रस्ताव उनके शोध कार्य को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है.
दवा वितरण में पर्यावरण-अनुकूल विलायक पर किया शोध
डॉ. शुक्ला का प्रकाशित शोध पत्र ‘दवा वितरण में पर्यावरण-अनुकूल विलायक के रूप में आयनिक तरल पदार्थ . एक समीक्षा’ विषय पर है. जून में वह स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित केमिस्ट्री वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस में भी भाग लेकर लौटी हैं.
विदेश में व्याख्यान देने वाली पहली प्रोफेसर
ग्राम भारती महाविद्यालय की स्थापना के बाद डॉ. मधुलता शुक्ला विदेश में प्रतिष्ठित केमिस्ट्री वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस में व्याख्यान देने वाली पहली प्रोफेसर हैं. उनकी शोध उपलब्धियों ने महाविद्यालय को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलायी है.
58 से अधिक शोध पत्र हो चुके हैं प्रकाशित
डॉ. शुक्ला के अब तक 58 से अधिक शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय शोध जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं. उनके निर्देशन में पिछले वर्ष शोधार्थी डॉ. दुर्गा गुप्ता को पीएचडी की डिग्री मिली. वर्तमान में दो रिसर्च स्कॉलर उनके निर्देशन में शोध कर रहे हैं.
तीन पुस्तकों का संपादन और आठ पुस्तकों में अध्याय
डॉ. शुक्ला तीन पुस्तकों का संपादन कर चुकी हैं तथा आठ पुस्तकों में उनके लिखे अध्याय प्रकाशित हैं. वर्ष 2026 में अब तक उनके आठ शोध पत्र व पुस्तक अध्याय प्रकाशित हो चुके हैं.
केमिकल रिसर्च सोसायटी की रह चुकी हैं कोऑर्डिनेटर
डॉ. शुक्ला 2023 से जून 2026 तक केमिकल रिसर्च सोसायटी ऑफ इंडिया के बिहार-झारखंड चैप्टर की कोऑर्डिनेटर भी रह चुकी हैं. उनकी उपलब्धि पर वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति समेत महाविद्यालय के शिक्षकों व कर्मियों ने बधाई दी है.
अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के बीच संसाधनों की कमी बनी चुनौती
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार पहचान बना रहे रसायन विज्ञान विभाग में संसाधनों की कमी भी चिंता का विषय है. विभाग के लैब सहायक, डेमोंस्ट्रेटर, गैसमैन व सहायक सेवानिवृत्त हो चुके हैं. इससे प्रयोगशाला संचालन में परेशानी हो रही है.
संसाधन और मानवबल मिलने से विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
महाविद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार व विश्वविद्यालय यदि आवश्यक संसाधन और मानवबल उपलब्ध करायें, तो ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को शोध के क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकते हैं.
