करोड़ों का बजट, फिर भी गंदगी के बीच रहने को विवश आंबेडकर आवासीय विद्यालय के छात्र

कल्याण विभाग के पास छह करोड़ से अधिक राशि बची, फिर भी नहीं सुधर रही व्यवस्था

फोटो 8 कल्याण विभाग द्वारा संचालित आवासीय विद्यालय कल्याण विभाग के पास छह करोड़ से अधिक राशि बची, फिर भी नहीं सुधर रही व्यवस्था वित्तीय वर्ष खत्म होने में बचे मात्र 20 दिन, बजट सरेंडर होने का मंडराया खतरा शौचालय से बह रहा गंदा पानी, सफाई के लिए प्रधानाध्यापक को लिखना पड़ा पत्र भभुआ नगर. जिले में कल्याण विभाग द्वारा संचालित आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारी इन प्रयासों को अमल में लाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. यही वजह है कि करोड़ों की राशि उपलब्ध होने के बावजूद विद्यालयों की हालत बदहाल बनी हुई है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए संचालित डॉ भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों के रखरखाव, साफ-सफाई व अन्य आवश्यक कार्यों के लिए करीब 6 करोड़ 5 लाख रुपये की राशि बची रह गयी है. जबकि, वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब महज लगभग 20 दिन ही शेष बचे हैं. ऐसे में यदि यह राशि खर्च नहीं हुई तो इसे वापस (सरेंडर) करना पड़ेगा. इसके बावजूद विद्यालयों की स्थिति में सुधार के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है. अधिकारियों की लापरवाही के चलते आवासीय विद्यालयों में दीपक तले अंधेरा जैसी स्थिति बनी हुई है. विद्यालय में करोड़ों रुपये तो हैं, लेकिन साफ-सफाई के लिए भी प्रधानाध्यापक को गुहार लगानी पड़ रही है. शौचालय से ओवरफ्लो हो रहा पानी इस लापरवाही का ताजा उदाहरण कल्याण विभाग द्वारा संचालित डॉ भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालय, सड़की से सामने आया है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने प्रखंड विकास पदाधिकारी अधौरा को पत्र लिखकर विद्यालय की गंभीर स्थिति से अवगत कराया है. पत्र में बताया गया है कि विद्यालय आवासीय होने के कारण यहां काफी संख्या में छात्र रहते हैं, लेकिन शौचालय की हालत बेहद खराब है. शौचालय का पानी ओवरफ्लो हो रहा है, जिससे छात्रों को शौचालय उपयोग करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. गंदगी के कारण परिसर का माहौल भी अस्वच्छ हो गया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी उत्पन्न हो सकते हैं. बीडीओ से प्रधानाध्यापक ने लगायी गुहार प्रधानाध्यापक ने अपने पत्र में साफ लिखा है कि शौचालय की नियमित सफाई नहीं होने के कारण विद्यालय परिसर में काफी गंदगी फैल गयी है व छात्रों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. उन्होंने प्रशासन से जल्द सफाई कराने की मांग की है. प्रधानाध्यापक के पत्र के आलोक में प्रखंड विकास पदाधिकारी ने प्रखंड कल्याण पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि तत्काल विद्यालय के शौचालय की साफ-सफाई करायी जाये. हालांकि सवाल यह उठता है कि जब विभाग के पास पर्याप्त राशि उपलब्ध है, तो फिर ऐसी मूलभूत जरूरतों के समाधान के लिए भी पत्राचार व निर्देश का इंतजार क्यों करना पड़ रहा है. भव्य बना भवन, पर रखरखाव में भारी लापरवाही विडंबना यह है कि सरकार ने इन आवासीय विद्यालयों के भवनों का निर्माण अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ कराया है. कई विद्यालयों की इमारतें इतनी भव्य हैं कि पहली नजर में किसी मेडिकल या इंजीनियरिंग कॉलेज का आभास होता है, लेकिन रखरखाव व साफ-सफाई की अनदेखी के कारण इन भवनों की हालत लगातार खराब होती जा रही है. छात्रों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं. प्रधानाध्यापक द्वारा भेजे गये पत्र से यह साफ हो गया है कि विभागीय स्तर पर निगरानी व जिम्मेदारी का भारी अभाव है. करोड़ों की राशि होते हुए भी यदि छात्रों को गंदगी व अव्यवस्था के बीच रहना पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस स्थिति को सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं या फिर यह मामला भी कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाता है. कहते हैं जिला कल्याण पदाधिकारी इस संबंध में पूछे जाने पर जिला कल्याण पदाधिकारी रत्नेश कुमार सिंह ने कहा कि शौचालय की सफाई के लिए बीडीओ को पत्र देना प्रधानाध्यापक की लापरवाही दर्शाता है. उन्होंने कहा कि विभाग के पास साफ-सफाई व रखरखाव के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध है, इसलिए ऐसी समस्या उत्पन्न नहीं होनी चाहिए थी. मामला संज्ञान में आते ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर विद्यालय के शौचालय की तत्काल सफाई करा दी गयी है. उन्होंने यह भी बताया कि विभाग के पास उपलब्ध राशि को वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले नियमानुसार आवश्यक कार्यों पर खर्च किया जायेगा.

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Published by: Vikash kumar

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