Kaimur Health Departmen Salary Delay Controversy : मोहनिया शहर के अनुमंडलीय अस्पताल में कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी और उपाधीक्षक द्वारा आठ वर्षों के बकाया एरियर की निकासी को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक ने अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. प्रेम शंकर सिंह से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है.
दरअसल, शनिवार को “उपाधीक्षक ने बकाया आठ साल का निकाला एरियर, बवाल” का मामले सामने आया, जिसके बाद ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया. इससे पहले भी गुरुवार को अस्पताल निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने जून माह का वेतन नहीं मिलने की शिकायत सिविल सर्जन से की थी. कर्मियों ने आरोप लगाया था कि उनका वेतन लंबित रहने के बावजूद उपाधीक्षक ने अपना करीब आठ वर्षों का एरियर निकाल लिया है. इस संबंध में डॉक्टरों, जीएनएम और अन्य कर्मचारियों ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन भी सौंपा था.
शिकायत के आधार पर शुक्रवार को भी उपाधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया था.
Kaimur News : उपाधीक्षक का पक्ष
विवाद के बीच उपाधीक्षक डॉ. प्रेम शंकर सिंह ने अपनी सफाई में कहा कि अस्पताल के खाते में एरियर भुगतान के बाद भी लगभग 1 करोड़ 38 लाख रुपये उपलब्ध हैं, जिससे करीब तीन महीने तक सभी कर्मचारियों का वेतन दिया जा सकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वेतन भुगतान में देरी का कारण धन की कमी नहीं, बल्कि प्रक्रिया में देरी है.
उनके अनुसार, कर्मचारियों की उपस्थिति तैयार करना और वेतन बिल बनाना संबंधित लिपिक का कार्य है. अभी तक बिल तैयार नहीं होने के कारण जून माह का वेतन नहीं दिया जा सका. उन्होंने यह भी कहा कि उनके द्वारा 31 लाख रुपये का एरियर निकालने से वेतन भुगतान पर कोई असर नहीं पड़ा है.
उपाधीक्षक ने बताया कि इस मामले में संबंधित लिपिक से स्पष्टीकरण मांगा गया है, साथ ही अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि एरियर का प्रस्ताव पूर्व उपाधीक्षक डॉ. विजय कुमार के कार्यकाल में भेजा गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से भुगतान लंबित था, जिसे उनके कार्यकाल में ठीक कर भुगतान किया गया.
Mohania Hospital Salary Dispute : सिविल सर्जन का रुख
सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन में देरी और एरियर निकासी के मामले में उपाधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है. जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
अस्पताल में वेतन भुगतान को लेकर उत्पन्न यह विवाद प्रशासनिक व्यवस्था और समन्वय की कमी को उजागर करता है. अब सभी की निगाहें उपाधीक्षक के जवाब और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं.
