मोहनिया सदर. रेलवे लाइन क्राॅस करने की नौबत न आये और किसी तरह का हादसा नहीं हो, इससे लोगों को बचाने के लिए रेलवे द्वारा खासतौर से बड़े स्टेशनों पर ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया है, जो रेलवे स्टेशन के सभी प्लेटफाॅर्मों को जोड़ती है. इसके साथ ही रेलवे ट्रैक पर इंसान के अलावा कोई अन्य जीव (मवेशी) आदि नहीं पहुंच सकें, इसके लिए रेलवे द्वारा रेल लाइन के दोनों तरफ एक्सप्रेसवे के तर्ज पर घेराबंदी भी कराया जा रहा है. लेकिन, भभुआ रोड स्टेशन व उससे पूरब बने आरओबी 60 के बावजूद डड़वा टैक्सी स्टैंड से उतर कर बड़ी संख्या में लोग लाइन को पार करने लग जाते हैं, जबकि जिस स्थान से होकर लोग रेलवे लाइन को पार करते है, वहां से महज 50 मीटर की दूरी पर आरओबी 60 अवस्थित है. इतना ही नहीं सभी प्लेटफाॅर्मों तक यात्रियों को सुरक्षित पहुंचने के लिए स्टेशन पर भी ओवरब्रिज बना हुआ है, फिर भी रेल लाइन को गलत तरीके से पार करने वालों को एक बार भी रेल पुलिस न रोकती है, न ही नियमों का पालन कराना मुनासिब समझती है. खासतौर पर सुबह के समय एक्सप्रेस से लेकर मेल ट्रेनें व माल गाड़ियों का परिचालन उक्त मार्ग से बहुत अधिक होती है. रेलवे ट्रैक क्राॅस करना जहां खतरे से भरा हुआ है, वहीं रेलवे के नियमों का उल्लंघन भी है. जबकि, रेलवे संपत्ति की सुरक्षा के साथ उसके प्रावधानों की रक्षा करने की जिम्मेदारी रेल पुलिस के कंधों पर है, लेकिन पुलिस के सामने ही लोग नियमों को दरकिनार कर रेलवे स्टेशन पर जान हथेली पर रखकर अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ रेलवे ट्रैक पार करते हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है. जबकि, पुलिस को चाहिए कि तुरंत उन यात्रियों को रेलवे ट्रैक पार करने से रोकने के साथ ही उनके विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई करें, ताकि वे यात्री दूसरी बार ऐसी गलती नही करें और प्लेटफाॅर्म पर मौजूद अन्य यात्रियों को भी नसीहत मिले. लेकिन, रेल पुलिस भी अपनी जिम्मेदारी से विमुख होकर ड्यूटी के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रही है. मानो यात्रियों की सुरक्षा से संबंधित कोई नियम इनकी ड्यूटी में सम्मिलित ही नहीं है, जबकि कभी-कभी रेल पुलिस यात्रियों की सुरक्षा को लेकर इस तरह जागरूकता अभियान चलाकर मीडिया की सुर्खियां बटोरती है. मानो आज ही यात्री सुरक्षा कानूनों को लागू किया गया हो, जहां कुछ दिन दिखावा कर खानापूर्ति करने के बाद सभी कायदे कानून को ताक पर रख दिया जाता है. जबकि, आये दिन हादसे में लोगों के जान गंवाने के बाद भी यात्री अपनी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं. हालांकि यात्रियों की सुरक्षा जितनी रेल पुलिस की जिम्मेदारी बनती है उससे कहीं अधिक यात्रियों को अपनी सुरक्षा की भी चिंता होनी चाहिए. रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान हो चुके हैं कई हादसे वैसे भी भभुआ रोड स्टेशन से लेकर पूरब में मोहनिया-रामगढ़ पथ नेशनल हाइवे 319 ए पर रेलवे ट्रैक के ऊपर बने आरओबी-60 के समीप तक का एरिया अवैध रूप से रेलवे ट्रैक पार करने वालों के लिए काफी खतरनाक रहा है. उक्त दूरी के बीच एक वर्ष में एक दर्जन से अधिक लोग रेलवे ट्रैक पार करने के क्रम में ट्रेन की चपेट में आकर असमय ही काल का निवाला बन चुके हैं. इसका सबसे बड़ा कारण रामगढ़ से आने वाली छोटी सवारी गाड़ियों का डड़वा में ठहराव है, इन सवारी वाहनों से उतरने वाले लोग ओवर ब्रिज से होकर बाजार जाना नहीं चाहते हैं, बल्कि कम समय में कम दूरी तय कर बाजार में दाखिल हो सकें इसके लिए जिंदगी को दाव पर लगाकर लगभग छह रेलवे ट्रैक को पार करने की फजीहत उठाते हैं. इससे ट्रेन की चपेट में आकर कई लोग अपनी जान भी गवां देते हैं, इसके बावजूद गलत तरीके से रेलवे ट्रैक को पार करने वालों में कोई कमी नहीं आती है और न ही आज तक रेल पुलिस ने रेलवे ट्रैक को गलत तरीके से पार करने के मामले में किसी पर फाइन लगाया या कोई कार्रवाई की है. इसका परिणाम है कि लोग बेधड़क रेलवे ट्रैक को पार करते रहते है. जबकि, लोगों को ऐसे हादसों से बचाने के लिए ही रेल विभाग द्वारा उक्त स्थान पर भी रेलवे लाइन के दक्षिण तरफ घेराबंदी की गयी है, इसके बाद भी लोग रेलवे ट्रैक को पार करने बाज नहीं आ रहे हैं, जिसे लेकर रेलवे पुलिस को भी सख्ती बरतने की जरूरत है.
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