शराब व सूखा नशे के तस्करों के नेटवर्क के आगे बेबस शहर की पुलिस

गाहे-बेगाहे शराब पियक्कड़ों पर कार्रवाई कर गिना रही अपनी उपलब्धि

=गाहे-बेगाहे शराब पियक्कड़ों पर कार्रवाई कर गिना रही अपनी उपलब्धि तस्करों पर मेहरबानी और पियक्कड़ों पर पुलिस की सख्ती से शहरवासियों में आक्रोश वार्डों व मुहल्लों में खुलेआम बिक रहे मादक पदार्थ, नशे की गिरफ्त में आ रही युवा पीढ़ी भभुआ सदर. भभुआ शहर की पुलिस इन दिनों शराब और सूखे नशे के तस्करों की जगह केवल पियक्कड़ों को पकड़ने में अधिक सक्रिय दिखायी दे रही है. पुलिस की इस कार्यशैली को लेकर शहरवासियों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ने लगा है. नगरवासियों का कहना है कि शहर के अधिकतर वार्डों और मुहल्लों में खुलेआम शराब, गांजा व हेरोइन की बिक्री हो रही है, जिसकी चपेट में नाबालिग किशोरों से लेकर युवा तक आ गये हैं. लोगों का कहना है कि शहर में नशे की हो रही खरीद-फरोख्त के चलते चोरी की घटनाएं भी बढ़ी हैं. लेकिन इसके बावजूद नगर थाने की पुलिस द्वारा खुलेआम नशे का सामान बेच रहे तस्करों पर कार्रवाई उम्मीद के मुताबिक नहीं की जा रही है. हालांकि, शहर की पुलिस तस्करों को पकड़ने की जगह छोटे-छोटे मामलों में पियक्कड़ों को हिरासत में लेकर खानापूर्ति करती जरूर नजर आ रही है. शहरवासी रवि सिंह, रामानंद प्रसाद, राजेश तिवारी आदि का कहना है कि शराबबंदी लागू होने के बाद भी भभुआ थाना क्षेत्र के शहरी और विभिन्न ग्रामीण इलाकों जैसे अखलासपुर, सीवों व कुड़ासन में नशीले पदार्थों की उपलब्धता किसी से छिपी नहीं है. शहर में पुलिस की भूमिका पर चर्चाएं तेज कई स्थानों पर तो ऐसी स्थिति है कि शराब, गांजा व हेरोइन की बिक्री आम चीजों की तरह हो रही है और पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है. लोगों का कहना है कि नियमित गश्ती और छापेमारी के बावजूद तस्करों का नेटवर्क जस का तस बना हुआ है. इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पियक्कड़ों को पकड़कर पुलिस अपनी उपलब्धि गिनाना चाहती है, जबकि असली चुनौती सूखे नशे के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करना है. नगरवासियों के अनुसार, जब तक तस्करों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक शराबबंदी का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता. कई लोगों ने दावा किया कि उन्होंने तस्करों की गतिविधियों की सूचना पुलिस को दी थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गयी. क्षेत्र में बढ़ रही आलोचनाओं के बीच अब पुलिस की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं. लोगों की मांग है कि पुलिस पियक्कड़ों पर सिर्फ औपचारिक कार्रवाई करने की बजाय तस्करों के जाल को ध्वस्त करने पर ध्यान दे, ताकि कानून प्रभावी रूप से लागू हो सके. इनसेट चोरी व छिनतई में नशेड़ी युवाओं की बढ़ती संख्या चिंता का हुआ विषय भभुआ सदर. शहर में आये दिन चोरी और छिनतई की घटना में इजाफा होने लगा है. खासकर भभुआ और मोहनिया जैसे शहरों में बाइक व मोबाइल चोरी व छिनतई से लेकर हिंसा और चोरी जैसे संगीन मामलों में भी युवाओं और नाबालिगों की बढ़ती तादाद केवल पुलिस प्रशासन के लिए नहीं, बल्कि सभी सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय बनने लगा है. पटेल कॉलेज के प्रोफेसर जगजीत सिंह कहते है कि युवाओं व नाबालिगों का आपराधिक घटनाओं में संलिप्त होना बेहद गंभीर मामला हो गया है. पारिवारिक व सामाजिक बदलाव का असर बच्चे के नाजुक दिलों-दिमाग पर भी हो रहा है. परिवार में उचित देखभाल की कमी व नैतिक शिक्षा नहीं मिलने से भी बच्चे नशे व अपराध की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, जिसके चलते नाबालिगों में आक्रामकता की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ती जा रही है. यही कारण है कि अभिभावकों, मनोवैज्ञानिकों व समाजशास्त्रियों के लिए यह मुद्दा चिंता का विषय बन गया है. समाजसेवी अजय सिंह ने कहा कि जिले में बाल व युवा अपराधियों की संख्या में वृद्धि के आंकड़े किसी भी सभ्य समाज के लिए शुभ संकेत नहीं हैं, जिनके कंधों पर देश और राज्य की बागडोर टिकी है, उनका आपराधिक वारदात में संलिप्त होना एक गंभीर मामला है. ऐसे में अभिभावकों व परिजनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है. बच्चों के रहन-सहन व उनके मित्रों के संबंध में जानकारी रखना जरूरी है.

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Author: VIKASH KUMAR

VIKASH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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