Kaimur News : कैमूर जिले के चांद प्रखंड में एक टूटी पुलिया पिछले करीब दो वर्षों से लोगों के लिए बड़ी परेशानी और खतरे की वजह बनी हुई है. जगदहवां बांध से चांद की ओर आने वाली नहर पर कुढ़नू मोड़ के पास स्थित यह पुलिया आधी टूट चुकी है, लेकिन अब तक इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. नतीजा यह है कि इस रास्ते से गुजरने वाले लोग रोजाना जोखिम उठाने को मजबूर हैं.
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, यह पुलिया इलाके के लिए बेहद महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग पर स्थित है. इसके खराब होने से न सिर्फ आवागमन बाधित हुआ है, बल्कि लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है. कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
चार पहिया वाहनों के लिए रास्ता लगभग बंद
ग्रामीण बताते हैं कि अगर कोई वाहन चालक अनजाने में इस मार्ग पर आ जाता है, खासकर हाटा जाने के लिए, तो उसे बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ता है. चार पहिया वाहनों के लिए यह रास्ता लगभग बंद हो चुका है.
वहीं दो पहिया वाहन चालक किसी तरह संतुलन बनाकर इस टूटी पुलिया को पार कर लेते हैं, लेकिन इसमें भी हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है. कई बार लोग फिसलते-फिसलते बचते हैं, जिससे बड़ी घटना होने की आशंका लगातार बनी रहती है.
रात और बारिश में और बढ़ जाता है खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन के मुकाबले रात में यह पुलिया और ज्यादा खतरनाक हो जाती है. अंधेरे में टूटे हिस्से का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है, जिससे दुर्घटना का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है.
बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है. पानी भर जाने से पुलिया का टूटा हिस्सा दिखाई नहीं देता, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. ग्रामीणों ने बताया कि कई बार छोटे-मोटे हादसे हो भी चुके हैं, लेकिन प्रशासन अभी भी गंभीर नहीं दिख रहा है.
शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी गई है. इसके बावजूद अब तक न तो कोई निरीक्षण किया गया और न ही मरम्मत का काम शुरू हुआ.
लोगों का कहना है कि सरकार और विभाग की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. रोजाना सैकड़ों लोग इस रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है.
जल्द निर्माण की मांग तेज
अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि इस पुलिया का जल्द से जल्द पुनर्निर्माण कराया जाए. उनका कहना है कि अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.
फिलहाल यह पुलिया लोगों के लिए सिरदर्द बनी हुई है. अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस समस्या को गंभीरता से लेता है और लोगों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाता है.
