Kaimur News:. कैमूर जिले के सुदूरवर्ती वनवासी क्षेत्र अधौरा प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कथित अनुपस्थिति और लचर शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर भाजपा नेता ओम प्रकाश पांडे ने मोर्चा खोल दिया है. गुरुवार को उन्होंने जिला पदाधिकारी (DM) नितिन कुमार सिंह से मुलाकात कर ग्रामीणों के शिकायत पत्रों के साथ एक ज्ञापन सौंपा और अधौरा के विद्यालयों की उच्चस्तरीय जांच कराकर लापरवाह शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की. भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि शिक्षकों की घोर लापरवाही और गैरहाजिरी के कारण पहाड़ी व वनवासी क्षेत्र के गरीब बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह चौपट हो रही है.
कई विद्यालयों का नाम लेकर लगाए गंभीर आरोप
ओम प्रकाश पांडे ने बताया कि अधौरा क्षेत्र में निजी स्कूल न होने के कारण गरीब और वनवासी परिवार पूरी तरह सरकारी विद्यालयों पर निर्भर हैं. इसके बावजूद शिक्षक नियमित रूप से स्कूल नहीं आते. उन्होंने ग्रामीणों की शिकायतों का हवाला देते हुए केसरोरा खुर्द, झुमुरका, कटौनदाग, चटहंस, खोदरा, मुंडेहरा, प्राथमिक विद्यालय तोड़ी, सरवनदाग और सरोदाग सहित कई विद्यालयों का नाम लेकर आरोप लगाया कि कई शिक्षकों की उपस्थिति केवल कागजों तक ही सीमित रहती है, जबकि वे लंबे समय से स्कूल से गायब रहते हैं. यदि इन स्कूलों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) कराया जाए, तो वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी.
ग्रामीणों के आवेदन संलग्न, कार्रवाई न होने पर जताई नाराजगी
भाजपा नेता ने डीएम को सौंपे गए ज्ञापन के साथ ग्रामीणों द्वारा पूर्व में जिला व प्रखंड शिक्षा विभाग को दिए गए दर्जनों शिकायत पत्र भी संलग्न किए. उन्होंने कहा कि बीते कई महीनों से ग्रामीण लिखित शिकायतें दे रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने से ग्रामीणों में भारी असंतोष व्याप्त है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शिक्षक समय पर विद्यालय न जाकर सरकार की शिक्षा व्यवस्था को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं.
उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग
भाजपा नेता ने जिला पदाधिकारी से मांग की है कि पूरे अधौरा प्रखंड के विद्यालयों की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. जो शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं जाते या अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं, उनके विरुद्ध सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक या औचक निरीक्षण के जरिए शिक्षकों की उपस्थिति की प्रभावी निगरानी से ही वनवासी क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सकेगा.
