Kaimur News : बिहार में दिल में छेद की बीमारी से पीड़ित मरीजों के इलाज को लेकर सरकार ने बड़ा बदलाव किया है. बाल हृदय योजना का दायरा बढ़ाते हुए अब सभी उम्र के मरीजों को इसके तहत उपचार की सुविधा देने का प्रावधान किया गया है. इससे पहले योजना का लाभ बच्चों तक सीमित था. नये प्रावधान के बाद दिल में छेद की बीमारी से पीड़ित वयस्क भी योजना के तहत मुफ्त इलाज करा सकेंगे. उपचार पर होने वाला निर्धारित खर्च सरकार की ओर से वहन किया जायेगा.
उम्र सीमा के कारण इलाज से वंचित मरीजों को मिलेगा लाभ
बाल हृदय योजना के तहत अब तक मुख्य रूप से बच्चों में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान और उनके उपचार की व्यवस्था की जाती थी. दिल में छेद भी ऐसे रोगों में शामिल है. उम्र सीमा के कारण कई ऐसे मरीज योजना के लाभ से बाहर रह जाते थे, जिनकी बीमारी का उपचार बचपन में नहीं हो पाया. योजना का दायरा बढ़ाये जाने के बाद ऐसे मरीजों को भी उपचार का अवसर मिलेगा. सरकार के इस फैसले का उद्देश्य गंभीर जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को आर्थिक बाधा के कारण इलाज से वंचित होने से रोकना है. योजना के विस्तारित दायरे से राज्य में ऐसे मरीजों की उपचार सुविधा बढ़ने की उम्मीद है.
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जिले में 2021 से दिल में छेद से पीड़ित बच्चों का हो रहा इलाज
डीईआईसी प्रबंधक सह समन्वयक सरोज कुमार ने बताया कि जिले में वर्ष 2021 से दिल में छेद से ग्रसित बच्चों का इलाज शुरू हुआ. अब तक कुल 36 बच्चों का इलाज हो चुका है. इस वर्ष सितंबर तक चार बच्चों का इलाज कराया गया है, जबकि 10 बच्चों को ऑपरेशन के लिए भेजा जाना है. योजना के तहत चिन्हित मरीजों के दिल में छेद की समस्या का उपचार बिना किसी इलाज खर्च के कराया जाता है.
निजी अस्पतालों में लाखों का खर्च, सरकार करा रही मुफ्त इलाज
निजी स्तर पर इस तरह के उपचार में बड़ी रकम खर्च होने के कारण कई परिवार इलाज नहीं करा पाते हैं. खास बात यह है कि जिस बीमारी के इलाज में निजी अस्पतालों में करीब चार लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं, उसका इलाज सरकार की ओर से पूरी तरह मुफ्त कराया जा रहा है. योजना का दायरा सभी उम्र के लोगों तक किये जाने से अब वयस्क मरीज भी इसके लाभार्थी बन सकेंगे. बीमारी की पहचान के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मरीजों को उपचार के लिए भेजा जायेगा.
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मोबाइल हेल्थ टीम करती है बच्चों की स्वास्थ्य जांच
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल हेल्थ टीम आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती है. इस दौरान दिल में छेद समेत अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों की पहचान की जाती है. इसके बाद बच्चों की जांच सदर अस्पताल में कराई जाती है. बीमारी की पुष्टि होने पर पटना में विशेषज्ञ चिकित्सकों से जांच कराई जाती है. ऑपरेशन की आवश्यकता होने पर बच्चे को उपचार के लिए अहमदाबाद भेजा जाता है.
जयप्रभा मेदांता में भी शुरू हुई ऑपरेशन की सुविधा
अब पटना स्थित जयप्रभा मेदांता अस्पताल में भी ऐसे ऑपरेशन की सुविधा शुरू हो गयी है. जिला समन्वयक सरोज कुमार ने बताया कि छह वर्ष तक के बच्चों के साथ इलाज के दौरान माता-पिता दोनों को भेजा जाता है. वहीं, छह से 18 वर्ष तक के किशोरों के साथ माता या पिता में से किसी एक को भेजने की व्यवस्था है. ऑपरेशन के बाद सरकार की ओर से छह माह तक जांच की सुविधा भी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है.
छह वर्ष तक के बच्चों के लिए विशेष प्रावधान
योजना के तहत छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों के उपचार के लिए विशेष प्रावधान किया गया है. राज्य के बाहर चिह्नित चैरिटेबल ट्रस्ट अथवा निजी अस्पताल में उपचार के लिए जाने वाले बच्चे के साथ मां के अलावा एक अन्य स्वजन के आने-जाने का खर्च भी सरकार वहन करती है. परिवहन भाड़े के रूप में बाल हृदय रोगी के लिए पांच हजार रुपये तथा अटेंडेंट के लिए अधिकतम राशि बढ़ाकर 10 हजार रुपये की गयी है.
उपचार के दौरान परिवार के साथ रहता है समन्वयक
इलाज के दौरान बच्चों और उनके परिवार की सहायता के लिए समन्वयक भी साथ रहते हैं. उपचार पूरा होने के बाद समन्वयक बच्चों को उनके परिवार के साथ वापस लेकर आते हैं. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को इलाज की प्रक्रिया में काफी सहूलियत मिलती है.
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