Kaimur News : आधार कार्ड बनवाने या उसमें नाम, पता समेत अन्य विवरणों में सुधार कराने के लिए कैमूर जिले में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंडों तक आधार केंद्रों पर आवेदकों की भारी भीड़ जुट रही है, लेकिन इसके मुकाबले संसाधन बेहद सीमित हैं. स्थिति यह है कि कई केंद्रों पर एक कंप्यूटर के भरोसे दिनभर में महज 30 से 35 लोगों का ही काम हो पा रहा है. वहीं, बड़े केंद्रों पर पांच कंप्यूटर उपलब्ध होने के बावजूद सीमित कूपन व्यवस्था के कारण प्रतिदिन करीब 200 लोगों को ही सेवा मिल पा रही है.
अधौरा के पहाड़ी इलाकों से लंबी दूरी, रात में अस्पताल में गुजारने की मजबूरी
कैमूर के पहाड़ी और सुदूर प्रखंड अधौरा के ग्रामीणों के लिए आधार से जुड़ा काम कराना और भी मुश्किल साबित हो रहा है. आधार बनवाने या सुधार कराने के लिए लोगों को दर्जनों किलोमीटर का सफर तय कर भभुआ पहुंचना पड़ता है.
समय पर कतार में लगने के लिए कई ग्रामीण एक दिन पहले ही भभुआ पहुंच जाते हैं. रात उन्हें सड़क, सदर अस्पताल या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर गुजारनी पड़ती है. इसके बावजूद अगले दिन उनका काम पूरा हो जायेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं रहती. आने-जाने और ठहरने में होने वाले अतिरिक्त खर्च के साथ बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को शारीरिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है.
सुबह पांच बजे से पटेल कॉलेज केंद्र पर लग रही कतार, सर्वर डाउन ने बढ़ायी परेशानी
मंगलवार को पटेल कॉलेज स्थित आधार केंद्र पर सुबह पांच बजे से ही लोगों की कतार लग गयी थी. यहां एक ही कंप्यूटर से आधार पंजीयन और सुधार का कार्य किया जा रहा था. केंद्र पर आवेदकों की संख्या 100 से अधिक थी.
भीड़ के अलावा तकनीकी समस्याएं भी काम में बाधा डाल रही हैं. कभी सर्वर धीमा चलने तो कभी लिंक फेल होने से ऑपरेटरों की काम करने की गति प्रभावित हो जाती है. इससे घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी कई आवेदकों को बिना काम कराये वापस लौटना पड़ता है.
अटल बिहारी केंद्र पर पांच कंप्यूटर, फिर भी सीमित लोगों को मिल रही सेवा
शहर में अटल बिहारी के समीप स्थित आधार सेवा केंद्र के मैनेजर के अनुसार, यहां पांच कंप्यूटरों की व्यवस्था है. इनके माध्यम से कूपन प्रणाली के तहत प्रतिदिन करीब 200 लोगों का आधार संबंधी काम किया जाता है.
हालांकि, कैमूर के अलावा पड़ोसी जिलों और राज्यों से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं. इससे आवेदकों की संख्या निर्धारित सीमा से कहीं अधिक हो जाती है. कूपन का कोटा पूरा होते ही बाद में आने वाले लोगों को अगले दिन का इंतजार करना पड़ता है.
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नाम-पता में मामूली सुधार के लिए भी जुटाने पड़ रहे कई दस्तावेज
आवेदकों का कहना है कि नाम, पता या अन्य विवरणों में मामूली सुधार कराने के लिए भी कई प्रकार के दस्तावेज जुटाने पड़ रहे हैं. नाम बदलने के मामलों में गजट और अतिरिक्त प्रमाणपत्रों की मांग से प्रक्रिया और जटिल हो जाती है.
सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, पेंशन और बैंकिंग कार्यों में आधार अनिवार्य होने के कारण लोगों को हर हाल में अपना आधार दुरुस्त कराना पड़ रहा है. ऐसे में सीमित केंद्र और तकनीकी समस्याएं उनकी परेशानी और बढ़ा रही हैं.
पीड़ितों का दर्द : बच्चों के साथ रात अस्पताल में गुजारी, सुबह से कतार में
अधौरा प्रखंड के ग्राम कोल्हूवा निवासी धर्मशिला देवी ने बताया, "मैं अपने तीन छोटे बच्चों को लेकर आधार बनवाने शुक्रवार शाम भभुआ आयी थी. रात सदर अस्पताल में गुजारी और शनिवार सुबह पांच बजे से लाइन में लगी हूं. भूखे-प्यासे घंटों बीत जाने के बाद भी उम्मीद नहीं है कि आज काम हो पायेगा."
वहीं, चैनपुर प्रखंड के ग्राम बलुआ निवासी रीना देवी ने बताया, "सुबह चार बजे घर से चलकर छह बजे आधार केंद्र पहुंची थी. कतार में खड़े हुए घंटों बीत गये, लेकिन कभी लिंक फेल हो जाता है तो कभी सर्वर स्लो हो जाता है. आधार बनवाने में पसीने छूट रहे हैं."
क्या कहते हैं उप विकास आयुक्त रोहित कर्दम
आधार बनाने और सुधार कराने में अधौरा सहित सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को हो रही परेशानी को लेकर उप विकास आयुक्त रोहित कर्दम ने कहा कि यदि इस तरह की परेशानी है, तो अधौरा सहित अन्य जगहों पर कैंप लगाकर आधार बनाने और सुधारने का काम कराया जायेगा. उन्होंने कहा कि आधार कार्ड बनाने के संदर्भ में भी जानकारी ली जा रही है.
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