चैनपुर में रिकॉर्ड मतदान के बाद चर्चा तेज, त्रिकोणीय हुआ मुकाबला

KAIMUR NEWS.बिहार विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण में चैनपुर विस क्षेत्र के मतदाताओं ने मंगलवार को मतदान में बढ़ चढ़कर भागीदारी निभायी और पिछले कई दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इस बार चैनपुर में 68 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जो पिछले चुनाव की तुलना में लगभग 4 से 5 प्रतिशत अधिक है.

इस बार चैनपुर विस क्षेत्र में 68 प्रतिशत से अधिक हुआ मतदान

समर्थक कर रहे अपनी-अपनी पार्टी के जीतने के दावे प्रतिनिधि, चैनपुर.

बिहार विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण में चैनपुर विस क्षेत्र के मतदाताओं ने मंगलवार को मतदान में बढ़ चढ़कर भागीदारी निभायी और पिछले कई दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इस बार चैनपुर में 68 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जो पिछले चुनाव की तुलना में लगभग 4 से 5 प्रतिशत अधिक है. बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत न केवल चुनावी माहौल को रोमांचक बना रहा है, बल्कि प्रत्याशियों की भी चिंता बढ़ गयी है. अब सबकी निगाहें 14 नवंबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि चैनपुर की जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है. सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं. कई मतदान केंद्रों पर मतदान शुरू होने से पहले ही लोग पहुंच गये थे. दोपहर तक आधे से अधिक मतदान संपन्न हो चुका था, जिससे यह जाहिर हुआ कि चैनपुर की जनता चुनाव को लेकर कितनी उत्साहित थी.

सोशल मीडिया पर चर्चाओं का माहौल गर्म

लोगों का कहना है कि इस बार का चुनाव किसी पार्टी या प्रत्याशी से अधिक जनता ने खुद लड़ा है. मतदान के प्रति लोगों की सक्रियता इस बात का प्रमाण है कि चैनपुर की जनता विकास और भविष्य को लेकर सजग हो चुकी है. चुनाव समाप्त होने के बाद भी चैनपुर में चौराहों, चौपालों और चाय-पान की दुकानों पर सिर्फ एक ही विषय पर चर्चा है, आखिर जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा. हर कोई अपने-अपने स्तर से अनुमान लगाने में व्यस्त दिखे. कुछ लोग पिछले मतदान पैटर्न के आधार पर समीकरण बना रहे हैं, तो कुछ नये युवा वर्ग के मतदाताओं की भूमिका को निर्णायक मान रहे हैं. बाजारों से लेकर गांवों तक फोन और सोशल मीडिया पर लोगों की बातचीत का मुख्य विषय यही रहा कि चैनपुर में कौन आगे और कौन पीछे रहेगा.

बसपा के धीरज सिंह के रहने से मुकाबला हुआ त्रिकोणीय

लाेगों का यह भी कहना था कि एग्जिट पोल तो एनडीए को राज्य स्तर पर बढ़त मिलती दिखा रही है, परंतु स्थानीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं है. जिले की चारों विधानसभा सीटों की स्थिति का अंदाजा लगाना कठिन है. चैनपुर में दो कद्दावर नेताओं की किस्मत इवीएम में कैद है. जदयू के मोहम्मद जमा खान और राजद के बृजकिशोर बिंद. दोनों ही पुराने चेहरे हैं और चुनाव मैदान में अपने-अपने संगठन बल और जातीय समीकरणों पर भरोसा कर रहे हैं. इनके बीच बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी धीरज सिंह ने इस बार तीसरा मोर्चा खोलकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है.

इस बार महिलाओं और युवाओं की भागीदारी पहले की तुलना में अधिक रही

स्थानीय स्तर पर राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी का प्रवेश इस बार समीकरणों को उलझा सकता है. धीरज सिंह की उम्मीदवारी ने परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगायी है, जिससे मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है. दूसरी ओर, एनडीए और महागठबंधन दोनों के समर्थक अपने प्रत्याशी की जीत को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं. मतदान के बाद गांव-गांव में चर्चाएं अब सिर्फ आंकड़ों और समीकरणों पर केंद्रित हैं. हाटा, चैनपुर, खारिगावां और आसपास के पंचायतों में चौपालों पर लोग सुबह-शाम इस विषय पर बहस करते देखे जा सकते हैं. किसी को उम्मीद है कि इस बार जनता नया चेहरा चुनेगी, तो किसी को भरोसा है कि पुराने चेहरों में से एक को ही पुनः मौका मिलेगा. चर्चाओं के बीच यह भी माना जा रहा है कि उच्च मतदान प्रतिशत से बदलाव की संभावना बढ़ी है. महिलाओं और युवाओं की भागीदारी पहले की तुलना में अधिक रही. कई बूथों पर पहली बार मतदान करने वाले युवाओं ने अपने मताधिकार के इस्तेमाल को लेकर उत्साह जाहिर किया. महिलाओं ने भी बखूबी इस लोकतांत्रिक उत्सव का हिस्सा बनते हुए मतदान केंद्रों तक पहुंचने में कोई कमी नहीं छोड़ी.

अब सबकी निगाहें 14 नवंबर पर

अब सबकी निगाहें शुक्रवार, 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब मतगणना के बाद नतीजा सामने आयेगा. मतदान की चिंता अब प्रत्याशियों के चेहरे पर साफ झलकने लगी है. चैनपुर की जनता इस बार किस पर भरोसा जताती है, यह तो परिणाम ही बतायेगे. फिलहाल यह तय है कि चैनपुर में लोकतंत्र का उत्सव इस बार पहले से अधिक जोश और जागरूकता के साथ मनाया गया है, जिसने पूरे जिले में राजनीति की नयी बयार बहा दी है.

चैनपुर विधानसभा में हुए वर्ष वार चुनाव एवं मत प्रतिशत

वर्ष कुल मतदाता पोल वोट मत प्रतिशत2025 328400 224921 68.49% (लगभग )

2020 318,231 205,970 64.72%

2015 288,540 177,671 61.58%

2010 235,304 142,032 60.36%

2005 187,731 110,832 59.02% 2000 165,993 106,839 65.05%

1995 161,889 110,128 69.87%

1990 142,816 85,131 60.43%

1985 119,578 69,314 59.19%

1980 106,735 58,151 55.79%

1977 98,345 52,270 54.09%

1972 92,042 30,615 34.64%

2025 के चुनावी आंकड़ों में बदलाव हो सकता हैB

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By VIKASH KUMAR

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