बाजार में तीन हजार रुपये प्रतिकिलो तक का खजूर
भभुआ सदर : रमजान में सहरी व इफ्तारी का बड़ा सवाब है. रमजान के साथ ही बाजारों में चहल-पहल बढ़ गयी है. मुसलिम बाहुल्य क्षेत्रों में बाजार देर रात तक खुल रहे हैं. सहरी व इफ्तारी के लिए बड़ी संख्या में लोग बाजार में खरीदारी करने उतर रहे हैं. रमजान को लेकर बाजार में एक से बढ़ कर एक खजूर आ गये हैं. एकता चौक पर करीब 30 साल से रमजान के दिनों में खजूर की बिक्री करनेवाले अलीजान मियां का कहना है कि वैसे तो बाजार में खजूर की कई किस्में उपलब्ध हैं, लेकिन उनमें से सबसे ज्यादा मांग कीमिया व इरानी खजूर की हो रही है. कीमिया खजूर जहां 80 रुपये किलो मिल रहा है, तो कीमिया खजूर 120 रुपये किलो में मिल रहा है. पटेल चौक पर वर्षों से खजूर बेच रहे मोहम्मद जलील राइन बताते हैं कि खजूर की कई किस्म होती हैं. बाजार में करीब 16 सौ किस्मों के खजूर उपलब्ध हैं. इनमें शबानी, खुबानी, शुमरी, कश, तईबा, मगरूम, सगई, अजूबा, हयात आदि की खासी मांग हो रही है. हयात खजूर जहां ढाई सौ रुपये किलो मिल रहा है. सबसे महंगा अजूबा खजूर बाजार में तीन हजार रुपये किलो है.
बिना बीज वाला खजूर भी मौजूद: पश्चिम बाजार में खजूर विक्रेता जुबैर ने बताया कि रोजेदारों के लिए एक तरफ जहां बीजरहित सीड लेस खजूर रखा गया है, वहीं ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए एक पर एक मुफ्त ऑफर भी चलाया जा रहा है. बुधवार को रमजान के मौके पर शहर व ग्रामीण बाजारों में खजूर की दुकानें सजी हुई हैं. बाजार के दुकानदार जुनैद, आफताब व हामिद बताते हैं कि रोजेदारों ने गरमी व धूप से बचने के लिए कई दिन पहले से ही अपने पसंद के खजूरों की खरीदारी शुरू कर दी थी. अब रमजान में रोजाना नया माल मंगाया जा रहा है.
सेवई की मांग बढ़ी: रमजान में सहरी करना सुन्नत माना जाता है. ऐसे में खजला, सेवई, फेन, रस व खासे आदि की मांग बढ़ गयी है. बाजार भी इन उत्पादों से सजे हुए हैं.
सेवई विक्रेता फिरोज ने बताया कि डालडा, रिफाइंड व देसी घी से बनी हुई सेवई व लच्छों की जम कर मांग है, जिसकी खरीदारी बाजार में तेजी से हो रही है.
रमजान में अल्लाह की होती है नेमत: रमजान में अल्लाह की बेशुमार नेयमतों की बरसात होती है. इबादत का सवाब भी 70 गुना बढ़ा दिया जाता है. जहन्नम के दरवाजे बंद व जन्नत के खोल दिये जाते हैं. शैतान को जंजीरों में जकड़ दिया जाता है. ब्लॉक स्थित इदगाह मसजिद के इमाम शादिक रजा ने कुरान का हवाला दते हुए फरमाया, ए लोगों तुम पर रोजे फर्ज किये गये हैं, जैसा कि तुम से पहले लोगों पर फर्ज किये गये थे. इस महीने में एक रात ऐसी है, जो हजार महीनों से बेहतर है.
इस महीने में किसी अम्ल मुस्तिहब का सवाब फर्ज के बराबर है. रोजे की फजीलत के लिए यह काफी है. अल्लाह ताला ने इरशाद फरमाया, रोजा मेरे लिए है और इसका सवाब मैं खुद दूंगा. रमजान में 20 रकअत नमाज तरावीह पढ़ना सुन्नत है.
