लक्ष्य 224832, बने सिर्फ 55155 शौचालय

भभुआ नगर : हर घर में शौचालय हो व कोई भी व्यक्ति खुले में शौच करने न जाये इस अभियान को सफल बनाने की रणनीति का असर जिले में काफी कम दिख रहा है. कई जगहों पर शौचालय निर्माण के बावजूद भी लोगों की मानसिकता बदल नहीं पायी है और लोग बेरोकटोक खुले में शौच […]

भभुआ नगर : हर घर में शौचालय हो व कोई भी व्यक्ति खुले में शौच करने न जाये इस अभियान को सफल बनाने की रणनीति का असर जिले में काफी कम दिख रहा है. कई जगहों पर शौचालय निर्माण के बावजूद भी लोगों की मानसिकता बदल नहीं पायी है और लोग बेरोकटोक खुले में शौच जा रहे हैं.

प्रशासन द्वारा ओडीएफ को लेकर शुरुआती दिनों में समय-समय पर कई रणनीति बनायी गयी. लेकिन, समय बीतने के साथ ही जिला प्रशासन भी इसे लेकर व्यापक अभियान नहीं चला रहा है. इसकी वजह से स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत लोहिया स्वच्छता अभियान में अभी तक जिले में मात्र भगवानपुर प्रखंड को ही खुले में शौचमुक्त घोषित किया जा चुका है. जबकि, मोहनिया की दो पंचायत भरखर व पानापुर, चैनपुर के बियूरमानपुर, कुदरा के जहानाबाद व रामगढ़ की नरहन, जमुरना को खुले में शौचमुक्त घोषित किया जा चुका है.

30 जून तक भभुआ प्रखंड को करना है ओडीएफ: जिला प्रशासन द्वारा भभुआ प्रखंड को 30 जून तक खुले में शौचमुक्त किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. पूरे प्रखंड में 41671 शौचालय निर्माण का लक्ष्य निर्धारित है, जिसमें 9555 शौचालयों का निर्माण हुआ है.

जबकि, 6454 शौचालय निर्माणाधिन हैं. अधिकारियों के दावे को माने तो 30 जून तक प्रखंड को खुले में शौचमुक्त कर लिया जायेगा. लेकिन, शौचालय निर्माण की जो रफ्तार है उसे देख कर ऐसा नहीं लगता कि प्रशासन ने जो लक्ष्य निर्धारित किया है, वह शत प्रतिशत पूरा हो. फिलहाल भभुआ ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं शहरी क्षेत्र में भी लोग खुले में शौच की प्रवृत्ति को बदल नहीं पा रहे हैं और न ही जिला प्रशासन की इसमें कोई विशेष रुचि दिख रही है.

शौचालय निर्माण में भुगतान का पेच: शौचालय निर्माण कराये जाने हेतु जिला प्रशासन द्वारा कई कदम उठाये गये, जिसमें शौचालय निर्माण के इच्छुक लोगों को जागरूक करते हुए कई जगहों पर संसाधन भी उपलब्ध कराये गये.

लेकिन, शौचालय निर्माण के बाद भी लाभुकों को रुपये के लिए अब प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ रही है. सैकड़ों लाभुकों को पूर्व के वर्षों में बनवाये गये शौचालय का पैसा आजतक नहीं मिला. भुगतान का पेंच इस लिए भी फंसा है. क्योंकि, जब से शौचालय निर्माण योजना पीएचइडी से हस्तानांतरित होकर ग्रामीण विकास विभाग के जिम्मे आ गयी.

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कई लाभुकों का रुपया विभागीय पेंच की वजह से भी फंसा हुआ है. जून 2016 में यह विभाग ग्रामीण विकास विभाग को सौंप दी गयी. अब शौचालय निर्माण का सारा कामकाज जिला जल व स्वच्छता समिति के कंधों पर है. हालांकि, सरकार से भी ओडीएफ योजना के लिए जो राशि डिमांड की गयी है वह अब तक नहीं मिली. इस वित्तीय वर्ष में विभाग ने 44 करोड़ रुपये का डिमांड भेजा था. लेकिन, मात्र 10 करोड़ रुपये ही मिले. इससे कई लाभुकों को शौचालय बनाने के बावजूद भी रुपये नहीं मिले.

बोले डीएम

ओडीएफ को लेकर लगातार हो रही बैठकों में जिले के वरीय अधिकारियों व प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों को विशेष दिशा निर्देश दिये गये हैं. खुले में शौचमुक्त अभियान को सफल बनाने में जन जागरूकता काफी अहम है. इसमें सभी का सहयोग जरूरी है. खुले में शौचमुक्त अभियान को जिला प्रशासन ने चुनौती के रूप में लिया है. प्रशासन व जनता के सहयोग से हम लक्ष्य को पाने में कामयाब होंगे.

राजेश्वर प्रसाद सिंह, डीएम, कैमूर

पटना की टीम करेगी जांच

खुले में शौचमुक्त अभियान की मॉनीटरिंग राज्य मुख्यालय स्तर से की जा रही है. बीते दिनों मुख्य सचिव ने भी ओडीएफ प्रोग्राम को लेकर जिला प्रशासन को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिये थे, जिसमें मुख्य रूप से जन जागरूकता को बढ़ावा दिये जाने की बात कही गयी थी.

खुले में शौचमुक्त प्रखंड व पंचायत की जांच के लिए पटना से टीम भी आयेगी. इस स्थिति में अब जिला प्रशासन का भी हाथ पांव फूलने लगा है. प्रशासनिक पदाधिकारी शौचालय निर्माण कराने को लेकर सजग तो दिख रहे हैं. लेकिन, धरातल पर इसका असर नहीं के बराबर है. कुछ प्रखंडों, पंचायतों व गांवों में ही इसका असर देखने को मिल रहा है.

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