भभुआ सदर : रमजान में महिलाओं पर अधिक जिम्मेदारी होती हैं. रमजान में आम दिनों से काम काफी अधिक बढ़ जाता है. रोजा रख कर घर का काम निबटाने की जिम्मेदारी महिलाओं को रहती है. किचन में भी ये काफी व्यस्त रहती हैं. इफ्तार बनाने के साथ ही सहरी का इंतजाम करना भी इन्हीं की जिम्मेदारी होती है. खास कर नौकरी पेशा महिलाओं को रमजान के महीने में काम का अधिक दबाव रहता है. नौकरी के अलावा रमजान के कामों की भी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है. लेकिन, महिलाएं खुदा की राह में इस काम को भी आसानी से पूरा कर लेती है. रमजान के महीने में घरेलू काम कैसे महिलाएं निबटाती हैं. इस पर महिलाओं ने अपनी राय व्यक्त की है.
रमजान में काम काफी बढ़ जाता है. एक महीने तक महिलाओं को आराम का मौका बहुत कम मिलता है. घर का काम निबटाने के अलावा अधिकतर समय किचन में ही गुजरता है. थकान हो जाती है, मगर फिर भी खुशी होती है. खास कर हमलोगों को इस महीने का इंतजार रहता है. पूरे एक महीने रौनक रहती है. रोजा रखने के साथ ही इबादत भी बढ़ जाता है. घर का काम निबटाने के साथ ही इफ्तार के लिए तरह-तरह का पकवान बनाने में खुशी मिलती है.
रमजान में महिलाओं का काम काफी बढ़ जाता है. किचन का काम खास कर ज्यादा बढ़ जाता है. मगर अल्लाह की रहमत से हर काम आसानी से हो जाता है. हर काम दो गुणा उमंग के साथ होता है.
राफिया खातून, वार्ड छह
एक महीने तक काम की व्यस्तता रहती है. इफ्तार बनाना, घर का काम निबटाना फिर सहरी का इंतजाम करना होता है. बावजूद काम बोझ नहीं लगता, थकान नहीं होती.
जैनब परवीन, वार्ड आठ
रमजान में अधिकतर कामों का दारोमदार महिलाओं पर ही रहता है. कामकाजी महिलाओं को ड्यूटी व घर के काम के बीच सामंजस्य बैठाना पड़ता है. इसके बाद भी रमजान में हर काम आसानी से हो जाता है.
अपसरी बानो, छावनी मुहल्ला
