भभुआ नगर : नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार कैशलेस ट्रांजेक्शन यानी नकदरहित लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए अभियान चला रही है. बैंक से लेकर सामान की खरीदारी तक हर जगह कैशलेस व्यवस्था की तारीफदारी की जा रही है. सभी इससे होनेवाले लाभ को गिना रहे हैं. लेकिन, अभी भी आमलोगों को इस व्यवस्था पर पूरी तरह से भरोसा नहीं पाया है. नतीजतन बैंकों में एटीएम पर, रेलवे टिकट काउंटर पर, बिजली विपत्र जमा करने समेत अन्य ऐसे काउंटर जहां नकद राशि का भुगतान किया जाता है. लोगों की कतार अब भी छोटी नहीं हो पा रही है.
जबकि, जिले में एक अनुमान के मुताबिक लगभग आठ लाख से ज्यादा लोग इंटरनेट सुविधा युक्त स्मार्ट फोन व कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन, कैशलेस व्यवस्था को अपनाने में इनकी रुचि नहीं है. इससे यह बहुदेशीय व बहुपयोगी योजना अभी जिले के अधिकतर लोगों के लिए दूर की कौड़ी साबित हो रही है. शहरी क्षेत्र के कुछ लोग तो इसका लाभ उठाने लगे हैं. लेकिन, ग्रामीण क्षेत्र की 90 फीसद आबादी अब भी इस पर या तो विश्वास नहीं करती या फिर इस झमेले में पड़ना नहीं चाहती.
व्यवसायियों को नहीं मिली पॉश मशीन : जिले में कैशलेस व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकारी संस्थाएं कई कार्यक्रम चला रही हैं. सहकारिता विभाग ने अब खाद वितरण में पीओएस मशीनों का प्रयोग करने का निर्णय लिया है. इसके लिए किसानों को अपना आधार लिंक कराने का सुझाव दिया गया है.
सभी पैक्सों को पीओएस मशीन उपलब्ध करायी जा रही है. वहीं, क्रेडिट कार्ड व डेबिट कार्ड से लेनदेन को बढ़ावा दिया जा रहा है. कई पेट्रोल पंप, होटलों व बड़ी दुकानों में भी यह सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है. हालांकि, नोटबंदी के बाद कई व्यवसायियों ने पॉश मशीन के लिए बैंक में आवेदन दिया. लेकिन, उन्हें अब तक पॉश मशीन नहीं मिली. ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को ले जिला प्रशासन भी अभी पूरी तरह तैयार नहीं है. इसका एक कारण संसाधनों का अभाव भी है. ऊपर से इंटरनेट की रफ्तार को ले अलग परेशानी है. हालांकि, निबंधन सह परामर्श केंद्र बिजली बिल, निर्वाचन संबंधी कार्य, बैंकिंग कार्य व कुछ अन्य विभागों में यह व्यवस्था लागू की गयी है. लेकिन, इन विभागों में लगनेवाली लंबी-लंबी कतारें इनकी सफलता को ले संशय की स्थिति पैदा कर रही है.
कैशलेस ट्रांजेक्शन से है लाभ : जानकारों की माने तो कैशलेस ट्रांजेक्शन से लाभ ही लाभ है. इससे विद्युत विपत्र जमा करने, विभिन्न प्रकार के टैक्स जमा करने, रेलवे का आरक्षित टिकट कटाने, खाते से पैसा ट्रांसफर करने या किसी भी तरह की खरीदारी करने में सुविधा होगी. इतना ही नहीं यह प्रक्रिया आसान व सुरक्षित भी है. इस व्यवस्था का प्रयोग करनेवाले लोगों को बैंक से पैसा निकालने व नकदी लूटने की चिंता नहीं होगी. इसमें लोगों के समय और श्रम दोनों की बचत होती है.
इतना ही नहीं कार्यालयों में जाकर कर्मियों की जी हुजूरी व दलालों से भी छुटकारा मिलेगा. लेकिन, हर दिन लोगों के मोबाइल पर आनेवाले साइबर अपराधियों के फोन कॉल से लोग परेशान हैं. कोई बैंक मैनेजर बन कर तो कोई एटीएम मुंबई के हेड ब्रांच से बोलने का झांसा देकर लोगों से उनके एटीएम कार्ड का नंबर जानने का प्रयास करता है. कई लोग इस झांसे में फंस कर अपनी कमाई भी लुटवा चुके हैं. ऐसी खबरों को सुनने के बाद कई लोग अपने मेल, आइडी व व्यक्तिगत पहचान को गुप्त ही रखना चाहते हैं. इसलिए लोग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से परहेज कर रहे हैं.
