मात्र डीएनएस स्लाइन से हो रहा इलाज, बाकी की दवाएं मंगा रहे बाहर से
भभुआ (सदर) : अगर आप डायरिया से पीड़ित है और सदर अस्पताल में इलाज के लिए जा रहे हैं तो अपने पास अतिरिक्त रुपये जरूर रखे. क्योंकि, सदर अस्पताल में डायरिया पीड़ित मरीजों के लिए मात्र डीएनएस स्लाइन ही उपलब्ध है, जबकि बाकी की दवाएं उन्हें बाजार से खरीदनी पड़ रही है. जिले का प्रमुख अस्पताल होने के बावजूद मरीजों का जैसे-तैसे इलाज किया जा रहा है. खासकर इमरजेंसी में आनेवाले डायरिया पीड़ितों के लिए तो कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है. उदाहरण स्वरूप सोनहन थाना के सैंथा गांव निवासी मुखिया यादव की पत्नी मीरा देवी, उसका नौ माह का बेटा आशीष कुमार और बेटी सविता कुमारी पिछले चार दिनों से डायरिया से पीड़ित होकर सदर अस्पताल में भरती हैं.
लेकिन, इन सभी डायरिया पीड़ितों को अस्पताल से मात्र डीएनएस ही उपलब्ध हो सकी है, जबकि उन्हें अन्य दवाएं बाजार से महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है. मुखिया यादव की पत्नी मीरा ने बताया कि पिछले चार दिनों में उनके द्वारा लगभग एक हजार से अधिक की दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ी है. गौरतलब है कि सदर अस्पताल आनेवाले वह चाहे ओपीडी के मरीज हो या फिर इमरजेंसी के उन्हें बारहों महीने दवा की किल्लतों से अस्पताल मे जुझना पड़ता है. जबकि, सरकार का भी स्पष्ट निर्देश है कि 15 हजार तक की जरुरी दवाएं अस्पताल स्तर से खरीदी जा सकती है लेकिन, इस मामले में शायद ही कभी किसी स्तर पर पहल की जाती हो क्योंकि ऐसा नहीं होता तो स्वयं जिलाधिकारी राजेश्वर प्रसाद सिंह द्वारा भी कइ्र बार दवा की खरीद करने का निर्देश भी हवा-हवाई नहीं हो जाता और मरीजों को दवा के लिए बाजार की ठोकर खाने को मजबूर नहीं होना पड़ता. सदर अस्पताल के डीएस डॉ प्रह्लाद सिंह ने बताया कि अस्पताल में दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन मरीज घबराहट में बाहर से दवाएं खरद रहे हैं. लेकिन, अगर कर्मचारियों के स्तर से कोई गड़बड़ी हो रही है, तो इसकी जांच करायी जायेगी.
