नौकरी का झांसा देकर चार बेरोजगारों से ठगे आठ लाख

भभुआ : जिले के चैनपुर प्रखंड के करजी गांव के रहने वाले एक जालसाज के द्वारा चार बेरोजगारों से नौकरी के नाम पर झांसा देकर आठ लाख रुपये ठग लिये जाने का मामला प्रकाश में आया है. बेरोजगारों को भारतीय विमानापत्तन प्राधिकरण में केबिन सेफ्टी इंस्पेक्टर के पद पर बहाल कराने का आश्वासन दिया गया […]

भभुआ : जिले के चैनपुर प्रखंड के करजी गांव के रहने वाले एक जालसाज के द्वारा चार बेरोजगारों से नौकरी के नाम पर झांसा देकर आठ लाख रुपये ठग लिये जाने का मामला प्रकाश में आया है. बेरोजगारों को भारतीय विमानापत्तन प्राधिकरण में केबिन सेफ्टी इंस्पेक्टर के पद पर बहाल कराने का आश्वासन दिया गया था. आठ लाख रुपये ठगने के बाद बेरोजगारों के पते पर विमानपत्तन प्राधिकरण भर्ती बोर्ड के नाम से भेजा गया नियुक्ति पत्र भी बाद में जाली पाया गया था.

बेरोजगारी की मार से उबरने के लिये जालसाज के फंदे में फंस कर जिले के चार बेरोजगार नौजवान आखिरकार ठगी के शिकार हो गये हैं. जिसे लेकर बेरोजगारों की ओर से चैनपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है.
इसमें प्राथमिकी दर्ज कराने वाले भभुआ वार्ड नंबर नौ निवासी पवन पांडेय पिता परमहंस पांडेय ने आवेदन में कहा है कि उसके ससुराल के लोगों का परिचित करजी गांव का रहनेवाले रितेश उपाध्याय से डेढ़ वर्ष पहले मोबाइल पर बात हो रही थी तो उसने कहा था कि उनके दोनों भाईयों को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में नौकरी मिल सकती है. लेकिन, इसके लिये उन्हें को 12 लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे. शुरुआत में दोनों को ढाई लाख रुपये देना होगा. बाकी आठ लाख 50 हजार रुपये नियुक्ति के समय जमा करने होंगे.
नौकरी के लालच में दोनों भाइयों ने रितेश उपाध्याय द्वारा उपलब्ध कराये गये पंजाब नेशनल बैंक के करजी शाखा के खाता नंबर 269500150004227 में 10 मई, तीन जून और चार जून 2019 को 50 हजार रूपये के हिसाब से डेढ़ लाख रूपये डाल दिये. फिर चार जुलाई को 15 हजार रूपये तथा 31 जुलाई को 5300 रूपये भी उसी खाते में डाल दिये. इस तरह एक लाख 70 हजार 300 रुपये उसके खाते में डाल दिये.
पवन के दोस्त और रिश्तेदार भी नौकरी और पैसा देने के लिए हो गये राजी
रितेश उपाध्याय को एक लाख 70 हजार 300 रुपये देने के बाद पवन ने यह बात अपने दोस्त भभुआ वार्ड नंबर छह के रहने वाले पुनित कुमार पिता भानुप्रताप सिंह तथा सोनहन थाना के तमाढ़ गांव के रहनेवाले अपने रिश्तेदार रितेश दूबे पिता शषिभूषण दूबे को भी बतायी कि उसकी पहुंच ऊपरवालों से है, पैसा देने पर वह नौकरी लगवा देगा. इसके बाद पुनित का सीधा संपर्क भी पवन ने जालसाज से करा दिया. तब जालसाज ने दोनों को पैसा लेकर बनारस बुलाया.
जहां लंका गेट पर पवन ने 82 हजार 700 और पुनित ने 90 हजार रुपये कैश जालसाज के हाथ पर रख दिये. बाद में पुनित ने एक लाख 10 हजार रुपये उसके खाते में भी डाल दिया. साथ ही पवन का रिश्तेदार रितेश दूबे ने भी जालसाज के खाते में 92 हजार रुपये डाल दिये. इसके बाद जालसाज ने भभुआ टाउन हाइस्कूल के पास रितेश को फोन से बुलाकर उस डेढ़ लाख रुपये और ले लिया. इस मामले में पैसे लेन देन करने संबंधित जालसाज के साथ किये गये बात चित की आदि की रिकार्डिंग भी पवन द्वारा की गयी थी.
चेयरमैन ने कहा-सेफ्टी इंस्पेक्टर का कोई पद हमारे विभाग में नहीं होता
चार बेरोजगारों से से आठ लाख से रुपये एठने के बाद लगभग चार-पांच माह पहले पवन पांडे और उसके भाई पंकज कुमार पांडेय के नाम से उसके पते पर स्पीड पोस्ट से भारतीय विमानापत्तन प्राधिकरण का एक नियुक्त पत्र आया.
लेकिन, वह पत्र ओरजिनल की तरह न लग कर फोटा कॉपी दिखने के कारण पवन को कुछ संदेह हुआ, तो इंटरनेट से प्राधिकरण के चेयरमैन का मोबाइल नंबर निकाल कर उस पर बात किया. तो चेयरमैन ने बताया कि सेफ्टी इंस्पेक्टर का कोई पद हमारे विभाग में नहीं होता है. आपको जो पत्र मिला है वह फर्जी है.
पैसा मांगने पर बार-बार टालमटोल करता रहा जालसाज
नौकरी के नाम पर ठगी के शिकार बने पवन और अन्य बेरोजगारों ने जब जालसाज से फर्जी नियुक्ति पत्र का हवाला देकर अपना पैसा मांगना शुरू किया. तो कभी उसके द्वारा मोबाइल नंबर ही नहीं उठाया जाता था. तो कभी मोबाइल स्वीच्ड ऑफ बताने लगती थी. एक दो बार बात भी हुआ तो उसने कहा कि तुम सभी लोगों का पैसा 25 अगस्त तक वापस लौटा दिया जायेगा. लेकिन, 25 तारीख के बाद उसका सभी नंबर ऑफ बताने लगा. जिसके बाद पवन और पुनित उसके गांव करजी पहुंचे. जहां उसके पिता से मुलाकात हुई. लेकिन, पिता ने इस पूरे पल्ले से हाथ झाड़ लिया.

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