- नाक से बांसुरी बजाते नसीम अहमद
- जज्बे और जुनून के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने की है चाहत
- बांसुरी की धुन के कायल इन्हें देते हैं पुरस्कार
दुर्गावती : बांसुरी की मधुर धुन सुनना हर किसी को अच्छा लगता है.अक्सर आपने कई कलाकारों को बांसुरी की मधुर धुन बजाते देखा होगा. लेकिन आपने नाक से बांसुरी बजाते किसी को नहीं देखा होगा. ऐसे ही एक कलाकार कैमूर ज़िले के रामगढ़ प्रखंड क्षेत्र के देवहलीया गांव के हैं, जो अपनी गरीबी को चुनौती देते हुए मुंह नहीं नाक से बांसुरी बजाते हैं.
50 वर्षीय नसीम अहमद बांसुरी से राष्ट्रगीत ऐ मेरे वतन के लोगों —-आदि देशभक्ति के राग अलापते हैं, तो सुनने वालों की भीड़ जुटने लगती है. इनके द्वारा नाक से बजाये गये बांसुरी के तान से मंत्रमुग्ध होकर लोग स्वतः इनकी ओर खिंचे चले आते हैं .तब दस,बीस की बात कौन करे कोई-कोई तो पचास, एक सौ, दो सौ यहां तक कि कोई भावुक होकर पांच सौ रुपये तक भी इनके हुनर पर इन्हें पुरस्कार देते हैं. इसी पैसे से यह अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं.
दो वर्षों से बजा रहे हैं नाक से बांसुरी
नसीम अहमद कहते हैं कि तर्पण, बैन्जो भी बजाते हैं. इसके अलावे मुंह से भी बांसुरी बजाते थे. लेकिन परिवार का खर्च नहीं चलते देख एक नया जुनून नाक से बांसुरी बजाने की ठान ली. अभ्यास शुरू कर दिया ,तो मुकाम भी हासिल कर लिया. बच्चों को उच्चतर शिक्षा दिलाने को लेकर मेरे अंदर एक नया हुनर आ गया. एक बेटे को बीए में तथा दूसरे बेटे को इंटर में तथा सबसे छोटी एक बेटी है, उसे भी पढ़ा रहे हैं. अब तो बॉलीवुड के गाने बजा कर हर धुन निकाल लेते हैं. आस पास के लोग इनके द्वारा नाक से बांसुरी सुनने को बेताब रहते हैं.
बांसुरी की प्रतियोगिता में भाग लेने की तमन्ना
जज़्बा और जुनून के साथ नसीम अहमद की अब एक ही तमन्ना है कि नाक से बांसुरी वादन के दंगल में भाग लेकर गांव घर के अलावे जिले का नाम रोशन करने की कहते हैं कि काश! कोई ऐसा मिल जाता जो बासुरी के दंगल तक पहुंचा देता.
