49 पंचायतों में वाटर लेवल रिचार्ज करने को लेकर कार्ययोजना बनाने का निर्देश

कार्ययोजना को ले कार्यपालक अभियंता जल संसाधन विभाग की अध्यक्षता में छह सदस्यीय टीम का गठन आचार संहिता समाप्त होने के बाद मनरेगा से उक्त योजनाओं पर शुरू करा दिया जायेगा काम भभुआ : आने वाले दिनों में पेयजल समस्या से निबटने के लिए जिले के 49 ग्राम पंचायतों में कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश […]

  • कार्ययोजना को ले कार्यपालक अभियंता जल संसाधन विभाग की अध्यक्षता में छह सदस्यीय टीम का गठन
  • आचार संहिता समाप्त होने के बाद मनरेगा से उक्त योजनाओं पर शुरू करा दिया जायेगा काम
भभुआ : आने वाले दिनों में पेयजल समस्या से निबटने के लिए जिले के 49 ग्राम पंचायतों में कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश जिला पदाधिकारी कैमूर द्वारा दिया गया है. साथ ही कार्ययोजना तैयार करने को लेकर कार्यपालक अभियंता जल संसाधन विभाग की अध्यक्षता में छह सदस्यीय टीम का गठन भी कर दिया गया है. तैयार कार्ययोजना पर आचार संहिता समाप्त होने के बाद मनरेगा से काम शुरू करा दिया जायेगा.
इधर, इस संबंध में पूछे जाने पर उप विकास आयुक्त कृष्ण कुमार गुप्ता ने बताया कि जिले में संभावित पेयजल समस्या से निबटने के लिए मनरेगा योजना से जिले के 49 ग्राम पंचायतों में मनरेगा अंतर्गत भूगर्भ जल धारण क्षमता को सतत बनाये रखने के लिए कार्य योजना बनाने का निर्देश जिला पदाधिकारी द्वारा दिया गया है.
यह कार्य योजना छह सदस्यीय टीम द्वारा बनायी जायेगी, जिसकी अध्यक्षता जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता करेंगे. उननके सहयोग के लिए कार्यपालक अभियंता पीएचइडी, कार्यपालक अभियंता लघु सिंचाई, जिला कृषि पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता मनरेगा तथा सहायक अभियंता मनरेगा को भी टीम में शामिल किया गया है.
उक्त टीम द्वारा मनरेगा के तहत कराये जाने वाले कार्यों एवं स्थल की अनुशंसा की जायेगी. तैयार की गयी कार्ययोजना ग्राम सभा के समक्ष भी रखी जायेगी. कार्ययोजना तैयार होने के बाद मनरेगा से उक्त योजनाओं पर चुनावी आचार संहिता समाप्त होने के बाद कार्य शुरू करा दिया जायेगा.
निजी कुओं, बोरवेल या ट‍्यूबवेल को कार्ययोजना में नहीं किया जायेगा शामिल
वाटर लेवल रिचार्ज करने के लिए बनाये जाने वाली कार्ययोजना में निजी कुंए, बोरवेल या ट‍्यूबवेल आदि की योजनाएं नहीं ली जायेंगी.
उपरोक्त जानकारी देते हुए उप विकास आयुक्त ने बताया कि मनरेगा के तहत मुख्य रूप से भू जल धारण क्षमता से संबंधित चेक डैम, मिट्टी के बांध, पोखर, पइन उड़ाही, नहरों की उड़ाही, बागवानी, पौधारोपण, आहर निर्माण, पुराने जल निकायों का पुनरोद्धार आदि के कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराये जायेंगे, ताकि ऊपरी जल स्तर को प्रभावी तरीके से बढ़ाया जा सके. साथ ही योजनाओं को बरसात शुरू होने के पूर्व ही पूर्ण कर लिया जायेगा.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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