गंदगी व बदइंतजामी देखेंगे ?, तो आइए साहेब मुजान

आजादी के सात दशक बाद भी महादलित बस्ती को नहीं नसीब हुए पक्का रास्ता व बिजली बरसात के महीनों में विद्यालय तक नहीं जा पाते हैं बच्चे मोहनिया सदर : यदि रास्तों पर गंदगी, दुर्गंध व कुव्यवस्था देखना है तो आइए प्रखंड की मुजान पंचायत मुख्यालय में, जहां रास्तों पर इस कदर लोग शौच कर […]

आजादी के सात दशक बाद भी महादलित बस्ती को नहीं नसीब हुए पक्का रास्ता व बिजली
बरसात के महीनों में विद्यालय तक नहीं जा पाते हैं बच्चे
मोहनिया सदर : यदि रास्तों पर गंदगी, दुर्गंध व कुव्यवस्था देखना है तो आइए प्रखंड की मुजान पंचायत मुख्यालय में, जहां रास्तों पर इस कदर लोग शौच कर गंदगी फैलाये हुए हैं कि आप को नाक बंद करके चलना भी मुश्किल हो जायेगा.
यदि आप चारपहिया वाहन से हैं, तो आप के वाहन का पहिया उसी गंदगी पर से होकर गुजरेगा. प्रशासन पंचायतों को ओडीएफ बनाने के लिए जहां युद्धस्तर पर शौचालय निर्माण कराने का दावा कर रही है. वहीं यहां देखने पर शौच से पटे रास्ते इस बात का गवाह बनते नजर आ रहे हैं कि मानों यहां स्वच्छता से किसी का कोई वास्ता ही नहीं है. वहीं, रामसागर ताल से महादलित बस्ती होकर सियारी सकली होते हुए चौरसिया को जोड़नेवाला लिंक रोड का लंबे समय से पक्कीकरण का नहीं होना लोगों के लिए काफी परेशानियों भरा है.
इस कच्चे रास्ते पर तो लोग इस कदर शौच करते हैं कि पैदल चलना भी मुश्किल होता है. गांव की पक्की सड़क से लगभग डेढ किमी की पैदल दूरी तय कर 16 घरों की आबादी के लोग बरसात के दिनों में गिरते संभलते किसी तरह अपने घरों तक पानी से होकर बाहा को पार कर अपने घरों को पहुंचते हैं. इस लिंक रोड को खेती की दृष्टि से किसान मुख्य मार्ग बताते हैं. लेकिन, स्थिति यह है कि बरसात के शुरुआती दौर में खेतों की जुताई करने के जानेवाले ट्रैक्टर भी बरसात समाप्ति के बाद ही वापस घरों को लौटते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण कच्चे रास्ते का खराब होना है.
इतना ही नहीं महादलित बस्ती के बच्चे कच्चा रास्ता होने की वजह से लगभग एक किमी की दूरी तय कर विद्यालय भी नहीं जा पाते हैं. यदि रात या दिन किसी की तबीयत खराब हो जाती है, तो उसे खाट पर लाद कर गांव की मुख्य सड़क तक किसी तरह ले जाना पड़ता है. आजादी के सात दशक बीत गये. लेकिन, अब भी इस महादलित बस्ती तक बिजली नहीं पहुंच सकी है. इस बस्ती के बच्चे चिराग की डिम रोशनी में अपना भविष्य तलाशते हैं.
ग्रामीण रामदरश कुशवाहा कहते हैं कि इस रास्ता के नहीं बनने से किसानों को भी बहुत परेशानी होती है. खेती का कार्य भी गाड़ी नहीं पहुंचने के कारण प्रभावित होता है. ग्रामीण श्रीराम महतो कहते हैं कि इस गांव का विकास ही मानों ठप हो गया है. हर बार सुनने को मिलता है कि इस बार यह रास्ता पक्का बन जायेगा. लेकिन, आज तक नहीं बना, बहुत परेशानी है.
ग्रामीण शिवजी कहते हैं कि इसी रास्ता के किनारे महादलित बस्ती है, जिनके बच्चे बरसात के दिनों में विद्यालय नहीं पहुंच पाते हैं, यदि कोई बीमार हो गया तो उनको खटिया पर लाद कर डेढ़ किमी तक ले जाने के बाद गांव की मुख्य सड़क मिलती है. बिजली तक इन गरीबों को नसीब नहीं है. ग्रामीण सरफुद्दीन अंसारी कहते हैं कि यह लिंक रोड काफी महत्वपूर्ण है. लेकिन, बनवाने की दिशा में कोई पहल नहीं करता है. गांव के सभी रास्ते शौच से पटे पड़े हैं. चलना मुश्किल है.
बोले मुखिया
मुजान पंचायत के मुखिया सुग्रीव पासवान ने बताया कि हमारा गांव बड़ा है. यहां लोगों को सोमवार से स्वच्छता के लिए सड़कों पर सुबह शाम लगाया जायेगा. हम बहुत जल्द महादलित बस्ती के लिंक रोड की पक्कीकरण व बिजली की व्यवस्था करायेंगे.

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