मातमी धुनों पर शहर में निकले ताजिये, सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
भभुआ सदर : मुसलिम धर्मावलंबियों द्वारा मुहर्रम के मौके पर शहर में रविवार को सदर ताजिया के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया. जुलूस शहर के वार्ड 23 स्थित नवाबी मुहल्ला के सदर ताजिया गेट व अखाड़े के साथ निकला. अखाड़ों के नेतृत्व में शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर युवकों ने बाना, पाटा, गदका, फरी व डंडे से खेल का प्रदर्शन भी किया.
शाम-ए-गरीबा के बाद यौम-ए-असुरा पर लोगों ने रोजा रख कर हजरत इमाम हुसैन को याद किया. इस दिन हजरत इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ शहीद हुए थे, जिनमें बच्चे, जवान व बूढ़े शामिल थे. इस मौके पर लोग या हुसैन और या अली के नारे लगाते देखे गये. रविवार की देर रात ताजिया व अलम निकाल कर करबला की ओर प्रस्थान किया, जहां पहलाम किया गया.
दोपहर चार बजे तक विभिन्न जगहों पर अखाड़े निकाला गया. इस दौरान सबसे आगे बड़े चौक नवाबी मुहल्ला के ताजियादार हाजी मीन्नु शेख, आफताब शेख जबकि, दक्षिण मुहल्ला में ताजियादार दीना खां, मुमताज शेख, इसलाम नगर जामा मसजिद के ताजियादार बदरूद्दीन अंसारी, लियाकत राय, अब्दुल हलीम मंसूरी, कुरैशी मुहल्ला के ताजियादार असगर कुरैशी, छावनी मुहल्ला के शफीक खलिफा के ताजियादारी में सभी ताजिया व गेट निकाले गये.
इसके बाद पुन: रात्रि में मुहर्रम का जुलूस निकला. हजरत इमाम हुसैन के शहादत को याद करते हुए अखाड़े के युवकों ने पुराना चौक, एकता चौक आदि जगहों पर एक से एक करतब दिखाये. इस मौके पर खिलाड़ियों ने उस्तादों को पगड़ी बांध कर सम्मानित किया व सलामी दी.
गौरतलब है कि लगभग 1377 साल पहले मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने मानवता हनन व इंसाफ के लिए अपना सब कुछ कुरबान कर दिया था. सत्य के प्रति 72 मोजाहिद करबला में दरिया के किनारे प्यासे शहीद कर दिये गये थे. छह माह के बच्चे अली असगर के गले पर भी तीर लगा था. सदियां बीत गयी लेकिन, मानवता के इतिहास की यह दर्दनाक घटना लोगों के दिलों में आज भी ताजा है.
रामगढ़ : स्थानीय महावीर स्थान न्यू रामलीला समिति के लोगों ने विजयादशमी की रात्री रावण का पुतला दहन किया. रावण का पुतला लगभग 30 फुट की ऊंचा बना गया था. पहली बार रावण का पुतला दहन को लेकर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. न्यू रामलीला समिति के लोगों ने पूरी सतर्कता व सावधानीपूर्वक रावण के पुतले को जलाया. इस दौरान लोगों ने जम कर आतिशबाजी की. रावण के पुतले को मूर्त रूप सूरज शर्मा का नाती विकास शर्मा द्वारा दिया गया था. मौके पर बंगाली ठठेरा, फिरोज अंसारी, सम्मद हासमी, ललन कुशवाहा, कृष्ण, मोहन आदि लोग शामिल थे.
