विवाद से जुड़े कैदी भेजे जायेंगे बाहर

जिलाधिकारी के आश्वासन पर 30 घंटे बाद कैदियों ने तोड़ा अनशन भभुआ सदर : गुरुवार को डीएम राजेश्वर प्रसाद सिंह के आश्वासन पर मंडलकारा में मांगों को लेकर अनशन पर बैठे कैदियों ने लगभग 30 घंटे बाद अपना अनशन तोड़ दिया. जेल में डीएम के समक्ष अनशन पर बैठे 30 से अधिक कैदियों को शरबत […]

जिलाधिकारी के आश्वासन पर 30 घंटे बाद कैदियों ने तोड़ा अनशन
भभुआ सदर : गुरुवार को डीएम राजेश्वर प्रसाद सिंह के आश्वासन पर मंडलकारा में मांगों को लेकर अनशन पर बैठे कैदियों ने लगभग 30 घंटे बाद अपना अनशन तोड़ दिया. जेल में डीएम के समक्ष अनशन पर बैठे 30 से अधिक कैदियों को शरबत पीला कर उनका अनशन तोड़ाया गया. कैदियों के अनशन खत्म होते ही मंगलवार से मंडलकारा में दो गुटों के बीच आपसी मारपीट व विवाद का पट्टाक्षेप हो गया. इस दौरान डीएम ने कहा कि जेल में विवाद उत्पन्न करनेवालों को बाहर भेजा जायेगा़
गौरतलब है कि मंगलवार को मंडलकारा में सिकठी के जसीमुद्दीन अंसारी व इसियां के राकेश पटेल के बीच आपस में मारपीट हो गयी थी. इस मामले पर एक पक्ष के लोगों द्वारा जेल प्रशासन पर जसीमुद्दीन गुट को प्रश्रय देने व दूसरे पक्ष को प्रताड़ित किये जाने को लेकर 27 जून को आरोप लगानेवाले कैदियों के समर्थकों द्वारा मंडलकारा के समीप सड़क जाम कर दिया गया था. उसी दिन जेल प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगा एक गुट के 30 से अधिक कैदी मंगलवार दोपहर बाद से ही अनशन पर बैठ गये थे. इस मामले में अनशन पर बैठे कैदी हस्तक्षेप के लिए डीएम को बुलाने की मांग पर अड़े हुए थे.
जेल में उत्पन्न अराजक स्थिति व कैदियों के अनशन पर बैठे रहने की सूचना पर डीएम राजेश्वर प्रसाद सिंह, एसडीओ ललन प्रसाद सहित डीआरडीए डायरेक्टर रवींद्र कुमार, एएसपी जगन्नाथ रेड्डी, नगर थानाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह गुरुवार को 11:15 बजे मंडलकारा पहुंचे और मंडलकारा का निरीक्षण कर अनशन पर बैठे कैदियों से वार्ता की. इस दौरान डीएम सहित सभी अधिकारी तकरीबन डेढ़ घंटे तक कैदियों से बात की. इस दौरान मुख्य परिसर में अनशन पर बैठे एक गुट और वार्ड छह में आज सुबह से विरोध स्वरूप बैठे दूसरे गुट के कैदियों की समस्याओं से अवगत होते हुए उनकी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया. डीएम के आश्वासन पर अनशन पर बैठे कैदियों ने अपना अनशन तोड़ दिया.
जेल में मोबाइल पहुंचने की होगी जांच
डीएम ने अक्सर जेल में मोबाइल बरामद किये जाने के सवाल पर स्वीकार किया कि कैमरा लगाये जाने के बावजूद जेल के अंदर मोबाइल सहित आपत्तिजनक सामान पहुंच जा रहा है. उन्होंने कहा कि जेल के अंदर मोबाइल किस प्रकार पहुंच रहा. इस पर नजर रखी जा रही है. कुछ जेलकर्मियों को चिह्नित किया जा रहा है. आरोप साबित होते ही उन पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
बीमार बंदियों का जाना हालचाल
मंडलकारा में अनशन पर बैठे कैदियों से मुलाकात से पहले डीएम राजेश्वर प्रसाद सिंह सुबह 10:35 बजे सदर अस्पताल में भरती बीमार बंदियों का हालचाल लेने पहुंचे. इस दौरान उन्होंने इमरजेंसी कक्ष में उनका हालचाल जान अनशन व विवाद का कारण पूछा, उत्तम पटेल ने डीएम से बताया कि जेल के अंदर जेल अधीक्षक के शह पर जसीमुद्दीन अंसारी अक्सर मारपीट कर धमकी देता रहता है. कैदी राकेश पटेल ने कहा कि जेल के अंदर जसीमुद्दीन खुद जेल प्रशासन के सहयोग से मोबाइल का प्रयोग करता है. लेकिन, इस मामले में उसे फंसा दिया गया है. उसका कहना था कि उक्त कैदी जहां रहता है. कैदियों से मारपीट व दबंगई दिखाता रहता है.
मुलाकातियों के लिए शेड बनाने का निर्देश
जेल में अनशन पर बैठे कैदियों से जब मुलाकात करने डीएम मंडलकारा पहुंचे, तो वहां कैदियों से मुलाकाती कक्ष के बाहर धूप में खड़े लोगों को देख डीएम ने प्रभारी जेल अधीक्षक मनोज कुमार सिंह को तलब किया और मुलाकाती कक्ष के बाहर शेड का निर्माण करने व वेटिंग चेयर की व्यवस्था करने का निर्देश दिया.
तीन दिन के लिए एसडीओ को जेल अधीक्षक का प्रभार
अनशनकारी कैदियों से मंडलकारा में मिल कर लौटे डीएम राजेश्वर प्रसाद सिंह ने जेल परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि जेल के अंदर सभी कैदियों के बीच कोई विवाद नहीं है.
बल्कि, एक दूसरे की हत्या मामले में जेल में बंद सिकठी गांव के कुछ कैदियों के बीच की लड़ाई से जेल के अंदर विवाद पैदा हुआ है. डीएम ने बताया कि अनशन पर बैठे कैदियों का कहना था कि जसीमुद्दीन अंसारी के चलते विवाद उत्पन्न होता है. उनका कहना था कि जेल के प्रभारी अधीक्षक के नाम पर वह मनमानी करता है और धमकी देता रहता है.
डीएम ने जेल अधीक्षक पर कैदियों द्वारा लगाये गये आरोप पर कहा कि प्रभारी जेल अधीक्षक द्वारा उक्त कैदी और उसके सहयोगियों को जेल के अंदर मदद किये जाने मामले की जांच करायी जायेगी. उन्होंने कहा कि तीन दिन के लिए भभुआ एसडीओ ललन प्रसाद को जेल अधीक्षक का प्रभार सौंपा गया है. उनके जांच रिपोर्ट पर जेल में उत्पन्न विवाद में शामिल कैदियों के दोषी पाये जाने पर उन्हें जिला के बाहर के जेलों में ट्रांसफर किया जायेगा.

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