राजेंद्र सरोवर व चमन लाल तालाब की हालत खस्ता
भभुआ सदर : जल संचयन के लिए तालाबों का अपना अलग की महत्व है और तालाब व सरोवर की वह जगह है जहां जल संचयन द्वारा भू-गर्भीय जलस्तर को सुरक्षित रखा जा सकता है. लेकिन, आज शहर के अधिकतर तालाब व सरोवर जल संचयन की बात तो दूर अपने ऊपर लाखों खर्च किये जाने के बावजूद विकास की बांट जोह रहे हैं.
अब चाहे वह राजेंद्र सरोवर हो या फिर चमन लाल तालाब. राजेंद्र सरोवर को तो सुंदर और अप्रतिम बनाने के लिए नगर विकास विभाग द्वारा एक करोड़ 10 लाख तीन साल पहले ही नगर पर्षद को भेज चुका है. लेकिन, अब तक मात्र 40 लाख रुपये से चहारदीवारी का ही कार्य कराया जा सका है. जबकि, राजेंद्र सरोवर में कैफेटेरिया, फव्वारा शहरवासियों को बैठने के लिए पक्के घाट व बेंच लाइटिंग के साथ सरोवर में सैर के लिए वोटिंग के कार्य कराये जाने थे. लेकिन, नप की अदूरदर्शिता व कार्यशैली से राशि होने के बावजूद राजेंद्र सरोवर का कायाकल्प नहीं कराया जा सका.
आज इसकी स्थिति यह है कि इस सरोवर में पानी नहीं होने के चलते बच्चे इसका प्रयोग खेल के लिए करते हैं. इसी प्रकार की हालत शहर के अति प्राचीन चमन लाल तालाब की हो चुकी है. रसातल में जा चुके इस तालाब को बचाने के लिए लाखों रुपये नगर पर्षद द्वारा अब तक खर्च किये जा चुके हैं. लेकिन, इसके गंदे पानी में नहाना तो दूर कपड़े भी धोने से परहेज करते हैं. शहर के रविशंकर यादव, मोनू अग्रवाल आदि का कहना था कि नगर पंचायत इन प्राचीन तालाबों के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने की बात कहता है.
लेकिन, राजेंद्र सरोवर व चमनलाल तालाब की हालत खुद-ब-खुद नप के दावों की पोल खोल देती है. उम्मीद है कि वैसे इन लोगों को उम्मीद भी है कि नगर पर्षद के नये अध्यक्ष का ध्यान आकृष्ट होगा और इन दोनों प्राचीन तालाबों के दिन जल्द बहुर जायेंगे. रुपये होने के बावजूद राजेंद्र सरोवर में वोटिंग, कैफेटेरिया निर्माण में हो रही देरी पर नप अध्यक्ष जैनेंद्र आर्य जॉनी का कहना था कि फिलहाल उन्हें इसकी जानकारी नहीं है. अगर, रुपये रखे होने के बावजूद कार्य नहीं कराया जा सका है तो जल्द राजेंद्र सरोवर व चमन लाल तालाब का जीर्णोद्धार शुरू कराया जायेगा.
