Jehanabad News: बिहार राज्य शिक्षक संयुक्त संघर्ष मोर्चा की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को स्थानीय कार्यालय में आयोजित की गई. इस बैठक की अध्यक्षता मोर्चा के अध्यक्ष शंभू कुमार ने की. बैठक में जिले के विभिन्न शिक्षक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और सरकार द्वारा चलाई जा रही शिक्षक ट्रांसफर-पोस्टिंग एवं रेशनलाइजेशन प्रक्रिया पर गहरा असंतोष और रोष व्यक्त किया.
शिक्षक नेताओं और वक्ताओं ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित की गई सरप्लस शिक्षकों की ऑनलाइन सूची से शिक्षकों में काफी आक्रोश है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह नियमों को दरकिनार कर शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने की दिशा में उठाया गया कदम है. इसके माध्यम से ऐच्छिक ट्रांसफर के नाम पर शिक्षकों का जबरन ट्रांसफर करके उन्हें परेशान किया जा रहा है और शिक्षा को बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है, ताकि गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न मिल सके.
10 वर्षों में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद, निजीकरण की साजिश का आरोप
बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 वर्षों में देश भर में 94 हजार सरकारी स्कूलों को बंद किया जा चुका है. इससे सरकार की मंशा साफ जाहिर होती है कि विद्यालयों का निजीकरण कर उन्हें उद्योगपतियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है.
शिक्षक नेताओं ने जोर देकर कहा कि जब तक प्रदेश में समान स्कूल शिक्षा व्यवस्था लागू नहीं की जाती, तब तक शिक्षा के क्षेत्र में समानता ला पाना पूरी तरह असंभव है.
मूल लंबित मांगों को दरकिनार कर ध्यान भटका रही सरकार
शिक्षक प्रतिनिधियों ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षकों की मूल लंबित समस्याओं जैसे सातवां वेतनमान, पुरानी पेंशन योजना (OPS) व पुरानी सेवा-शर्त लागू करना, वेतन विसंगतियों को दूर करना, कालबद्ध प्रोन्नति और विभिन्न प्रकार के एरियर का भुगतान करने के बजाय सरकार अनर्गल नीतियां बनाकर शिक्षकों का ध्यान भटकाने का काम कर रही है.
रविवार को आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक को सत्येंद्र कुमार, संदीप पासवान, रामप्रसाद कुमार सहित कई अन्य शिक्षक नेताओं ने भी संबोधित किया और अपने विचार व्यक्त किए.
