अरवल के 576 सरकारी स्कूलों में नहीं है खेल मैदान, करोड़ों की खेल सामग्री कमरों में हो रही कैद

Arwal News: जिले के सरकारी स्कूलों में करोड़ों रुपये की खेल सामग्री खरीदी गई, लेकिन खेल मैदान और शिक्षकों की कमी के कारण यह बेकार पड़ी है. लाखों खर्च के बावजूद बच्चे खेल से वंचित हैं, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ रहा है.

Arwal News: जिले के सरकारी स्कूलों में करोड़ों रुपये की खेल सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद बच्चों को खेल का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह अधिकांश विद्यालयों में खेल मैदान का अभाव है. सरकार की ओर से स्कूली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ उनकी खेल प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से दो वर्ष पहले खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन अधिकांश स्कूलों में यह सामग्री आज भी कमरों और ट्रंकों में बंद पड़ी है.

वहीं, गिने-चुने प्लस टू विद्यालयों में जिम की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, लेकिन शारीरिक शिक्षकों की कमी के कारण जिम के उपकरण भी उपयोग के बजाय धूल फांक रहे हैं. खेल मैदान और प्रशिक्षित शिक्षकों के अभाव में बच्चों की खेल प्रतिभा प्रभावित हो रही है.

जिले के 599 विद्यालयों में मात्र 28 के पास खेल मैदान

जिले में कुल 599 सरकारी विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें 319 प्राथमिक विद्यालय, 207 मध्य विद्यालय तथा 73 उच्च एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं. शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केवल पांच उच्च विद्यालय और 23 प्लस टू विद्यालयों में ही खेल मैदान की सुविधा उपलब्ध है. यानी जिले के 576 विद्यालय ऐसे हैं, जहां खेल मैदान नहीं है. खेल मैदान के अभाव में विद्यालयों को उपलब्ध कराई गई खेल सामग्री का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है. इससे बच्चों की खेल प्रतिभा का विकास बाधित हो रहा है.

खेल सामग्री पर लाखों रुपये हुए खर्च

सरकार की ओर से खेल सामग्री की खरीद के लिए प्राथमिक विद्यालयों को प्रति विद्यालय पांच हजार रुपये, मध्य विद्यालयों को 10 हजार रुपये तथा माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 25 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए थे. इसके बावजूद अधिकांश विद्यालयों में खेल सामग्री उपयोग के अभाव में सुरक्षित रखी हुई है.

जिम के उपकरण भी नहीं हो रहे उपयोग

जिले के 23 प्लस टू विद्यालयों को जिम की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, लेकिन शारीरिक शिक्षकों की कमी के कारण इन विद्यालयों में जिम उपकरणों का नियमित उपयोग नहीं हो पा रहा है. अधिकांश उपकरण विद्यालयों के कमरों में रखे हुए हैं.

खेल के अभाव का बच्चों पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव

सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी सह मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि बच्चों के नियमित रूप से नहीं खेलने के कारण उनमें मोटापा, मधुमेह, थायराइड और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं के बढ़ने की संभावना रहती है. उन्होंने कहा कि खेल बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है.

उन्होंने बताया कि खेल के माध्यम से बच्चे टीम वर्क, सहयोग, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता जैसे महत्वपूर्ण गुण सीखते हैं. खेल मैदान के अभाव में इन गुणों का समुचित विकास नहीं हो पाता. साथ ही बच्चे मोबाइल गेमिंग की ओर अधिक आकर्षित होने लगते हैं, जिससे उनमें चिड़चिड़ापन भी बढ़ सकता है.

सड़कों और गलियों में खेलने को मजबूर हैं बच्चे

खेल मैदान नहीं होने के कारण कई बच्चे सड़कों और तंग गलियों में खेलने को मजबूर हैं. इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यालयों में खेल मैदान और खेल संबंधी आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएं, तो बच्चों की प्रतिभा को बेहतर मंच मिल सकता है और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सकेगा.


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लेखक के बारे में

Author: Nishikant kumr

Published by: Nikhil Anurag

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