जहानाबाद: स्वामी सहजानंद कॉलेज में गुरु पूर्णिमा पर गीता की प्रासंगिकता पर संगोष्ठी, विद्वानों ने बताया जीवन का कालजयी मार्गदर्शक

स्वामी सहजानंद कॉलेज, जहानाबाद में गुरु पूर्णिमा और महर्षि वेदव्यास जयंती के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में विद्वानों ने श्रीमद्भगवद्गीता को जीवन-दर्शन, नैतिक मूल्यों और आत्मविकास का शाश्वत ग्रंथ बताया. वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय की चुनौतियों से निपटने के लिए गीता का संदेश युवाओं और समाज दोनों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है.

Jehanabad News: स्थानीय स्वामी सहजानंद कॉलेज, जहानाबाद के संस्कृत एवं दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा संयुक्त रूप से गुरु पूर्णिमा तथा महर्षि वेदव्यास जयंती के अवसर पर "वर्तमान समय में श्रीमद्भगवद्गीता की प्रासंगिकता" विषय पर विशेष व्याख्यान एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विद्वानों ने श्रीमद्भगवद्गीता को मानव जीवन का कालजयी मार्गदर्शक, नैतिक चेतना का शाश्वत स्रोत तथा समग्र मानवता के कल्याण का अनुपम दर्शन बताया.

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ. इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने महर्षि वेदव्यास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया.

गीता संपूर्ण मानवता के लिए जीवन-दर्शन का अक्षय स्रोत : प्रो. लक्ष्मी नारायण सिंह

मुख्य वक्ता पटना विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) लक्ष्मी नारायण सिंह ने अपने व्याख्यान में कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव सभ्यता के लिए जीवन-दर्शन का अक्षय स्रोत है.

उन्होंने कहा कि आज जब समाज नैतिक मूल्यों के अवमूल्यन, मानसिक तनाव, अनियंत्रित भौतिक प्रतिस्पर्धा और सामाजिक विघटन जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब गीता का निष्काम कर्म, समत्व, आत्मसंयम और लोकमंगल का संदेश पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है. उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग के सिद्धांतों को जीवन में अपनाए, तो वह न केवल व्यक्तिगत उत्कर्ष प्राप्त कर सकती है, बल्कि राष्ट्र और समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

गीता के प्रत्येक श्लोक में जीवन की समस्याओं का समाधान

प्रो. सिंह ने कहा कि गीता रूपी गंगा में श्रद्धा और समर्पण के साथ अवगाहन करने से जीवन का दिव्य रूपांतरण प्रारंभ हो जाता है. उन्होंने गीता को अमृत कलश की संज्ञा देते हुए कहा कि इसके प्रत्येक श्लोक में जीवन की जटिल समस्याओं का समाधान निहित है. उन्होंने कहा कि गीता में स्वकर्म को ही स्वधर्म बताया गया है तथा मनुष्य को हर परिस्थिति में धैर्य, समत्व और आत्मविश्वास बनाए रखने की शिक्षा दी गई है. उन्होंने महर्षि वेदव्यास के साहित्यिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक योगदान को भी याद किया.

गुरु व्यक्तित्व के शिल्पकार होते हैं : प्राचार्य

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) दीपक कुमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है. गुरु केवल ज्ञान के संप्रेषक नहीं, बल्कि व्यक्तित्व के शिल्पकार, संस्कारों के संवाहक और जीवन-पथ के प्रकाशस्तंभ होते हैं.

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता जीवन-प्रबंधन, आत्मानुशासन, नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता का अद्भुत ग्रंथ है. वर्तमान समय में युवा अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में गीता उन्हें आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है.

गुरु पूर्णिमा आत्ममंथन और ज्ञान-साधना का पर्व

संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार राय ने विषय-प्रवर्तन एवं मंच संचालन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को परमब्रह्म का स्वरूप माना गया है. गुरु ही अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं. उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल श्रद्धा अर्पित करने का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन, आत्मविकास और ज्ञान-साधना के प्रति पुनः समर्पित होने का अवसर है. उन्होंने महर्षि वेदव्यास को भारतीय ज्ञान-परंपरा का अक्षय स्तंभ बताया.

बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी और प्रबुद्ध नागरिक रहे उपस्थित

विचार गोष्ठी में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भी विषय के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे. वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि गीता का संदेश व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी संतुलित, कर्तव्यपरायण और आत्मविश्वासी बनाए रखने की प्रेरणा देता है. कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विनोद कुमार राय ने किया. इस अवसर पर बी.बी.एम. कॉलेज ओकरी के पूर्व प्राचार्य डॉ. बीरेंद्र कुमार शर्मा, दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. मधु सिंह, डॉ. रचना कुमारी, डॉ. पूजा भारती, डॉ. मनीषा प्रिया सहित महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और नगर के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे.

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By Mritunjay Jehanabad

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