जहानाबाद के स्वामी सहजानंद महाविद्यालय में भूगोल विभाग, दर्शनशास्त्र विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में सावन की हरियाली, लोक-संस्कृति, कला और रचनात्मकता को समर्पित सावन महोत्सव का उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया. राजकुमारी सभागार में आयोजित इस महोत्सव में छात्र-छात्राओं ने नृत्य, संगीत और मेहंदी के माध्यम से सावन की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक सुंदरता को अत्यंत मनोहारी ढंग से अभिव्यक्त किया.
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) दीपक कुमार ने सावन महोत्सव को सामूहिकता का उत्सव बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में सावन केवल एक ऋतु नहीं, बल्कि प्रकृति, लोकजीवन और मानवीय संवेदनाओं के बीच गहरे आत्मीय संबंध का प्रतीक है. सावन की हरियाली जहां प्रकृति के नवजीवन का संदेश देती है, वहीं लोकगीत, नृत्य, मेहंदी और पारंपरिक उत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखते हैं. उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को केवल मनोरंजन का अवसर नहीं देते, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए सामूहिकता, सहयोग, आत्मविश्वास और सृजनात्मकता की भावना को भी मजबूत करते हैं.
प्राचार्य ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान अर्जित करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए उन्हें कला, संस्कृति, प्रकृति और समाज से जोड़ना भी आवश्यक है. सावन महोत्सव इसी व्यापक शैक्षणिक दृष्टि का हिस्सा है, जिसमें विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए खुला मंच प्राप्त हुआ. उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए संबंधित विभागों, एन.एस.एस, शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों, निर्णायकों एवं छात्र-छात्राओं को बधाई दी.
कार्यक्रम का वातावरण प्रारंभ से ही उल्लास, उमंग और सृजनात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा. महाविद्यालय परिसर में सावन की प्राकृतिक छटा के बीच भारतीय लोक परंपरा, संस्कृति और कला का सुंदर समागम देखने को मिला. महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय लोक-संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करना था.
महोत्सव के अंतर्गत समूह नृत्य एवं एकल नृत्य, गायन प्रतियोगिता तथा मेहंदी प्रतियोगिता आयोजित की गई. छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह, आत्मविश्वास और कलात्मकता के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. सावन के पारंपरिक गीतों पर आधारित नृत्य प्रस्तुतियों ने सभागार को उत्सवमय बना दिया. गायन प्रतियोगिता में भारतीय संगीत और सावन की लोक-भावना का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जबकि मेहंदी प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपनी कलात्मक दक्षता, कल्पनाशीलता और सौंदर्यबोध का परिचय दिया.
विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए प्रो. प्रवीण दीपक, डॉ. नम्रता कुमारी, डॉ. प्रतीक दास, डॉ. रचना कुमारी, डॉ. सुजय मुखोपाध्याय एवं डॉ. वकील राय ने निर्णायक की भूमिका निभाई. निर्णायकों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का सूक्ष्म मूल्यांकन करते हुए उनकी प्रतिभा और रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया.
इस अवसर पर भूगोल विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. स्नेहा स्वरूप, राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. प्रीति रानी, दर्शनशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधु सिंह, डॉ. मनीषा प्रिया, डॉ. पूजा भारती, डॉ. स्मिति रेखा सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक उपस्थित रहे. उनकी उपस्थिति ने प्रतिभागी छात्र-छात्राओं का उत्साह बढ़ाया तथा कार्यक्रम को गरिमापूर्ण स्वरूप प्रदान किया.
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रतियोगिताओं की समन्वयक डॉ. सीमा कुमारी, डॉ. प्रीति रानी एवं डॉ. मधु सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही. उन्होंने प्रतिभागियों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ प्रतियोगिताओं के सुचारु संचालन को सुनिश्चित किया. मंच संचालन डॉ. सीमा कुमारी ने प्रभावशाली ढंग से किया.
वक्ताओं ने कहा कि सावन भारतीय लोकजीवन में प्रकृति और संस्कृति के अद्भुत मिलन का पर्व है. ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनमें सौंदर्यबोध, आत्मविश्वास, सामूहिकता और सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना का विकास करते हैं. महाविद्यालय में आयोजित यह महोत्सव इस दृष्टि से विशेष महत्वपूर्ण रहा कि इसमें विद्यार्थियों ने केवल दर्शक व श्रोता के रूप में नहीं, बल्कि सक्रिय प्रतिभागी के रूप में अपनी सृजनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया.
सावन महोत्सव के दौरान प्रकृति, संस्कृति, कला और सामूहिकता का संदेश विशेष रूप से उभरकर सामने आया. हरियाली से सराबोर सावन की पृष्ठभूमि में लोकगीतों, नृत्य, मेहंदी और संगीत की प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया. कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि शिक्षा और संस्कृति का समन्वय विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को अधिक संवेदनशील, रचनात्मक और समृद्ध बनाता है. आयोजकों की ओर से सभी प्रतिभागियों, निर्णायकों, शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया. सावन महोत्सव ने महाविद्यालय परिसर में प्रकृति, लोक-संस्कृति और रचनात्मकता का ऐसा मनोहारी संगम प्रस्तुत किया, जिसने विद्यार्थियों के भीतर उत्साह और उमंग के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति अनुराग को भी और गहरा किया.
