जहानाबाद: विश्व संस्कृत दिवस पर भव्य समारोह, मंत्री संतोष कुमार सुमन व पूर्व सांसद अरुण कुमार ने संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन का दिलाया संकल्प

जहानाबाद में विश्व संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया. इस अवसर पर बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन और पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार ने देववाणी संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लिया.

Jehanabad News: विश्व संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को जहानाबाद शहर स्थित एक निजी मैरिज हॉल के सभागार में भव्य समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देववाणी संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और इसे आधुनिक युग में जन-जन तक पहुंचाना रहा. समारोह का विधिवत उद्घाटन बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा, वाराणसी से पधारे डॉ. कमलेश झा, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. एसके सुनील, लोजपा (रा) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. इंदु कश्यप एवं संतोष श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.

वैदिक परंपरा से स्वागत, छात्राओं ने गाए सांस्कृतिक गीत

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. एसके सुनील ने आगत अतिथियों का तिलक लगाकर, पुष्पवर्षा और अंगवस्त्र भेंट कर अभिनंदन किया. इसके उपरांत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई. छात्र-छात्राओं द्वारा सुमधुर स्वागत गान एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया गया.

संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध भाषा: डॉ. अरुण कुमार

समारोह को संबोधित करते हुए जहानाबाद के पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे वैज्ञानिक और प्राचीनतम भाषाओं में से एक है. उन्होंने कहा कि इसे जन-जन की भाषा बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को संकल्पित होकर काम करना होगा. उन्होंने नई पीढ़ी में संस्कृत के अध्ययन और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया.

संस्कृति और ज्ञान की अमूल्य धरोहर है संस्कृत: डॉ. संतोष सुमन

मुख्य अतिथि लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन, ज्ञान और समृद्ध परंपरा की मूल आत्मा है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संस्कृत शिक्षा और भाषा के उत्थान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. इसके व्यापक प्रचार-प्रसार और संरक्षण के लिए समाज के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एसके सुनील ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन डॉ. नारायण निराला द्वारा किया गया. इस अवसर पर वक्ताओं ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृत भाषा से जोड़ने का आह्वान किया.

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By अशोक कुमार

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