jehanabad News : अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले किसान नेताओं ने काको मोड़ के समीप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन कर अपनी नाराजगी जताई. किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों से किए गए वादों को पूरा करने के बजाय ऐसी नीतियां लागू कर रही है, जिससे किसानों की जमीन और आजीविका पर संकट बढ़ रहा है.
किसान आंदोलन के समझौते को लागू करने की मांग
किसान नेताओं ने दिल्ली की सीमाओं पर चले 13 महीने के किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार के साथ हुए समझौते को लागू करने की मांग की. नेताओं ने कहा कि आंदोलन समाप्त कराने के समय किसानों से कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अब तक उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने सरकार से किसानों से किए गए वादों को पूरा करने की मांग की.
सभी फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग
किसान महासभा ने सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की कानूनी गारंटी देने की मांग की. नेताओं ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलना जरूरी है, ताकि खेती को टिकाऊ बनाया जा सके और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो.
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
किसान नेताओं ने बिहार में शहरों के विस्तार और टाउनशिप निर्माण के नाम पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया. उनका आरोप है कि राज्य के 12 शहरों के विस्तार के लिए किसानों की बड़ी मात्रा में जमीन पर्याप्त सहमति के बिना लेने की कोशिश की जा रही है. नेताओं ने आरोप लगाया कि भूमि संबंधी नीतियों का लाभ किसानों के बजाय बड़े कॉरपोरेट समूहों को पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते का विरोध
किसान महासभा ने भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित कृषि व्यापार समझौतों का भी विरोध किया. वक्ताओं ने कहा कि ऐसे समझौतों से भारतीय कृषि और किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने सरकार से किसानों के हितों को प्राथमिकता देने और कृषि क्षेत्र से जुड़े समझौतों पर पुनर्विचार करने की मांग की.
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा व्यापक
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की जमीन की सुरक्षा, फसलों का लाभकारी मूल्य और अन्य मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा. नेताओं ने कहा कि किसान देश की खाद्य व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी मांगों की अनदेखी लंबे समय तक स्वीकार नहीं की जाएगी. इस मौके पर बड़ी संख्या में किसान नेता और किसान मौजूद थे.
