Jehanabad : पिछले छह दिनों में 30% किसानों ने खेत में डाले धान के बिचड़े

जिले में मानसून की बारिश के बाद खेतों में धान के बिचड़े डालने में काफी तेजी आयी है. जिले में मानसून की बारिश की शुरुआत मंगलवार की रात से हुई है.

जहानाबाद. जिले में मानसून की बारिश के बाद खेतों में धान के बिचड़े डालने में काफी तेजी आयी है. जिले में मानसून की बारिश की शुरुआत मंगलवार की रात से हुई है. बुधवार से अब तक पिछले छह दिनों में जिले के 30 प्रतिशत खेतों में धान के बिचड़े डाले जा चुके हैं. इससे पहले रोहिणी नक्षत्र शुरू होने से लेकर पिछले मंगलवार तक केवल 50 प्रतिशत खेतों में ही धान के बिचड़े डाले गये थे. पिछली छह दिनों में 30 प्रतिशत खेतों में धान के बिचड़े डाले जाने के बाद अब तक जिले के 80 प्रतिशत खेतों में बिचड़े डाले जा चुके हैं. अब मात्र 20 प्रतिशत खेत बाकी रह गयी है जिसमें अगले एक सप्ताह में धान के बिचड़े डाल दिये जाने की उम्मीद है. जिले के अधिकतर किसान धान की मोरी तैयार करने के लिए इस मानसून की बारिश के बाद अपने-अपने खेतों में धान के पिछले डालने की तैयारी में जुट गये हैं. पिछले मंगलवार की रात से जिले में रुक-रुक कर मानसून की बारिश हुई है जिसके बाद जिले किसानों को बड़ी राहत मिली है. हालांकि पिछले दो दिनों से जिले में बारिश बंद है. इससे पहले जिले में जारी भीषण गर्मी के कारण जिले के किसान परेशान थे. बारिश नहीं होने के कारण खेत की मिट्टी सूखी हुई थी. कहीं-कहीं तो उसमें दरारें आ गयी थीं, इसके कारण किसान अपने खेतों में धान के बिचड़े नहीं डाल पा रहे थे. जिन किसानों ने रोहिणी नक्षत्र में ही धान के बिचड़े डाले रखे थे, उनके बिचड़े खेतों में सूखने लगे थे जिन्हें जिंदा रखने के लिए उन्हें महंगे डीजल पंप चलकर पटवन करना पड़ रहा था. पिछले चार दिनों में हुई मानसून की बारिश से वैसे धान के बिचड़े में नई जान आ गयी है. रोहिणी नक्षत्र 25 अप्रैल से 7 जून तक था. रोहिणी नक्षत्र के शुरुआती दिनों में बारिश हुई थी इसके बाद जिले के करीब 10 प्रतिशत किसानों ने अपने खेतों में धान के बिचड़े डाले थे. उसके बाद से बारिश नहीं हो रही थी जिसके कारण अधिकांश खेत यूं ही परीत पड़े हुए थे. इस बीच कुछ किसानों ने डीजल पंप चलाकर अपने खेतों में धान के बिचड़े डालने का काम किया था. हालांकि वैसे किसानों के खेतों में भी डाले गए बिचड़े बारिश नहीं होने के कारण मुरझा रहे थे और उन्हें जिंदा रखने के लिए किसानों को महंगे डीजल पंप चलकर पटवन करना पड़ रहा था. अब वैसे किसान भी खुश हैं. धान के बिचड़े डाले जाने के 20 से 25 दिनों के बाद उसकी मोरी तैयार हो जाती है. जिन किसानों ने 25 से 30 अप्रैल के बीच धान के बिचड़े डाले हैं, उनकी मोरी तैयार होने को है और कुछ वैसे किसानों की मोरी अगले एक सप्ताह में तैयार हो जाएगी. जिले में अगले एक सप्ताह के अंदर अगर मानसून की अच्छी बारिश होती है तो वैसे किसान एक सप्ताह बाद धान की रोपनी कर सकते हैं. हालांकि अभी जिले में धान की रोपनी शुरू नहीं हुई है. कई इलाकों में पानी में डूबे धान के बिचड़े : जिले के कई इलाकों में अत्यधिक बारिश और फल्गु नदी में बाढ़ आने के कारण उसके आसपास के खेतों में पानी भर गया है जिसके कारण उन खेतों में डाले गये धान के बिचड़े पानी में डूब गये हैं. अगर दो तीन दिन में इन खेतों से पानी नहीं निकला तो उनमें डाले गये बिचड़े खराब हो जाएंगे जिससे किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. वैसे किसानों को धान की रोपनी करने के लिए दूसरी जगह से धान की मोरी मंगवानी पड़ेगी. ज्ञात हो कि फल्गु नदी में अत्यधिक पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ आ गयी है.

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Published by: Mintu kumar

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