जहानाबाद में नेत्रदान को लेकर निकली जागरूकता रैली, मौत के बाद भी 4 लोगों की जिंदगी रोशन करने का संदेश

जहानाबाद में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा के तहत जागरूकता रैली निकाली गई। जानें नेत्रदान का महत्व और मृत्यु के बाद कॉर्निया दान करने की पूरी प्रक्रिया यहाँ।

जहानाबाद. राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा के अवसर पर मंगलवार को जीएनएम स्कूल, सदर अस्पताल परिसर से नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जागरूकता रैली निकाली गई. रैली का शुभारंभ प्रभारी सिविल सर्जन सह कार्यकारी अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मीना कुमारी ने हरी झंडी दिखाकर किया.

विद्यार्थियों ने दिया मौत के बाद रोशनी का संदेश

रैली में जीएनएम स्कूल के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने हिस्सा लिया. इस दौरान लोगों को नेत्रदान के महत्व की जानकारी दी गई और मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी लाने का संदेश दिया गया. नेत्रदान को लेकर जागरूकता फैलाने वाले संदेशों के जरिए लोगों को इसके लिए प्रेरित किया गया.

स्वास्थ्यकर्मियों ने भी लिया हिस्सा

रैली में नेत्र नोडल पदाधिकारी सह नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर कुमार लाल, नेत्र सहायक राजेश कुमार, प्रधान लिपिक महेश प्रसाद, गणेश कुमार सिंह समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लोगों से नेत्रदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने की अपील की.

छह घंटे के अंदर कॉर्निया निकालना जरूरी

डॉ. मीना कुमारी ने बताया कि मृत्यु के बाद दान किए गए नेत्रों की कॉर्निया का उपयोग दृष्टिहीन लोगों को रोशनी देने में किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि नेत्रदान करने वाले मृत व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाती है. मृत्यु के छह घंटे के अंदर कॉर्निया निकालकर नजदीकी नेत्र बैंक तक पहुंचाना जरूरी होता है.

एक मृत व्यक्ति से चार लोगों को मिल सकती है रोशनी

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर कुमार लाल ने बताया कि आधुनिक तकनीक डेसिमेट मेम्ब्रेन एंडोथेलियल केराटोप्लास्टी के माध्यम से एक मृत व्यक्ति की दोनों आंखों की कॉर्निया से चार लोगों को दृष्टि प्रदान करने में मदद मिल सकती है. उन्होंने कहा कि दृष्टिहीन लोगों के जीवन में उजाला लाने के लिए नेत्रदान के प्रति अधिक से अधिक जागरूकता जरूरी है.

चश्मा लगाने वाले भी कर सकते हैं नेत्रदान

चिकित्सकों के अनुसार, कोई भी स्वस्थ व्यक्ति मृत्यु के बाद नेत्रदान कर सकता है. चश्मा पहनने वाले और मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा चुके लोग भी नेत्रदान कर सकते हैं. जीवित व्यक्ति अपने नजदीकी नेत्र बैंक में नेत्रदान का संकल्प ले सकते हैं.

मृत्यु के बाद इन बातों का रखें ध्यान

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मृत्यु के बाद छह घंटे के अंदर कॉर्निया निकालना जरूरी होता है. इस दौरान परिजनों को शव के पास पंखा बंद रखने, सिर के नीचे तकिया रखने और आंखों को गीली रूई या बर्फ से ढकने की सलाह दी जाती है. नेत्रदान के बाद मृत व्यक्ति के चेहरे पर किसी तरह की विकृति नहीं आती है.

नेत्रदान की भ्रांतियां दूर करने की अपील

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि नेत्रदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करें और अधिक से अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प लें. विभाग का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि मृत्यु के बाद भी किसी की आंखें दूसरे व्यक्ति के जीवन में रोशनी ला सकती हैं.

12 आपराधिक मुकदमे, वर्षों से फरार... जहानाबाद में STF ने कुख्यात सुबोध को किया गिरफ्तार

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By अशोक कुमार

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >