जहानाबाद: 10 किलो लोहे की जंजीर बांधकर देवघर के लिए निकले, श्रावणी पथ पर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने डाक बम शंभू

श्रावणी मेला के दौरान जहानाबाद के जिनार गांव निवासी शंभू 10 किलो लोहे की जंजीर बांधकर दूसरी बार डाक बम के रूप में देवघर जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि बाबा बैद्यनाथ की कृपा से परिवार में सुख-शांति मिली, इसलिए कठिन संकल्प के साथ पुनः यात्रा कर रहे हैं.

Jehanabad iron chain Dak Bam: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के पहले सोमवार को असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर आस्था का अनूठा नजारा देखने को मिला. सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर हजारों डाक बम और सामान्य कांवरिये देवघर की ओर बढ़ते रहे. इसी दौरान जहानाबाद जिले के जिनार गांव निवासी शंभू अपनी अनोखी यात्रा के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे.

10 किलो जंजीर बांधकर कर रहे यात्रा

शंभू अपने शरीर पर करीब 10 किलो वजनी लोहे की जंजीर बांधकर दूसरी बार डाक बम के रूप में बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं. उन्हें देखने और उनकी आस्था को निहारने के लिए मार्ग में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती रही.

बाबा की कृपा से लिया दोबारा संकल्प

शंभू ने बताया कि पिछले वर्ष पहली बार डाक बम बनकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक किया था. बाबा की कृपा से परिवार में सुख-शांति और खुशहाली आने के बाद उन्होंने इस वर्ष भी कठिन संकल्प के साथ यात्रा शुरू की है.

14 से 15 घंटे में पूरी करते हैं 108 किलोमीटर की यात्रा

शंभू ने बताया कि डाक बम के रूप में वह बिना कहीं रुके लगभग 14 से 15 घंटे में 108 किलोमीटर की दूरी तय कर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं. उनका कहना है कि बाबा के प्रति अटूट आस्था ही उन्हें इस कठिन तपस्या को पूरा करने की शक्ति देती है.

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लेखक के बारे में

By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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