Jehanabad News : जहानाबाद में अब्दुलबारी नगर भवन में मंगलवार को 'बेहतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर' विषय पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गयी. जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में जिले के सभी 100 उच्च विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए 11 प्रमुख आयामों पर काम करने का निर्देश दिया गया. डीएम ने स्पष्ट कहा कि विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति तभी बढ़ेगी, जब बच्चे रुचि और उत्साह के साथ स्कूल आयेंगे. इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सबसे जरूरी है.
प्रधानाध्यापकों को बनना होगा कुशल प्रबंधक
जिला पदाधिकारी ने सभी विद्यालय प्रधानों को 11 आयामों पर अनिवार्य रूप से काम करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानाध्यापक केवल प्रशासनिक प्रमुख की भूमिका तक सीमित नहीं रहें, बल्कि उन्हें एक कुशल प्रबंधक के रूप में काम करना होगा. आने वाले दिनों में सभी प्रधानाध्यापकों के प्रदर्शन की नियमित जांच भी की जायेगी. डीएम ने चेतावनी दी कि निर्धारित बिंदुओं पर काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी.
रोज ट्रैक होगी छात्र-शिक्षकों की उपस्थिति
पहले आयाम के रूप में दैनिक उपस्थिति ट्रैकिंग पर चर्चा की गयी. छात्र और शिक्षकों की रोजाना उपस्थिति की निगरानी की जा रही है. इसके लिए दैनिक उपस्थिति पीडीएफ के रूप में भेजने के साथ गूगल शीट के माध्यम से अनुश्रवण और ट्रैकिंग की जा रही है.
हर कक्षा का होगा अपना रूटीन
दूसरे आयाम के तहत कक्षा प्रबंधन पर जोर दिया गया. सभी वर्गों की निश्चित समय सारणी और व्यवस्थित कक्ष संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. इसके अलावा विद्यार्थियों की सीखने की गति और शैक्षणिक प्रगति का आकलन करने के लिए साप्ताहिक परीक्षा आयोजित कराने को कहा गया.
पुस्तकालय और प्रयोगशाला का हो बेहतर उपयोग
विद्यालय संसाधन एवं सुविधाओं से जुड़े आयाम में प्रयोगशाला, पुस्तकालय और अन्य आधारभूत सुविधाओं का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया. वहीं खेल-कूद, सांस्कृतिक और अन्य पाठ्येतर गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की विद्यालय में रुचि बढ़ाने का निर्देश दिया गया.
वर्गवार होगी शिक्षक-अभिभावक बैठक
शिक्षक-अभिभावक बैठक को भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया. डीएम ने वर्गवार शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी आयोजित करने का निर्देश दिया, ताकि प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन और समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जा सके. उन्होंने कहा कि अभिभावक शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण हितधारक हैं, इसलिए उन्हें विभागीय योजनाओं की जानकारी देना जरूरी है. लगातार अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों का फॉलो-अप लेकर अनुपस्थिति के कारणों का पता लगाने और उसके समाधान का भी निर्देश दिया गया.
समय पर पूरा हो पाठ्यक्रम
शैक्षणिक अनुश्रवण के तहत सभी विद्यालयों में निर्धारित पाठ्यक्रम को समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराने पर जोर दिया गया. सब्जेक्ट बास्केट की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी गयी. इसके तहत उपलब्ध शिक्षकों का बेहतर समायोजन कर जरूरत के अनुसार अन्य विषयों की कक्षाएं संचालित करने की बात कही गयी, ताकि शिक्षक की कमी के कारण पढ़ाई बाधित न हो.
चार सदनों में बांटे जायेंगे विद्यार्थी
विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित करने के लिए विद्यालय के बच्चों को चार सदनों में बांटने की व्यवस्था बतायी गयी. इन सदनों के नाम लाल, हरा, नीला और पीला या स्थानीय नदियों और पहाड़ों के नाम पर रखे जा सकते हैं. सदनों के बीच विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित करायी जायेंगी. इसके अलावा विद्यालय में एक हेड बॉय और एक हेड गर्ल की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया, जो कक्षा मॉनिटरों के साथ समन्वय कर विद्यालय में अनुशासन और व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग करेंगे.
फिलो ऐप से पढ़ाई को मिलेगा तकनीकी सहारा
शिक्षण व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने के लिए फिलो ऐप के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया. डीएम ने कहा कि यह राज्य सरकार की सराहनीय परियोजना है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं का लाइव समाधान मिल सकता है. उन्होंने सभी बच्चों को ऐप की जानकारी देने और विद्यालयों में इसके उपयोग को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. शिक्षण से संबंधित समस्या या शिकायत होने पर विद्यार्थी सहयोग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
सीएसआर से मिलेंगे गर्म कपड़े और जूते
आधारभूत सुविधाओं और छात्र कल्याण पर चर्चा करते हुए डीएम ने कहा कि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से बच्चों को शीतकालीन पोशाक, जूते और मोजे उपलब्ध कराने का प्रयास किया जायेगा. जिन विद्यालयों के पास अपना भवन नहीं है या पर्याप्त कक्षाएं उपलब्ध नहीं हैं, उनका तत्काल आकलन कर दो पालियों में संचालन की व्यवस्था करने का निर्देश जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिया गया.
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
डीएम ने कहा कि विद्यार्थियों को विद्यालय से जोड़ने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सबसे जरूरी है. वह स्वयं विद्यालयों का लगातार औचक निरीक्षण करेंगी. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि 11 आयामों पर काम करने में किसी भी स्तर पर कोताही बरती गयी, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि किसी को नुकसान पहुंचाना उद्देश्य नहीं है, लेकिन सभी बिंदुओं पर शत-प्रतिशत काम होना जरूरी है.
प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में भी होगी कार्यशाला
डीएम ने बताया कि फिलहाल यह कार्यशाला उच्च विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए आयोजित की गयी है. इसके बाद सभी प्रखंडों में जाकर मध्य विद्यालय और प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए भी इसी तरह की कार्यशालाएं आयोजित की जायेंगी.
प्रश्नोत्तरी से परखी गयी समझ
कार्यशाला के अंत में सभी प्रधानाध्यापकों के बीच प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गयी. इसमें कार्यशाला में बताये गये विषयों और 11 आयामों से संबंधित सवाल पूछे गये, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रधानाध्यापकों ने दिये गये निर्देशों और शिक्षा सुधार के बिंदुओं को सही तरीके से समझा है.
ये रहे मौजूद
कार्यशाला में जिला शिक्षा पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी रमेश कुमार पाल, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी गोविंद कुमार, सभी सात प्रखंडों के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, जिले के सभी 100 उच्च विद्यालयों के विद्यालय प्रधान तथा शिक्षा विभाग के पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित थे.
