Jehanabad Farmer protest: किसान मोर्चा, बिहार राज्य किसान सभा, सीटू तथा बिहार प्रांतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के संयुक्त तत्वावधान में कार्यकर्ताओं ने सोमवार को ''जेल भरो अभियान'' चलाकर सरकार के खिलाफ समाहरणालय के समक्ष जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान किसान नेताओं और विभिन्न श्रम संगठनों ने अपनी 19 सूत्रीय मांगों को लेकर हुंकार भरी तथा सरकार विरोधी नारेबाजी की.
चारों लेबर कोड रद्द करने की मांग
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किये गये चारों लेबर कोड मजदूर विरोधी हैं और इन्हें अविलंब रद्द किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान सरकार ने जो समझौते किये थे, उन्हें अब तक लागू नहीं किया गया है.
एमएसपी को कानूनी दर्जा देने की मांग
किसानों ने सभी फसलों का लाभकारी मूल्य तय करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देने की मांग उठायी. इसके साथ ही बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेने और बिजली क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी की गयी.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध
किसान नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता देश के किसानों और कृषि व्यवस्था को तबाह करने का एक षड्यंत्र है. नेताओं ने इसे तुरंत रद्द करने की मांग की.
युवाओं के आंदोलन का समर्थन
प्रदर्शन के दौरान देश में पेपर लीक और रोजगार के सवाल पर आंदोलन कर रहे युवाओं और ''जेन-जी'' पर पुलिस द्वारा किये गये लाठीचार्ज, आंसू गैस और गोलीबारी जैसे दमनकारी कदमों की कड़े शब्दों में निंदा की गयी. किसान नेताओं ने कहा कि वे युवाओं और छात्रों के इस न्यायपूर्ण आंदोलन का पूरी तरह समर्थन करते हैं.
आंगनबाड़ी और योजना कर्मियों ने भी उठायी आवाज
आंदोलन में बड़ी संख्या में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं योजना कर्मियों ने भी अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की. महिला प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकारी योजनाओं का निजीकरण बंद होना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कमरतोड़ महंगाई के दौर में मात्र 4500 रुपये मानदेय पर जीवन-यापन करना असंभव हो गया है. उन्होंने सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी और वेतन लागू करने की मांग की, ताकि कर्मियों का भरण-पोषण सम्मानजनक तरीके से हो सके.
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने उनकी 19 सूत्रीय मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक तथा उग्र रूप धारण करेगा.
