Jehanabad Child Science Congress: अब्दुल बारी नगर भवन में 32वीं जिला स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के अंतर्गत आयोजित दिशानिर्देशन सह शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया ने मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्ज्वलित कर किया. उन्होंने कहा कि संविधान में वर्णित वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद एवं ज्ञानार्जन की भावना को विकसित करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है.
जिला पदाधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस विज्ञान प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों में वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान की प्रवृत्ति, नवाचार तथा सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित किया जा सकता है. उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखने, बल्कि उन्हें स्थानीय समस्याओं की पहचान कर उनके कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन करने तथा व्यवहारिक एवं नवाचारी समाधान खोजने के लिए प्रेरित करने की अपील की.
विद्यार्थियों में शोध और नवाचार की प्रवृत्ति विकसित करने पर जोर
डीएम ने प्रत्येक विद्यालय से गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार कराने तथा बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार एवं शोध की प्रवृत्ति विकसित करने पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि विज्ञान को जीवन से जोड़कर पढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे विद्यार्थी समाज की समस्याओं का समाधान खोजने में अपनी भूमिका निभा सकें.
इस वर्ष का विषय है 'निरंतरता के लिए विज्ञान एवं नवाचार'
कार्यशाला में बताया गया कि इस वर्ष राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का मुख्य विषय "निरंतरता के लिए विज्ञान एवं नवाचार" रखा गया है. इसके अंतर्गत अपशिष्ट प्रबंधन, ऊर्जा, वर्षा जल संरक्षण, भोजन, कृषि एवं स्वास्थ्य तथा निरंतरता के लिए भारतीय ज्ञान के अनुप्रयोग जैसे विषयों पर बाल वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार की जाएंगी. जिला स्तर पर चयनित परियोजनाएं राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेंगी और वहां से चयनित परियोजनाएं राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगी.
वैज्ञानिक पद्धति और परियोजना निर्माण का दिया गया प्रशिक्षण
साइंस फॉर सोसायटी, बिहार के अध्यक्ष एवं टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के पूर्व विभागाध्यक्ष (प्राणी विज्ञान) डॉ. अरुण कुमार ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की अवधारणा, परियोजना चयन, वैज्ञानिक पद्धति, डेटा संग्रह, विश्लेषण, रिपोर्ट लेखन एवं प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया.
तकनीकी सत्र में डॉ. कुमारी निमिषा एवं सतीश रंजन ने परियोजना निर्माण, शोध पद्धति तथा मूल्यांकन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी. वहीं प्रेरणा सत्र में विभिन्न शिक्षाविदों ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान संस्कृति एवं नवाचार की भावना विकसित करने पर बल दिया.
बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षाविद हुए शामिल
कार्यक्रम में संयुक्त सचिव सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी राजीव कुमार, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा अभियान) गोविंद कुमार, साइंस फॉर सोसायटी, बिहार के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार, डॉ. कुमारी निमिषा, सतीश रंजन, साइंस फॉर सोसायटी के जिला अध्यक्ष जनार्दन सिंह सहित विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया.
