अरवल से निशिकांत कि रिपोर्ट
Arwal News: अरवल जिले के कई पंचायतों में पिछले करीब 6 महीनों से घर-घर कचरा उठाव पूरी तरह बंद है. शहरों की तरह गांवों में भी यह योजना शुरू की गई थी, लेकिन अब यह धरातल पर विफल नजर आ रही है. इसके कारण गांवों में कचरा खुले में फेंका जा रहा है.
योजना के तहत किया गया था व्यापक प्रचार
लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान फेज-2 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने के लिए हर घर को हरा और नीला बाल्टी दिया गया था. लेकिन कचरा उठाव बंद होने से यह व्यवस्था बेकार साबित हो रही है.
स्वच्छता कर्मियों का वेतन न मिलने से काम प्रभावित
कचरा उठाव में लगे कर्मियों को पिछले कई महीनों से वेतन नहीं मिला है. इसी कारण स्वच्छता ग्राही और कर्मियों ने काम बंद कर दिया है, जिससे पूरे अभियान पर असर पड़ा है.
पंचायत स्तर पर भी व्यवस्था चरमराई
सरकारी गाइडलाइन के अनुसार हर वार्ड में स्वच्छता ग्राही और पंचायत स्तर पर स्वच्छता सुपरवाइजर की नियुक्ति की गई थी. लेकिन कई वार्डों में फरवरी के बाद से कचरा उठाव नहीं हुआ है, जिससे व्यवस्था पूरी तरह ठप है.
सरकारी योजनाओं पर उठे सवाल
लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान और स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत गांवों में स्वच्छता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है और योजना का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है.
वेतन भुगतान न होने से मुख्य कारण
स्थानीय स्तर पर बताया जा रहा है कि स्वच्छता कर्मियों का वेतन पिछले 9 महीनों से लंबित है. इसी वजह से कर्मियों ने कचरा उठाव का काम बंद कर दिया है, जिससे पूरे गांव में गंदगी फैल रही है.
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