नरसंहार का दंश झेलने वाले ग्रामीण खुशी से झूम रहे
जहानाबाद नगर : इरादे अगर मजबूत हो तो हर बाधा दूर हो जाती है. परिस्थियां जैसी भी हो मजबूत इच्छा-शक्ति के आगे वह अनूकुल होती जाती है और मंजिल कदम चूमने लगती है. अरवल जिले के लक्ष्मणपुर बाथे गांव का लाडला गौरव कुमार ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. गांव पर लगे नरसंहार के दाग को धोते हुए उसने यूपीएससी में सफलता पायी है.
इस गांव के लोग आज भी नरसंहार को याद कर सिहर उठते हैं. 1997 में हुए नरसंहार में कइयों की जान चली गयी थी. लेकिन आज गांव की स्थियां बदली है और सुखद एहसास होने लगा है. गांव के युवाओं में पढ़ाई की ललक जगी है. युवाओं की जिद ने ही गांव की तस्वीर बदल दी है. बाथे गांव का लाल गौरव के आइएएस बनने पर पूरा गांव खुशी से झूम उठा है .पेशे से किसान संजीव कुमार तथा चुन्नी देवी का लाडला बचपन से मेघावी रहा है.
हालांकि उसके पिता इतने सक्षम नहीं थे कि वे अपने बच्चे को उच्च कोटि की शिक्षा प्रदान करा सकें. फिर भी उन्होंने चुनौतियों को स्वीकारते हुए अपने माली हालत को दरकिनार कर अपने बेटे को पढ़ाने के लिए खर्च जुटाने में लगे रहे. हालांकि इसके लिए पति-पत्नी दोनो को कड़ी मेहनत मजदूरी करनी पड़ी. कई बार तो बेटे के पढ़ाई के लिए कर्ज भी लेना पड़ा.
अपने माता-पिता की इस मेहनत को गौरव ने समझा तथा पूरी शिद्दत के साथ पढ़ाई में जुटा रहा. इसी का परिणाम है कि उसने यूपीएससी कंपलिट कर अपने माता-पिता के सपनों को साकार कर दिया. अपने बेटे की सफलता पर खुशी का इजहार करते हुए चुन्नी देवी ने बताया कि वह बचपन से ही होनहार था. स्कूल के शिक्षक हमेशा कहते थे कि वह एक बड़ा अधिकारी बनेगा.
यहीं से बेटे को पढ़ाने की प्रेरणा मिलती रही तथा उसे उच्च शिक्षा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया. गांव के स्कूल से मैट्रिक तक की पढ़ाई करने वाला गौरव आगे की पढ़ाई के लिए पटना गया था. पटना में पढ़ाई का खर्च उठाना माता-पिता के लिए कठिन था. फिर भी उन्होंने अपने लाडले को निराश नहीं किया और नहीं पैसे को पढ़ाई में बाधक बनने दिया. इस विषम परिस्थिति में गौरव ने यूपीएससी में सफलाता प्राप्त कर माता-पिता के सपनों को साकार कर दिया. अपने गांव की लाडले की सफलता पर पूरा लक्षमणपुर बाथे गांव खुशी से झूम रहा है.
