शराब की जगह िमठाइयों का मजा

उमंग. नववर्ष पर िदखा शराबबंदी का असर, सड़कों पर न शोर-शराबा न हुल्लड़बाजी कई युवाओं ने पकड़ी झारखंड की राह, कोई रजरप्पा तो कोई रांची शराब बिक्री के संदिग्ध ठिकानों पर रखी जा रही थी नजर फिर भी चोरी-छिपे शराब की हुई बिक्री जहानाबाद : न कोई शोर-शराबा और न ही हुल्लड़बाजी. लहरिया कट बाइक […]

उमंग. नववर्ष पर िदखा शराबबंदी का असर, सड़कों पर न शोर-शराबा न हुल्लड़बाजी

कई युवाओं ने पकड़ी झारखंड की राह, कोई रजरप्पा तो कोई रांची
शराब बिक्री के संदिग्ध ठिकानों पर रखी जा रही थी नजर
फिर भी चोरी-छिपे शराब की हुई बिक्री
जहानाबाद : न कोई शोर-शराबा और न ही हुल्लड़बाजी. लहरिया कट बाइक का परिचालन भी नहीं. पूर्व के वर्षों के अपेक्षा इस वर्ष नये साल के पहले दिन शहर का माहौल पूरी तरह बदला हुआ था. शराबबंदी का व्यापक असर शहर की सड़कों पर दिख रहा था. आम तौर पर अस्तव्यस्त रहने वाले शहर से गुजरने वाले एनएच 83 और एनएच 110 के अलावा मुख्य बाजारों में भी शांति का माहौल रहा. 31 दिसंबर की शाम से देर रात तक और पहली जनवरी को पूर्वाह्न से ही रात भर मदहोशी की हालत में जश्न मनाने वालों को इस बार ऐसा करने की इजाजत नहीं थी. बदलाव का ऐसा दृश्य उभरा शराबबंदी के कारण. पहले यह देखा जाता रहा है कि नव वर्ष का स्वागत करने वालों में 60-70 फीसदी युवक, किशोरावस्था के लड़के, अधेड़ यहां तक की बुजुर्ग भी नशे की हालत में सड़कों पर घूमते थे.
हुल्लड़बाजी करते थे. जहां पाया शराब की छोटी-बड़ी बोतल खोल कर सड़क किनारे दारू गटक जाते थे लेकिन वर्ष 2017 के आगाज के मौके पर स्थिति बिल्कुल विपरीत रही. अतिव्यस्त अरवल मोड़ के समीप चारों तरफ पियक्कड़ों की जमात लगी रहती थी परन्तु इस वर्ष उक्त स्थल पर या तो फूलों के गुलदस्ते बिक रहे थे या ताजी सब्जी एवं फल.
सड़क किनारे पहले दारू दुकानों के आगे अनगिनत ठेले पर पियक्कड़ों के लिए चखने के रूप में चटपटे सामान बेचे जाते थे, लेकिन इस वर्ष उन्हीं ठेले पर मिठाइयां बेची जा रही थी. यह अलग बात है कि उसके खरीदार अत्यंत कम थे. कमोबेश ऐसी ही हालत स्टेशन रोड, काको मोड़, बस पड़ाव, मलहचक मोड़, उटा मोड़, अस्पताल मोड़, सट्टी मोड़, राजाबाजार और अंबेदकर चौक की थी. शहर के ये सारे स्थान ऐसे है जहां शराबबंदी के पूर्व युवाओं की टोलियां खुल्लम खुल्ला शराब पीकर मटरगस्ती किया करते थे, हंगामे मचाते थे पर इस बार ऐसा नहीं दिखा.
चुपके-चुपके बेची गयी शराब : नववर्ष पर शहर में शराब के कारोबारियों और पियक्कड़ों पर विशेष नजर रखी जा रही थी. वर्दीधारी के अलावा सादे लिवास में भी पुलिस चौकसी बरत रही थी बावजूद इसके कुछ धंधेबाजों ने चोरी-छिपे शराब की बिक्री की. मोबाइल फोन से ऑर्डर मिलने पर शराब के शौकिनों तक मोटरसाइकिल से अंगरेजी दारू पहुंचाया गया. कीमत 12 सौ रुपये बोतल थी.
शराब के शौकीन गये झारखंड: इस शहर में हजारों की संख्या में ऐसे युवक हैं जो अभी भी चोरी-छिपे शराब उपलब्ध कर उसका सेवन करते हैं. कही पकड़े न जाएं, नववर्ष का उत्साह फीका न पड़ जाय यह सोच कर बड़ी संख्या मे युवाओं ने टोली बनाई
और प्राइवेट वाहनों से झारखंड की राह कर ली.
रजरप्पा जाकर पूजा के साथ-साथ मस्ती करने की योजना के तहत 31 दिसंबर के रात से ही उनकी गाड़ियां रजरप्पा और रांची आदि क्षेत्रों के लिए खुल गयी थी. इधर कई परिवार ऐसे थे जो नववर्ष की खुशियां मनाने राजगीर या बोधगया गये थे. ऐसी स्थितियों से भी शहर में लोगों की चहल कदमी कम थी.

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