बाहर से फिटफाट, अंदर से मोकामा घाट
जहानाबाद नगर : बाहर से फिट-फाट,अंदर से मोकमा घाट वाली कहावत सदर अस्पताल भवन पर पूरी तरह चरितार्थ हो रही है. अस्पताल भवन को बाहर से रंग-रोगन कर पूरी तरह चकाचक कर दिया गया है, साथ ही फर्श पर टाइल्स लगाकर उसे मॉडल बनाने की कवायद की गयी है, लेकिन अस्पताल भवन की छत का प्लास्टर प्रतिदिन जगह-जगह टूट कर गिर रहा है. इतना ही नहीं भवन भी जर्जर हो गया है.
कई स्थानों पर खिड़की तथा दरवाजे के पास वेंटिलेटर टूटकर गिर रहा है. अस्पताल प्रशासन द्वारा कई स्थानों पर मरम्मत तो करायी गयी लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा के समान साबित हो रहा है. सदर अस्पताल भवन का निर्माण वर्ष 1981 में कराया गया था.तत्कालीन मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा द्वारा 13 जून, 1981 को सदर अस्पताल भवन का उद्घाटन किया गया था. तब से इसी भवन में सदर अस्पताल का संचालन हो रहा है.
अस्पताल परिसर में इस भवन के अलावा ओपीडी, एसएनसीयू, दवा गोदाम, विकलांग पुनर्वास केंद्र, नशामुक्ति केंद्र आदि भवनों का निर्माण कराया गया, लेकिन मुख्य भवन की मरम्मत नहीं करायी गयी, जिसके कारण यह भवन काफी जर्जर हो गया है. मुख्य भवन के कई कमरों में तो सिर्फ इसलिए ताला लटक रहा है क्योंकि वे कमरे काफी जर्जर हैं. इस कारण से इन कमरों का उपयोग नहीं हो पा रहा है.
कई बार टूट कर गिर चुका है छत का प्लास्टर : सदर अस्पताल का मुख्य भवन इस कदर जर्जर हो गया है कि कई स्थानों पर कई बार छत का प्लास्टर टूट कर गिर चुका है. इतना ही नही बिल्डिंग का पोर्टिको भी पूरी तरह धराशायी होने के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा इसे तोड़कर हटा दिया गया तथा उसके स्थान एक छोटे पोर्टिको का निर्माण कराया गया.
अस्पताल भवन के कॉरिडोर जो इमरजेंसी को विभिन्न वार्डों से जोड़ता है, उसमें आये दिन छत का प्लास्टर टूटकर गिरने की घटना होती रहती है. इससे कई बार मरीज व उनके परिजन भी घायल हो चुके हैं. अस्पताल भवन के उस हिस्से में जहां जांच घर और एक्सरे, अॅल्ट्रासाउड का संचालन हो रहा है, उस इलाके की खिड़की तथा दरवाजों का वेंटिलेटर आये दिन टूट कर गिरता रहता है. अस्पताल प्रशासन द्वारा इसकी शिकायत वरीय अधिकारियों से भी की गयी, लेकिन भवन निर्माण प्रमंडल के अधिकारी अस्पताल आकर सिर्फ नाप-जोख कर चले गये, लेकिन अस्पताल भवन का कायाकल्प नहीं हुआ.
क्या कहते हैं अधिकारी
अस्पताल का मुख्य भवन जर्जर होने के कारण कई स्थानों पर छत का प्लास्टर टूट कर गिरता रहता है.अस्पताल प्रबंधन सिर्फ 50 हजार रुपये तक का ही मरम्मत कार्य करा सकता है. कई बार मरम्मत करायी भी गयी है, लेकिन अस्पताल भवन को बड़े पैमाने पर मरम्मत की आवश्यकता है, जो भवन निर्माण विभाग ही करा सकता है.
कुणाल भारती, अस्पताल प्रबंधक
