कुव्यवस्था. आरक्षी केंद्र में असुरक्षा के बीच रहने की बाध्यता
जहानाबाद पुलिस लाइन में रहनेवाले सिपाही-हवलदार असुरक्षा व समस्याओं के बीच अपने कर्तव्यों का निर्वहण कर रहे हैं. इनके रहने व सोने के लिए आठ कमरों का मात्र एक बैरक है, जिसमें किसी तरह गुजारा करना पड़ रहा है. कमरे की वायरिंग बदतर हाल में है ही, टूटी हुई खिड़की के कारण हमेशा खतरे की आशंका बनी रहती है.
जहानाबाद : असुरक्षा व समस्याओं के बीच अपने कर्तव्यों का निर्वहण कर रहे पुलिस लाइन के कर्मियों के बड़े ही मार्मिक बोल हैं. उनका कहना है कि ‘मैं भी इंसान हूं, जान पर खेल कर अपने कर्तव्यों निर्वहन करता हूं, इसके बावजूद आराम के लिए थोड़ा माकूल जगह भी नहीं मिल पाता. यह तो केवल बानगी है, ऐसे न जाने कितनी समस्याएं हैं, जिन्हें झेलते हुए हमलोग अपनी ड्यूटी निभाने को बाध्य हैं.’ विदित हो कि यहां तकरीबन एक हजार सिपाही व हवलदार पदस्थापित हैं. इनके लिए मात्र एक बैरक की व्यवस्था है. दोमंजिला वाले इस बैरक में आठ कमरे हैं. एक कमरे में किसी तरह 15 से 16 पुलिसकर्मी रहते हैं. इस तरह से करीब 240 पुलिसकर्मी बैरक में जीवन बसर कर रहे हैं. शेष पुलिसकर्मियों के रहने की व्यवस्था के नाम पर फिलहाल अधिकारियों के लिए बने क्वार्टर में शिफ्ट किया गया है.
बरामदे में रखते हैं सामान : जगह की कमी का नजारा उक्त बैरक में रहनेवाले आरक्षियों के बीच देखा जा सकता है. बैरक के कमरे में बेड लगे रहने के कारण उन्हें पुलिसकर्मियों को अपने सामान रखने की भी समस्या है. जो आरक्षी व हवलदारों को क्वार्टरों में शिफ्ट किया गया है, उनके सामान भी बैरक के बरामदे, शौचालय और स्नानागार वाले रास्ते पर बिखरे पड़े हैं. यदि बैरक की समस्या का समाधान हो जाये, तो पुलिसकर्मियों की एक बड़ी परेशानी दूर हो सकती है. वैसे विगत कई वर्षों से पुलिस लाइन परिसर में एक बड़ा बैरक का निर्माण कराया जा रहा है, परंतु बहुत ही धीमी गति से. बीच-बीच में काम बंद हो जाने से भवन का निर्माण पूरा होने में अभी काफी विलंब हो सकता है.
असुरक्षा के साये में रहने की बाध्यता : जिस बैरक में पुलिसकर्मी रह रहे हैं, उसकी खिड़कियों के सभी शीशे टूटे हुए हैं. विद्युत तार की वायरिंग की स्थिति भी बहुत ही खराब है. ऐसी स्थिति में आरक्षियों में हमेशा असुरक्षा की भावना बनी रहती है.
इस समस्या को लेकर पुलिस मेंस एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष ललन पासवान ने एसपी को एक आवेदन देकर पुलिसकर्मियों को हो रही
परेशानी का निराकरण करने का अनुरोध किया था. दिये गये आवेदन में अध्यक्ष ने कहा था कि वायरिंग की स्थिति
खराब रहने से बिजली की सप्लाइ नहीं हो पाती है एवं खतरे की आशंका बनी रहती है.
जलमीनार नहीं रहने से पानी की हो रही बरबादी : आरक्षी केंद्र में लगाये गये अधिकतर हैंडपंप खराब हालत में हैं. वैसे बोरिंग की व्यवस्था तो है, लेकिन जलमीनार नहीं रहने से पानी का संग्रहण नहीं हो पाता है. ऐसी हालत में नलों से पानी बरबाद होता रहता है. पुलिस लाइन के सिपाही व हवलदारों के पेयजल संकट दूर करने के लिए एक बड़ी जलमीनार की जरूरत है, जिसके माध्यम से 24 घंटे उन्हें पानी की सुविधा मिल सके. इसके अलावा पुलिस लाइन के ग्राउंड में जलजमाव की भी समस्या है. बरसात के दिनों में मैदान जलमग्न हो जाता है.
सुरक्षा का भी है सवाल : पूर्व में पुलिस लाइन पर उग्रवादियों का हमला हो चुका है. 2005 में जेल ब्रेक के दौरान माओवादियों ने इस पुलिस लाइन पर गोलीबारी की थी. उस वक्त वहां तैनात जवानों ने दिलेरी का परिचय देते हुए मैगजीन कक्ष की सुरक्षा की थी. फिलहाल पुलिस लाइन के पश्चिम की चहारदीवारी कुछ दूर तक टूटी हुई है, जिसे तार के सहारे घेरा गया है.
लेकिन, पुलिस लाइन की सुरक्षा के लिए यह पर्याप्त नहीं है.
खिड़की व बिजली की वायरिंग भी है लचर
हाल पुलिस लाइन का
जेल ब्रेक के दौरान उग्रवादियों ने पुलिस लाइन पर भी की थी गोलीबारी
